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09 Sep 2026
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स्तोत्र संग्रह

शिव मानस पूजा स्तोत्र

शिव मानस पूजा स्तोत्र में भक्त मन ही मन भगवान शिव को आसन, स्नान, वस्त्र, पुष्प, भोजन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करता है। यह स्तोत्र सिखाता है कि श्रद्धा से किया गया प्रत्येक कार्य भगवान शिव की पूजा बन सकता है।

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शिव मानस पूजा स्तोत्रम् – मूल संस्कृत पाठ

रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं
नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनम्।
जातीचम्पकबिल्वपत्ररचितं पुष्पं च धूपं तथा
दीपं देव दयानिधे पशुपते हृत्कल्पितं गृह्यताम्॥१॥

सौवर्णे नवरत्नखण्डरचिते पात्रे घृतं पायसं
भक्ष्यं पञ्चविधं पयोदधियुतं रम्भाफलं पानकम्।
शाकानामयुतं जलं रुचिकरं कर्पूरखण्डोज्ज्वलं
ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्या प्रभो स्वीकुरु॥२॥

छत्रं चामरयोर्युगं व्यजनकं चादर्शकं निर्मलं
वीणाभेरिमृदङ्गकाहलकला गीतं च नृत्यं तथा।
साष्टाङ्गं प्रणतिः स्तुतिर्बहुविधा ह्येतत्समस्तं मया
सङ्कल्पेन समर्पितं तव विभो पूजां गृहाण प्रभो॥३॥

आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं
पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिः।
सञ्चारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो
यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम्॥४॥

क्षमा-प्रार्थना

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥५॥

॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यकृतं श्रीशिवमानसपूजास्तोत्रम् ॥



शिव मानस पूजा स्तोत्र का सरल हिंदी अर्थ

पहले श्लोक का अर्थ:
हे दया के सागर भगवान पशुपति! मैंने अपने मन में आपके लिए बहुमूल्य रत्नों से सुशोभित आसन तैयार किया है। हिमालय के शीतल जल से स्नान, दिव्य वस्त्र, अनेक रत्नों के आभूषण और कस्तूरी की सुगंध से युक्त चंदन अर्पित किया है। जूही, चंपा और बेलपत्र से बने पुष्प, धूप तथा दीप भी आपको समर्पित हैं। कृपया मेरे हृदय से की गई इस पूजा को स्वीकार करें।

दूसरे श्लोक का अर्थ:
हे प्रभु! मैंने अपने मन में आपके लिए सोने और नौ रत्नों से सजा हुआ पात्र तैयार किया है। उसमें घी, खीर, पांच प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन, दूध-दही, केला और मीठा पेय रखा है। अनेक प्रकार की सब्जियां, स्वादिष्ट तथा कपूर की सुगंध से युक्त जल और ताम्बूल भी भक्तिपूर्वक अर्पित किए हैं। कृपया मेरी यह मानसिक भेंट स्वीकार करें।

तीसरे श्लोक का अर्थ:
हे सर्वशक्तिमान प्रभु! मैं आपको छत्र, दो चंवर, पंखा और स्वच्छ दर्पण अर्पित करता हूं। वीणा, भेरी, मृदंग और नगाड़ों का मधुर संगीत, गायन एवं नृत्य भी आपको समर्पित करता हूं। मैं आपको साष्टांग प्रणाम करता हूं और अनेक प्रकार से आपकी स्तुति करता हूं। अपने मन के संकल्प से अर्पित की गई इस संपूर्ण पूजा को स्वीकार करें।

चौथे श्लोक का अर्थ:
हे भगवान शिव! आप ही मेरी आत्मा हैं और माता पार्वती मेरी बुद्धि हैं। मेरे प्राण आपके सेवक हैं और यह शरीर आपका घर है। संसार के विषयों का भोग करना आपकी पूजा है और मेरी नींद समाधि के समान है। मेरा चलना आपकी प्रदक्षिणा है और मेरे मुख से निकलने वाले सभी शब्द आपकी स्तुति हैं। हे शम्भु! मैं जो भी कर्म करता हूं, वह सब आपकी आराधना है।

पांचवें श्लोक का अर्थ:
हे श्रीमहादेव शम्भु! मेरे हाथों, पैरों, वाणी, शरीर अथवा कर्मों से जो भी अपराध हुए हों; कानों, आंखों या मन के द्वारा जो गलतियां हुई हों; और जाने-अनजाने किए गए उचित या अनुचित सभी अपराधों को क्षमा कर दीजिए। हे करुणा के सागर महादेव! आपकी जय हो, आपकी जय हो।

शिव मानस पूजा स्तोत्र का परिचय

शिव मानस पूजा स्तोत्र की रचना परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य द्वारा की गई मानी जाती है। इस स्तोत्र में बाहरी वस्तुओं की जगह मन और भावना से भगवान शिव की पूजा की जाती है।

भक्त अपने मन में भगवान शिव को रत्नों का आसन, शीतल जल से स्नान, सुंदर वस्त्र, चंदन, फूल, धूप, दीप और भोजन अर्पित करता है। इसका भाव यह है कि भगवान के लिए महंगी सामग्री से अधिक भक्त की श्रद्धा और निर्मल भावना महत्वपूर्ण होती है।

शिव मानस पूजा का महत्व

मानस पूजा का अर्थ है—मन के भीतर भगवान की पूजा करना। यदि किसी व्यक्ति के पास पूजा की सामग्री उपलब्ध न हो, वह यात्रा में हो अथवा शारीरिक रूप से पूजा करने में असमर्थ हो, तब भी वह मन में भगवान शिव का ध्यान करके यह स्तोत्र पढ़ सकता है।

इस स्तोत्र का चौथा श्लोक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसमें साधक अपने पूरे जीवन को शिव की आराधना मानता है। उसका चलना प्रदक्षिणा, बोलना स्तुति, सोना समाधि और प्रत्येक कर्म भगवान शिव की पूजा बन जाता है।

शिव मानस पूजा स्तोत्र के लाभ

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करने से:

  • भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण बढ़ता है।
  • मन को शांति और एकाग्रता प्राप्त होती है।
  • नकारात्मक विचारों को शांत करने में सहायता मिलती है।
  • साधक में विनम्रता और क्षमा का भाव विकसित होता है।
  • पूजा सामग्री उपलब्ध न होने पर भी मानसिक आराधना की जा सकती है।
  • प्रत्येक कार्य को ईश्वर को समर्पित करने की भावना पैदा होती है।
  • मन में आध्यात्मिक संतोष और सकारात्मकता आती है।

शिव मानस पूजा स्तोत्र की पाठ विधि

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. किसी शांत और साफ स्थान पर बैठें।
  3. अपने सामने भगवान शिव या शिवलिंग का चित्र रख सकते हैं।
  4. कुछ क्षण आंखें बंद करके भगवान शिव का ध्यान करें।
  5. प्रत्येक श्लोक पढ़ते समय उसमें बताई गई वस्तु को मन में भगवान शिव को अर्पित करें।
  6. स्तोत्र का पाठ शांत मन और स्पष्ट उच्चारण के साथ करें।
  7. पाठ के अंत में क्षमा-प्रार्थना वाला श्लोक अवश्य पढ़ें।
  8. अंत में भगवान शिव का ध्यान करके “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

पाठ करने का शुभ समय

शिव मानस पूजा स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह या शाम किया जा सकता है। सोमवार, प्रदोष व्रत, सावन का महीना और महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष शुभ माने जाते हैं। हालांकि, मानसिक पूजा के लिए किसी विशेष समय या सामग्री की अनिवार्यता नहीं है—भक्त इसे श्रद्धा से किसी भी समय पढ़ सकता है।

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