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08 Sep 2026
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महालक्ष्मी अष्टकम्

श्री महालक्ष्मी अष्टकम् का शुद्ध संस्कृत पाठ सरल हिंदी अर्थ सहित पढ़ें। जानिए माता लक्ष्मी को समर्पित इस पवित्र स्तोत्र की फलश्रुति, पाठ के लाभ और सही पाठ विधि।

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॥ श्री महालक्ष्म्यष्टकम् ॥

इन्द्र उवाच—

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१॥

सरल हिंदी अर्थ: देवराज इन्द्र कहते हैं—हे सम्पूर्ण संसार को अपनी माया से संचालित करने वाली महामाया! आप श्रीपीठ पर विराजमान हैं और सभी देवता आपकी पूजा करते हैं। अपने हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली हे माता महालक्ष्मी! आपको मेरा बार-बार नमस्कार है।


नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२॥

सरल हिंदी अर्थ: गरुड़ पर सवार होने वाली और कोलासुर नामक दैत्य को भयभीत करने वाली हे देवी! आप भक्तों के सभी पापों और बुरे कर्मों के प्रभाव को दूर करने वाली हैं। हे माता महालक्ष्मी! आपको मेरा नमस्कार है।


सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३॥

सरल हिंदी अर्थ: हे माता! आप सब कुछ जानने वाली और सभी को वरदान देने वाली हैं। आप दुष्टों के लिए भय उत्पन्न करती हैं और अपने भक्तों के सभी दुःख दूर करती हैं। हे माता महालक्ष्मी! आपको मेरा नमस्कार है।


सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥४॥

सरल हिंदी अर्थ: हे देवी! आप सिद्धि और उत्तम बुद्धि प्रदान करती हैं। आप सांसारिक सुखों के साथ मोक्ष भी प्रदान करने वाली हैं। आप सभी पवित्र मंत्रों की दिव्य शक्ति का स्वरूप हैं। हे माता महालक्ष्मी! आपको सदैव नमस्कार है।


आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥५॥

सरल हिंदी अर्थ: हे देवी! आपका न कोई आरम्भ है और न कोई अन्त। आप संसार की मूल आदिशक्ति और परमेश्वरी हैं। आप योग से प्रकट होने वाली तथा योग की दिव्य शक्ति का स्वरूप हैं। हे माता महालक्ष्मी! आपको मेरा नमस्कार है।


स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे।
महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥६॥

सरल हिंदी अर्थ: हे देवी! आप संसार के दिखाई देने वाले स्थूल रूप और दिखाई न देने वाले सूक्ष्म रूप—दोनों में विद्यमान हैं। आप दुष्टों के लिए अत्यन्त भयंकर तथा सम्पूर्ण सृष्टि को धारण करने वाली महान शक्ति हैं। बड़े से बड़े पापों को दूर करने वाली हे माता महालक्ष्मी! आपको मेरा नमस्कार है।


पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥७॥

सरल हिंदी अर्थ: कमल के आसन पर विराजमान हे देवी! आप परम ब्रह्म का स्वरूप हैं। आप सम्पूर्ण संसार की परमेश्वरी और जगत की माता हैं। हे माता महालक्ष्मी! आपको मेरा नमस्कार है।


श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥८॥

सरल हिंदी अर्थ: हे देवी! आप श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और अनेक प्रकार के दिव्य आभूषणों से सुशोभित हैं। आप सम्पूर्ण संसार में व्याप्त हैं और समस्त जगत की माता हैं। हे माता महालक्ष्मी! आपको मेरा नमस्कार है।

महालक्ष्मी अष्टकम् की फलश्रुति

महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥९॥

सरल हिंदी अर्थ: जो मनुष्य भक्ति और श्रद्धा के साथ इस महालक्ष्मी अष्टकम् का पाठ करता है, वह अपने कार्यों में सिद्धि और सफलता प्राप्त करता है। उसे जीवन में सम्मान, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है।


एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः॥१०॥

सरल हिंदी अर्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन एक बार इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके बड़े पापों और नकारात्मक कर्मों के प्रभाव का नाश होता है। जो प्रतिदिन दो बार इसका पाठ करता है, वह धन और अन्न से सम्पन्न होता है।


त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा॥११॥

सरल हिंदी अर्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन सुबह, दोपहर और शाम तीनों समय इसका पाठ करता है, उसके बड़े शत्रुओं और कठिन बाधाओं का नाश होता है। शुभ फल और वरदान देने वाली माता महालक्ष्मी उस भक्त पर सदैव प्रसन्न रहती हैं।

॥ इतीन्द्रकृतं श्रीमहालक्ष्म्यष्टकं सम्पूर्णम् ॥

महालक्ष्मी अष्टकम् का महत्व

महालक्ष्मी अष्टकम् में माता लक्ष्मी को केवल धन की देवी के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, बुद्धि, सिद्धि, शक्ति, सुख और मोक्ष प्रदान करने वाली जगत माता के रूप में स्मरण किया गया है।

इस स्तोत्र में माता के साकार, सूक्ष्म और परम ब्रह्म स्वरूप की स्तुति की गई है। इसका पाठ मनुष्य को धन-समृद्धि के साथ सद्बुद्धि, संयम और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा भी देता है।

महालक्ष्मी अष्टकम् के पाठ के लाभ

  • माता महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
  • घर में सुख, शान्ति और सकारात्मकता बढ़ती है।
  • धन से संबंधित परेशानियाँ दूर होने की धार्मिक मान्यता है।
  • मनुष्य को सद्बुद्धि, आत्मविश्वास और सफलता की प्रेरणा मिलती है।
  • व्यापार और नौकरी में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए इसका पाठ शुभ माना जाता है।
  • भय, दुःख और नकारात्मक विचारों से मुक्ति पाने में सहायता मिलती है।
  • परिवार में धन-धान्य और समृद्धि बनाए रखने के लिए इसका पाठ किया जाता है।
  • यह भक्ति और आध्यात्मिक शान्ति प्रदान करने वाला स्तोत्र माना गया है।

महालक्ष्मी अष्टकम् की पाठ विधि

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान को साफ करके माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. माता के सामने घी का दीपक और धूप जलाएँ।
  4. माता को लाल या गुलाबी फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
  5. सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें।
  6. इसके बाद शान्त मन और श्रद्धा से महालक्ष्मी अष्टकम् का पाठ करें।
  7. पाठ पूरा होने के बाद माता लक्ष्मी से अपनी भूलों के लिए क्षमा माँगें।
  8. अन्त में माता लक्ष्मी की आरती करके प्रसाद वितरित करें।

महालक्ष्मी अष्टकम् का पाठ कब करें?

महालक्ष्मी अष्टकम् का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है। शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली, धनतेरस और लक्ष्मी पूजन के अवसर पर इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है।

नियमित पाठ के लिए सुबह या शाम का शान्त समय चुना जा सकता है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान में शुद्ध उच्चारण के लिए योग्य विद्वान का मार्गदर्शन लेना उचित है।

महालक्ष्मी अष्टकम् किसने कहा था?

इस स्तोत्र के आरम्भ में “इन्द्र उवाच” लिखा है। इसका अर्थ है कि देवराज इन्द्र ने माता महालक्ष्मी की स्तुति करते हुए यह अष्टकम् कहा था। इसलिए इसे इन्द्रकृत महालक्ष्मी अष्टकम् भी कहा जाता है।

महालक्ष्मी अष्टकम् में कितने श्लोक हैं?

महालक्ष्मी अष्टकम् में माता महालक्ष्मी की स्तुति करने वाले आठ मुख्य श्लोक हैं। इनके बाद तीन श्लोकों में इसकी फलश्रुति बताई गई है। इस प्रकार फलश्रुति सहित इसमें कुल ग्यारह श्लोक हैं।

महालक्ष्मी अष्टकम् का सार

महालक्ष्मी अष्टकम् माता लक्ष्मी के धन, ज्ञान, शक्ति, करुणा और मोक्ष प्रदान करने वाले दिव्य स्वरूप का स्मरण कराता है। इसका श्रद्धापूर्वक पाठ करते हुए भक्त माता से अपने दुःखों, पापों और जीवन की बाधाओं को दूर करने तथा सुख-समृद्धि और सद्बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करता है।

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