स्तोत्र संग्रह
शिव, विष्णु, राम और देवी स्तोत्र
शिव, विष्णु, राम और देवी स्तोत्र
श्री सरस्वती अष्टकम् माता सरस्वती को समर्पित आठ श्लोकों का दिव्य स्तोत्र है। इसमें देवी से निर्मल ज्ञान की प्रार्थना और नियमित पाठ की फलश्रुति दी गई है।
स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र भगवान भैरव के स्वर्णाकर्षण रूप की स्तुति है। इसका पाठ करने से धन, समृद्धि, व्यापार में वृद्धि, आर्थिक बाधाओं से मुक्ति और लक्ष्मी प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से धन आकर्षण के लिए प्रसिद्ध है।
श्री सूक्त ऋग्वेद का प्रसिद्ध लक्ष्मी सूक्त है। इसका पाठ करने से धन, समृद्धि, सौभाग्य और लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है। यह वैदिक स्तुति विशेष रूप से लक्ष्मी पूजा में पढ़ी जाती है।
कनकधारा स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माँ महालक्ष्मी की प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से दरिद्रता दूर होती है, धन-समृद्धि आती है और लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
अगस्त्य कृत सरस्वती स्तोत्र माता सरस्वती की स्तुति है जिसमें ऋषि अगस्त्य देवी से विद्या, बुद्धि और वाणी की कृपा की प्रार्थना करते हैं। इसका पाठ करने से स्मरण शक्ति, ज्ञान और वाणी में सिद्धि प्राप्त होती है।
याज्ञवल्क्य कृत सरस्वती स्तोत्र माता सरस्वती की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से बुद्धि, स्मरण शक्ति, वाणी, ज्ञान और विद्या की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से विद्यार्थियों और विद्या प्राप्त करने वालों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माँ दुर्गा की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से शत्रु नाश, भय से मुक्ति, साहस, शक्ति और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कीलक स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इसका पाठ करने से सप्तशती पाठ का फल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है। यह स्तोत्र देवी की कृपा प्राप्त करने और सभी बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।
अर्गला स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का अत्यंत महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इसका पाठ करने से धन, विजय, शत्रु नाश, सुख-समृद्धि और देवी कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र देवी दुर्गा की आराधना में कवच और कीलक के साथ पढ़ा जाता है।
श्री लक्ष्मी नृसिंह करावलम्ब स्तोत्र भगवान लक्ष्मी नृसिंह से रक्षा, सहायता और संसाररूपी सागर से पार लगाने की प्रार्थना है।
श्री दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् में माता दुर्गा के 108 दिव्य नामों का वर्णन है। यहां इसका शुद्ध संस्कृत पाठ, प्रत्येक नाम का सरल हिंदी अर्थ, फलश्रुति, महत्व और पाठ-विधि पढ़ें।
दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला में माता दुर्गा के 32 दिव्य नामों का वर्णन है। यहां इसका शुद्ध संस्कृत पाठ, सभी नामों का सरल हिंदी अर्थ, फलश्रुति, महत्व और पाठ-विधि पढ़ें।
भवानी अष्टकम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माता भवानी की अत्यंत भावपूर्ण शरणागति है। यहां पढ़ें इसका शुद्ध संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ-विधि।
देवी अपराध क्षमापण स्तोत्रम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माता जगदम्बा से पूजा में हुई गलतियों और अपराधों की क्षमा मांगने वाली भावपूर्ण स्तुति है।
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् माता अन्नपूर्णेश्वरी की महिमा का वर्णन करने वाली प्रसिद्ध रचना है। इसमें माता से केवल अन्न ही नहीं, बल्कि ज्ञान, वैराग्य, करुणा और आध्यात्मिक पूर्णता की भिक्षा मांगी गई है।
दुर्गा सप्तश्लोकी में दुर्गा सप्तशती के सात अत्यंत प्रभावशाली श्लोक संकलित हैं। इसमें माता दुर्गा से भय, रोग, दुःख और बाधाओं को दूर करके भक्तों की रक्षा करने की प्रार्थना की गई है।
माता लक्ष्मी के आठ दिव्य स्वरूपों को समर्पित अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ और सरल हिंदी अर्थ पढ़ें। इसमें आदिलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, धैर्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी और धनलक्ष्मी की स्तुति की गई है।
श्री महालक्ष्मी अष्टकम् का शुद्ध संस्कृत पाठ सरल हिंदी अर्थ सहित पढ़ें। जानिए माता लक्ष्मी को समर्पित इस पवित्र स्तोत्र की फलश्रुति, पाठ के लाभ और सही पाठ विधि।