सनातन वाणी • भक्ति, ज्ञान और शास्त्रीय पाठ
08 Sep 2026
Sanatan Vani आधुनिक रूप में सनातन ज्ञान
स्तोत्र संग्रह

संकट नाशन गणेश स्तोत्र

भगवान गणेश के बारह पवित्र नामों का नियमित स्मरण करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं तथा विद्या, धन, संतान, सफलता और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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श्रीगणेशाय नमः। नारद उवाच।


प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तवासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये॥ ॥
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयम्।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥ 2॥
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं पीड़ितमेव च।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥ 3॥
नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥ 4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरः प्रभुः ॥ 5॥
शिष्यं लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रानमोक्षार्थी लभते गतिम् ॥ 6॥
जपेद्गणपतिस्तोत्रं षडभिर्मसैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥ 7॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्।
तस्य विद्या भवेत्सर्व गणेशस्य प्रसादतः ॥ 8॥
॥ इति श्रीनारदपुराणे संकटनाशनं गणेशस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

हिन्दी अर्थ


नारद जी कहते हैं—

मनुष्य को अपने जीवन में दीर्घायु, मनचाही सफलता और धन-समृद्धि प्राप्त करने के लिए माता पार्वती के पुत्र तथा भक्तों की रक्षा करने वाले भगवान गणेश का श्रद्धापूर्वक स्मरण करना चाहिए।

भगवान गणेश के इन बारह पवित्र नामों का क्रम से स्मरण करना चाहिए—

  1. वक्रतुण्ड – जिनकी सूँड़ घुमावदार है।
  2. एकदन्त – जिनका एक दाँत है।
  3. कृष्णपिङ्गाक्ष – जिनकी आँखें गहरे भूरे रंग की हैं।
  4. गजवक्त्र – जिनका मुख हाथी के समान है।
  5. लम्बोदर – जिनका पेट बड़ा और घड़े के समान है।
  6. विकट – जिनका स्वरूप विशाल और अद्भुत है।
  7. विघ्नराज – जो सभी विघ्नों और बाधाओं के स्वामी हैं।
  8. धूम्रवर्ण – जिनका रंग धुएँ के समान है।
  9. भालचन्द्र – जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है।
  10. विनायक – जो सभी बाधाओं को दूर करते हैं।
  11. गणपति – जो समस्त गणों के स्वामी हैं।
  12. गजानन – जिनका मुख हाथी के समान है।

जो व्यक्ति प्रतिदिन सुबह, दोपहर और शाम भगवान गणेश के इन बारह नामों का श्रद्धा से स्मरण करता है, उसे जीवन में असफलता और बाधाओं का भय नहीं रहता। भगवान गणेश की कृपा से उसके कार्य सफल होते हैं और उसे शुभ फल प्राप्त होते हैं।

जो व्यक्ति विद्या चाहता है, उसे ज्ञान की प्राप्ति होती है। धन की इच्छा रखने वाले को धन-समृद्धि मिलती है। संतान की कामना करने वाले को संतान सुख प्राप्त होता है और मोक्ष की इच्छा रखने वाला व्यक्ति मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस गणपति स्तोत्र का पाठ करता है, उसकी मनोकामनाएँ छह महीने में पूरी होने लगती हैं। नियमित रूप से एक वर्ष तक पाठ करने पर उसे विशेष सिद्धि और सफलता प्राप्त होती है—इसमें कोई संदेह नहीं है।

जो व्यक्ति इस स्तोत्र को लिखकर या इसकी प्रतियाँ बनवाकर आठ योग्य ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक प्रदान करता है, वह भगवान गणेश की कृपा से शीघ्र ही ज्ञान और बुद्धि प्राप्त करता है।

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