स्तोत्र संग्रह
शिव, विष्णु, राम और देवी स्तोत्र
शिव, विष्णु, राम और देवी स्तोत्र
आञ्जनेय दण्डकम् भगवान हनुमान की शक्ति, रामभक्ति और पराक्रम का गुणगान करने वाली प्रसिद्ध तेलुगु भक्तिरचना है।
हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान जी की अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है। यह विशेष रूप से शारीरिक पीड़ा, रोग, मानसिक कष्ट और बाधाओं को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि तुलसीदास जी ने बाहु पीड़ा दूर करने के लिए इसका पाठ किया था।
स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र भगवान भैरव के स्वर्णाकर्षण रूप की स्तुति है। इसका पाठ करने से धन, समृद्धि, व्यापार में वृद्धि, आर्थिक बाधाओं से मुक्ति और लक्ष्मी प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से धन आकर्षण के लिए प्रसिद्ध है।
बटुक भैरव कवच भगवान बटुक भैरव की शक्तिशाली रक्षा स्तुति है जिसका वर्णन रुद्रयामल तंत्र में मिलता है। इसका पाठ करने से भय, शत्रु, नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं और अचानक आने वाली विपत्तियों से रक्षा होती है।
लिङ्गाष्टकम् भगवान शिव के शिवलिंग स्वरूप की स्तुति है। इसका पाठ करने से पापों का नाश, कष्टों से मुक्ति और शिव कृपा प्राप्त होती है। यह आठ श्लोकों का प्रसिद्ध स्तोत्र है जिसका नियमित पाठ अत्यंत शुभ माना गया है।
रुद्राष्टकम् गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान शिव की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से भय, रोग, दरिद्रता और कष्ट दूर होते हैं तथा शिव कृपा प्राप्त होती है। यह आठ श्लोकों वाला शक्तिशाली स्तोत्र है।
दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित भगवान शिव की प्रभावशाली स्तुति है। इसका नियमित पाठ करने से दरिद्रता, कर्ज, आर्थिक बाधाएँ और जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं। यह स्तोत्र धन, समृद्धि और शिव कृपा प्रदान करने वाला माना गया है।
शिव महिम्न स्तोत्र गन्धर्व पुष्पदंत द्वारा रचित भगवान शिव की अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है। इसका श्रद्धा से पाठ करने पर पापों का नाश, भय से मुक्ति, शिव कृपा, धन-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यहाँ सम्पूर्ण शिव महिम्न स्तोत्र का हिन्दी अर्थ, लाभ, पाठ विधि और सही समय दिया गया है।
भगवान शिव द्वारा रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र अत्यंत शक्तिशाली स्तुति है। इसका नियमित पाठ करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा, रोग, बाधाएँ दूर होती हैं तथा साहस, बुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। नीचे पूर्ण शिव तांडव स्तोत्र, हिंदी अर्थ, पाठ विधि और लाभ दिए गए हैं।
मार्कण्डेय मुनि द्वारा वर्णित “महामृत्युंजय स्तोत्र” मृत्युंजय पंचांग में प्रसिद्ध है और यह मृत्यु के भय को मिटाने वाला स्तोत्र है।
श्री सूक्त ऋग्वेद का प्रसिद्ध लक्ष्मी सूक्त है। इसका पाठ करने से धन, समृद्धि, सौभाग्य और लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है। यह वैदिक स्तुति विशेष रूप से लक्ष्मी पूजा में पढ़ी जाती है।
कनकधारा स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माँ महालक्ष्मी की प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से दरिद्रता दूर होती है, धन-समृद्धि आती है और लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
अगस्त्य कृत सरस्वती स्तोत्र माता सरस्वती की स्तुति है जिसमें ऋषि अगस्त्य देवी से विद्या, बुद्धि और वाणी की कृपा की प्रार्थना करते हैं। इसका पाठ करने से स्मरण शक्ति, ज्ञान और वाणी में सिद्धि प्राप्त होती है।
याज्ञवल्क्य कृत सरस्वती स्तोत्र माता सरस्वती की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से बुद्धि, स्मरण शक्ति, वाणी, ज्ञान और विद्या की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से विद्यार्थियों और विद्या प्राप्त करने वालों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माँ दुर्गा की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से शत्रु नाश, भय से मुक्ति, साहस, शक्ति और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कीलक स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इसका पाठ करने से सप्तशती पाठ का फल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है। यह स्तोत्र देवी की कृपा प्राप्त करने और सभी बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।
अर्गला स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का अत्यंत महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इसका पाठ करने से धन, विजय, शत्रु नाश, सुख-समृद्धि और देवी कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र देवी दुर्गा की आराधना में कवच और कीलक के साथ पढ़ा जाता है।
गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र भगवान विष्णु की स्तुति है जिसे संकट, भय, रोग और कठिन परिस्थितियों से मुक्ति के लिए पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र श्रीमद्भागवत महापुराण से लिया गया है और अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।
महाभारत के अनुशासन पर्व में वर्णित 'श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्रम्' भगवान विष्णु के 1000 दिव्य नामों का संग्रह है। यहाँ गीता प्रेस गोरखपुर के मानक पाठ के अनुसार संपूर्ण श्लोक, अर्थ और फलश्रुति दी गई है।
आदि गुरु शंकराचार्य रचित 'कृष्णाष्टकम्' भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का अत्यंत मधुर और सिद्ध स्तोत्र है। यहाँ पढ़ें मूल संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ और इसके पाठ की महिमा।
श्रीमद्भागवत पुराण के छठे स्कन्ध में वर्णित 'नारायण कवच' भगवान विष्णु का परम शक्तिशाली रक्षा कवच है। यहाँ पढ़ें संपूर्ण संस्कृत पाठ और हिंदी अनुवाद।
नारद पांचरात्र में वर्णित 'त्रैलोक्य मंगल कवच' भगवान श्रीकृष्ण (गोपाल) का सिद्ध और चमत्कारिक रक्षा स्तोत्र है। इसके पाठ से सर्वत्र विजय और सुख मिलता है।
श्री ऋणमोचन नृसिंह स्तोत्र कर्ज मुक्ति, आर्थिक संकट और दरिद्रता दूर करने का अचूक और शक्तिशाली पाठ है। यहाँ पढ़ें मूल संस्कृत पाठ और संपूर्ण हिंदी अर्थ।
श्री नृसिंह पञ्चामृत स्तोत्र (Shri Narsimha Panchamruta Stotram) भगवान नृसिंह की स्तुति में गाया गया एक अत्यंत मधुर, दुर्लभ और चमत्कारी स्तोत्र है।
त्रैलोक्य विजय नृसिंह कवच (Trailokya Vijaya Narsimha Kavach) भगवान नृसिंह का एक अत्यंत उग्र और शक्तिशाली स्तोत्र है। तंत्र शास्त्र और संहिताओं में वर्णित यह कवच घोर संकटों, प्रबल शत्रुओं, तंत्र-मंत्र की बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों के तत्काल नाश के लिए अचूक माना गया है। मान्यता है कि इसके पाठ से व्यक्ति अभेद्य हो जाता है और तीनों लोकों में विजय प्राप्त करता है। यहाँ पढ़ें त्रैलोक्य विजय नृसिंह कवच का मूल संस्कृत पाठ और उसका संपूर्ण हिन्दी अनुवाद।
श्री नृसिंह कवचम् (Shri Narsimha Kavacham) ब्रह्मांड पुराण में वर्णित एक अत्यंत शक्तिशाली रक्षा स्तोत्र है, जिसे स्वयं भक्त प्रह्लाद ने भगवान नृसिंह की स्तुति करते हुए गाया था। यह पवित्र कवच जीवन के सभी संकटों, रोगों और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है तथा भक्त को सर्वत्र विजय, सुख-समृद्धि और मोक्ष प्रदान करता है। यहाँ पढ़ें नृसिंह कवच का मूल संस्कृत पाठ और उसका संपूर्ण हिन्दी अनुवाद।
रावण की वो महास्तुति! 🔱 जानिए शिव ताण्डव स्तोत्र का सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और इसके चमत्कारी लाभ। अभी पढ़ें! 👇
नम: शिवाय" का दिव्य रहस्य! 🔱 शिव पंचाक्षर स्तोत्र से पाएं महादेव की कृपा और मोक्ष का सरल मार्ग। अभी पढ़ें! 👇
ध्यानम् वन्दे बालं स्फटिकसदृशं कुन्तलोल्लासिवक्त्रं । दिव्याकल्पैर्नवमणिमयैः किंकिणीनूपुराढ्यम् ॥ दीप्ताकारं विशदवदनं सुप्रसन्नं त्रिनेत्रं । हस्ताब्जाभ्यां बट…
अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः । श्रीसीतारामचन्द्रो देवता । अनुष्टुप् छन्दः । सीता शक्तिः । श्रीमद्हनुमान् कीलकम् । श्रीरामचन…
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला” सरस्वती वंदना ज्ञान, बुद्धि, वाणी, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित प्रसिद्ध प्रार्थना है।
श्री राजराजेश्वरी अष्टकम् माता राजराजेश्वरी के विविध स्वरूपों, दिव्य शक्तियों और करुणा का वर्णन करने वाला आठ श्लोकों का स्तोत्र है।
श्री मीनाक्षी पञ्चरत्नम् माता मीनाक्षी को समर्पित पांच दिव्य श्लोकों का स्तोत्र है। यहां पढ़ें इसका संपूर्ण संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, महत्त्व, लाभ और पाठ-विधि।
श्री ललिता सहस्रनाम स्तोत्र में माता ललिता त्रिपुरसुंदरी के एक हजार दिव्य नामों का वर्णन है।
श्री लक्ष्मी नृसिंह करावलम्ब स्तोत्र भगवान लक्ष्मी नृसिंह से रक्षा, सहायता और संसाररूपी सागर से पार लगाने की प्रार्थना है।
श्री दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् में माता दुर्गा के 108 दिव्य नामों का वर्णन है। यहां इसका शुद्ध संस्कृत पाठ, प्रत्येक नाम का सरल हिंदी अर्थ, फलश्रुति, महत्व और पाठ-विधि पढ़ें।
दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला में माता दुर्गा के 32 दिव्य नामों का वर्णन है। यहां इसका शुद्ध संस्कृत पाठ, सभी नामों का सरल हिंदी अर्थ, फलश्रुति, महत्व और पाठ-विधि पढ़ें।
भवानी अष्टकम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माता भवानी की अत्यंत भावपूर्ण शरणागति है। यहां पढ़ें इसका शुद्ध संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ-विधि।
देवी अपराध क्षमापण स्तोत्रम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माता जगदम्बा से पूजा में हुई गलतियों और अपराधों की क्षमा मांगने वाली भावपूर्ण स्तुति है।
श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित भगवान शिव के आदिगुरु स्वरूप की ज्ञानमयी स्तुति है। यहां इसका शुद्ध संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ-विधि पढ़ें।
शिव रक्षा स्तोत्रम् महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा कथित भगवान सदाशिव का दिव्य रक्षा-कवच है। यहां इसका संपूर्ण संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ-विधि पढ़ें।
वेदसार शिव स्तोत्रम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित भगवान शिव की दिव्य स्तुति है। यहां इसका संपूर्ण संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ-विधि पढ़ें।
नीलकण्ठ स्तोत्रम् भगवान शिव के विषपान करने वाले करुणामय स्वरूप की स्तुति है। यहां पढ़ें नीलकण्ठ स्तोत्र का शुद्ध संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ-विधि।
उमा महेश्वर स्तोत्रम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित भगवान शिव और माता पार्वती की सुंदर स्तुति है। यहां पढ़ें इसका संपूर्ण संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, लाभ और पाठ-विधि।
अर्धनारीश्वर स्तोत्रम् में भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप की सुंदर स्तुति की गई है। यह स्तोत्र शिव और शक्ति की अभिन्नता, संतुलन तथा संपूर्ण सृष्टि के माता-पिता स्वरूप को प्रकट करता है।
शिव अपराध क्षमापना स्तोत्र में भक्त अपने जीवन में जाने-अनजाने हुए अपराधों और पूजा में हुई भूलों के लिए भगवान शिव से क्षमा मांगता है। यह स्तोत्र मनुष्य को जीवन की नश्वरता समझाकर शिव-भक्ति की ओर प्रेरित करता है।
शिवाष्टकम् भगवान शिव के विश्वनाथ, भूतनाथ, महाकाल, गंगाधर और अर्धनारीश्वर स्वरूप की महिमा बताने वाला प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसके आठ श्लोकों में महादेव के दिव्य स्वरूप और कृपा का वर्णन किया गया है।
श्री हरि स्तोत्रम् भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप, गुणों और विश्वपालक शक्ति का वर्णन करने वाला सुंदर स्तोत्र है। इसमें भक्त बार-बार भगवान श्रीहरि की आराधना करते हुए उनकी शरण ग्रहण करता है।
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् माता अन्नपूर्णेश्वरी की महिमा का वर्णन करने वाली प्रसिद्ध रचना है। इसमें माता से केवल अन्न ही नहीं, बल्कि ज्ञान, वैराग्य, करुणा और आध्यात्मिक पूर्णता की भिक्षा मांगी गई है।
दुर्गा सप्तश्लोकी में दुर्गा सप्तशती के सात अत्यंत प्रभावशाली श्लोक संकलित हैं। इसमें माता दुर्गा से भय, रोग, दुःख और बाधाओं को दूर करके भक्तों की रक्षा करने की प्रार्थना की गई है।
बिल्वाष्टकम् भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने की महिमा बताने वाला प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसमें एक बिल्वपत्र को श्रद्धापूर्वक अर्पित करने का फल अनेक बड़े धार्मिक अनुष्ठानों के समान बताया गया है।
चंद्रशेखर अष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में ऋषि मार्कण्डेय द्वारा रचित माना जाता है। इसमें भगवान चंद्रशेखर की शरण लेकर मृत्यु के भय से रक्षा की प्रार्थना की गई है।
शिव मानस पूजा स्तोत्र में भक्त मन ही मन भगवान शिव को आसन, स्नान, वस्त्र, पुष्प, भोजन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करता है। यह स्तोत्र सिखाता है कि श्रद्धा से किया गया प्रत्येक कार्य भगवान शिव की पूजा बन सकता है।
महाराज दशरथ द्वारा शनि देव की स्तुति में कहे गए दशरथ कृत शनि स्तोत्र का संपूर्ण संस्कृत पाठ और सरल हिंदी अर्थ पढ़ें। जानिए इसकी फलश्रुति, पाठ के लाभ और सही पाठ विधि।
महर्षि व्यास द्वारा रचित नवग्रह स्तोत्रम् का शुद्ध संस्कृत पाठ और सरल हिंदी अर्थ पढ़ें। इसमें सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु की स्तुति तथा फलश्रुति दी गई है।
माता लक्ष्मी के आठ दिव्य स्वरूपों को समर्पित अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ और सरल हिंदी अर्थ पढ़ें। इसमें आदिलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, धैर्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी और धनलक्ष्मी की स्तुति की गई है।
श्री महालक्ष्मी अष्टकम् का शुद्ध संस्कृत पाठ सरल हिंदी अर्थ सहित पढ़ें। जानिए माता लक्ष्मी को समर्पित इस पवित्र स्तोत्र की फलश्रुति, पाठ के लाभ और सही पाठ विधि।
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित श्री काल भैरव अष्टकम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। इस पवित्र स्तोत्र में काशी के स्वामी भगवान काल भैरव की महिमा, दिव्य स्वरूप और कृपा का वर्णन किया गया है।
श्री गणेश अथर्वशीर्ष का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। भगवान गणपति को समर्पित इस पवित्र पाठ में गणेश गायत्री मंत्र, ध्यान मंत्र, फलश्रुति और शांति पाठ सम्मिलित हैं। इसका श्रद्धापूर्वक पाठ बुद्धि, सुख-समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति प्रदान करता है।
भगवान गणेश के बारह पवित्र नामों का नियमित स्मरण करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं तथा विद्या, धन, संतान, सफलता और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पढ़ें आदित्य हृदय स्तोत्र का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, विनियोग और पाठ का महत्व। यह पवित्र स्तोत्र भय, चिंता और शोक दूर कर आत्मबल एवं विजय प्रदान करने वाला माना गया है।
श्रीमद् वल्लभाचार्य रचित 'मधुराष्टकम्' भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य सौंदर्य और माधुर्य का वर्णन करने वाला सबसे लोकप्रिय स्तोत्र है। यहाँ पढ़ें मूल पाठ और हिंदी अर्थ।
श्री गोपाल सहस्रनाम स्तोत्र में भगवान श्रीकृष्ण (गोपाल) के 1000 अत्यंत पवित्र और सिद्ध नामों का वर्णन है। इसके पाठ से मोक्ष, धन, और संतान की प्राप्ति होती है।