स्तोत्र संग्रह
शिव, विष्णु, राम और देवी स्तोत्र
शिव, विष्णु, राम और देवी स्तोत्र
श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित भगवान शिव के आदिगुरु स्वरूप की ज्ञानमयी स्तुति है। यहां इसका शुद्ध संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ-विधि पढ़ें।
बटुक भैरव कवच भगवान बटुक भैरव की शक्तिशाली रक्षा स्तुति है जिसका वर्णन रुद्रयामल तंत्र में मिलता है। इसका पाठ करने से भय, शत्रु, नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं और अचानक आने वाली विपत्तियों से रक्षा होती है।
लिङ्गाष्टकम् भगवान शिव के शिवलिंग स्वरूप की स्तुति है। इसका पाठ करने से पापों का नाश, कष्टों से मुक्ति और शिव कृपा प्राप्त होती है। यह आठ श्लोकों का प्रसिद्ध स्तोत्र है जिसका नियमित पाठ अत्यंत शुभ माना गया है।
रुद्राष्टकम् गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान शिव की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से भय, रोग, दरिद्रता और कष्ट दूर होते हैं तथा शिव कृपा प्राप्त होती है। यह आठ श्लोकों वाला शक्तिशाली स्तोत्र है।
दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित भगवान शिव की प्रभावशाली स्तुति है। इसका नियमित पाठ करने से दरिद्रता, कर्ज, आर्थिक बाधाएँ और जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं। यह स्तोत्र धन, समृद्धि और शिव कृपा प्रदान करने वाला माना गया है।
शिव महिम्न स्तोत्र गन्धर्व पुष्पदंत द्वारा रचित भगवान शिव की अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है। इसका श्रद्धा से पाठ करने पर पापों का नाश, भय से मुक्ति, शिव कृपा, धन-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यहाँ सम्पूर्ण शिव महिम्न स्तोत्र का हिन्दी अर्थ, लाभ, पाठ विधि और सही समय दिया गया है।
भगवान शिव द्वारा रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र अत्यंत शक्तिशाली स्तुति है। इसका नियमित पाठ करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा, रोग, बाधाएँ दूर होती हैं तथा साहस, बुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। नीचे पूर्ण शिव तांडव स्तोत्र, हिंदी अर्थ, पाठ विधि और लाभ दिए गए हैं।
कनकधारा स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माँ महालक्ष्मी की प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से दरिद्रता दूर होती है, धन-समृद्धि आती है और लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माँ दुर्गा की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से शत्रु नाश, भय से मुक्ति, साहस, शक्ति और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आदि गुरु शंकराचार्य रचित 'कृष्णाष्टकम्' भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का अत्यंत मधुर और सिद्ध स्तोत्र है। यहाँ पढ़ें मूल संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ और इसके पाठ की महिमा।
रावण की वो महास्तुति! 🔱 जानिए शिव ताण्डव स्तोत्र का सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और इसके चमत्कारी लाभ। अभी पढ़ें! 👇
नम: शिवाय" का दिव्य रहस्य! 🔱 शिव पंचाक्षर स्तोत्र से पाएं महादेव की कृपा और मोक्ष का सरल मार्ग। अभी पढ़ें! 👇
अर्धनारीश्वर स्तोत्रम् में भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप की सुंदर स्तुति की गई है। यह स्तोत्र शिव और शक्ति की अभिन्नता, संतुलन तथा संपूर्ण सृष्टि के माता-पिता स्वरूप को प्रकट करता है।
शिव अपराध क्षमापना स्तोत्र में भक्त अपने जीवन में जाने-अनजाने हुए अपराधों और पूजा में हुई भूलों के लिए भगवान शिव से क्षमा मांगता है। यह स्तोत्र मनुष्य को जीवन की नश्वरता समझाकर शिव-भक्ति की ओर प्रेरित करता है।
शिवाष्टकम् भगवान शिव के विश्वनाथ, भूतनाथ, महाकाल, गंगाधर और अर्धनारीश्वर स्वरूप की महिमा बताने वाला प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसके आठ श्लोकों में महादेव के दिव्य स्वरूप और कृपा का वर्णन किया गया है।
बिल्वाष्टकम् भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने की महिमा बताने वाला प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसमें एक बिल्वपत्र को श्रद्धापूर्वक अर्पित करने का फल अनेक बड़े धार्मिक अनुष्ठानों के समान बताया गया है।
चंद्रशेखर अष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में ऋषि मार्कण्डेय द्वारा रचित माना जाता है। इसमें भगवान चंद्रशेखर की शरण लेकर मृत्यु के भय से रक्षा की प्रार्थना की गई है।
शिव मानस पूजा स्तोत्र में भक्त मन ही मन भगवान शिव को आसन, स्नान, वस्त्र, पुष्प, भोजन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करता है। यह स्तोत्र सिखाता है कि श्रद्धा से किया गया प्रत्येक कार्य भगवान शिव की पूजा बन सकता है।