सनातन वाणी • भक्ति, ज्ञान और शास्त्रीय पाठ
09 Sep 2026
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स्तोत्र संग्रह

नवग्रह स्तोत्रम्

महर्षि व्यास द्वारा रचित नवग्रह स्तोत्रम् का शुद्ध संस्कृत पाठ और सरल हिंदी अर्थ पढ़ें। इसमें सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु की स्तुति तथा फलश्रुति दी गई है।

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॥ श्री नवग्रह स्तोत्रम् ॥

सूर्य स्तुति

जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥१॥

चन्द्र स्तुति

दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥२॥

मंगल स्तुति

धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥३॥

बुध स्तुति

प्रियङ्गुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥४॥

बृहस्पति स्तुति

देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥५॥

शुक्र स्तुति

हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥६॥

शनि स्तुति

नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥७॥

राहु स्तुति

अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥८॥

केतु स्तुति

पलाशपुष्पसङ्काशं तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥९॥

नवग्रह स्तोत्र की फलश्रुति

इति व्यासमुखोद्गीतं यः पठेत्सुसमाहितः।
दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्नशान्तिर्भविष्यति॥१०॥

नरनारीनृपाणां च भवेद्दुःस्वप्ननाशनम्।
ऐश्वर्यमतुलं तेषामारोग्यं पुष्टिवर्धनम्॥११॥

ग्रहनक्षत्रजाः पीडास्तस्कराग्निसमुद्भवाः।
ताः सर्वाः प्रशमं यान्ति व्यासो ब्रूते न संशयः॥१२॥

॥ इति श्रीव्यासविरचितं नवग्रह स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

नवग्रह स्तोत्रम् का सरल हिंदी अर्थ

सूर्य स्तुति का अर्थ

मैं सूर्यदेव को प्रणाम करता हूँ, जिनका स्वरूप गुड़हल के लाल फूल के समान चमकदार है। जो महर्षि कश्यप के पुत्र और अत्यन्त तेजस्वी हैं। वे अन्धकार के शत्रु तथा सभी पापों का नाश करने वाले हैं। ऐसे प्रकाश प्रदान करने वाले दिवाकर सूर्यदेव को मेरा प्रणाम है।

चन्द्र स्तुति का अर्थ

मैं चन्द्रदेव को प्रणाम करता हूँ, जिनका रंग दही, शंख और बर्फ के समान उज्ज्वल है। जो क्षीरसागर से उत्पन्न हुए हैं और भगवान शिव के मुकुट पर आभूषण के रूप में सुशोभित हैं। ऐसे शीतलता प्रदान करने वाले शशि और सोम को मेरा नमस्कार है।

मंगल स्तुति का अर्थ

मैं मंगलदेव को प्रणाम करता हूँ, जिनका जन्म पृथ्वी के गर्भ से हुआ है। उनका तेज बिजली के समान चमकदार है। वे युवा स्वरूप वाले हैं और अपने हाथ में शक्ति नामक अस्त्र धारण करते हैं। ऐसे मंगल ग्रह को मेरा प्रणाम है।

बुध स्तुति का अर्थ

मैं बुधदेव को प्रणाम करता हूँ, जिनका रंग प्रियंगु की कली के समान गहरा और आकर्षक है। जिनके सुन्दर स्वरूप की किसी से तुलना नहीं की जा सकती। वे शान्त, कोमल और अनेक उत्तम गुणों से सम्पन्न हैं। ऐसे बुधदेव को मेरा नमस्कार है।

बृहस्पति स्तुति का अर्थ

मैं बृहस्पति देव को प्रणाम करता हूँ, जो देवताओं और ऋषियों के गुरु हैं। जिनका स्वरूप सोने के समान चमकदार है। वे बुद्धि और ज्ञान का स्वरूप तथा तीनों लोकों के स्वामी हैं। ऐसे देवगुरु बृहस्पति को मेरा नमस्कार है।

शुक्र स्तुति का अर्थ

मैं शुक्रदेव को प्रणाम करता हूँ, जिनका स्वरूप बर्फ, कुन्द के फूल और कमल की डंडी के समान उज्ज्वल है। वे दैत्यों के परम गुरु और समस्त शास्त्रों का ज्ञान देने वाले हैं। महर्षि भृगु के वंश में उत्पन्न भार्गव शुक्राचार्य को मेरा प्रणाम है।

शनि स्तुति का अर्थ

मैं शनिदेव को प्रणाम करता हूँ, जिनका स्वरूप काले काजल के समान गहरा और चमकदार है। वे सूर्यदेव के पुत्र और यमराज के बड़े भाई हैं। उनका जन्म सूर्यदेव और माता छाया से हुआ है। धीरे-धीरे गति करने वाले ऐसे शनैश्चर देव को मेरा नमस्कार है।

राहु स्तुति का अर्थ

मैं राहु को प्रणाम करता हूँ, जिनका शरीर आधा है और जिनमें अत्यन्त शक्ति तथा पराक्रम है। जो सूर्य और चन्द्रमा को ग्रहण के समय ढक देते हैं। माता सिंहिका के गर्भ से उत्पन्न ऐसे राहु को मेरा नमस्कार है।

केतु स्तुति का अर्थ

मैं केतु को प्रणाम करता हूँ, जिनका स्वरूप पलाश के फूल के समान लाल और तेजस्वी है। जो तारों और ग्रहों में विशेष स्थान रखते हैं। उनका स्वरूप प्रचण्ड, उग्र और भय उत्पन्न करने वाला है। ऐसे केतु को मेरा नमस्कार है।

फलश्रुति का सरल हिंदी अर्थ

महर्षि व्यास के मुख से प्रकट हुए इस नवग्रह स्तोत्र का जो व्यक्ति एकाग्र और शान्त मन से पाठ करता है, उसके जीवन के विघ्न शान्त होते हैं। इसका पाठ दिन अथवा रात—किसी भी समय किया जा सकता है।

इस स्तोत्र का पाठ करने वाले पुरुषों, महिलाओं और शासकों के बुरे स्वप्नों का नाश होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उन्हें अतुलनीय ऐश्वर्य, अच्छा स्वास्थ्य और शारीरिक पुष्टि प्राप्त होती है।

ग्रहों और नक्षत्रों से उत्पन्न पीड़ा तथा चोर और अग्नि से होने वाले भय शान्त होते हैं। महर्षि व्यास कहते हैं कि इस बात में कोई संदेह नहीं है।

नवग्रह स्तोत्रम् क्या है?

नवग्रह स्तोत्रम् नौ ग्रहों को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। इसे महर्षि व्यास द्वारा रचित माना जाता है। इसमें सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु के स्वरूप तथा गुणों की स्तुति की गई है।

सनातन परम्परा और ज्योतिष में इन नौ ग्रहों का मनुष्य के जीवन पर प्रभाव माना गया है। नवग्रह स्तोत्र के माध्यम से सभी ग्रहों की कृपा और जीवन में शान्ति की प्रार्थना की जाती है।

नवग्रह और उनके दिन

  • सूर्य: रविवार
  • चन्द्र: सोमवार
  • मंगल: मंगलवार
  • बुध: बुधवार
  • बृहस्पति: गुरुवार
  • शुक्र: शुक्रवार
  • शनि: शनिवार
  • राहु: किसी एक वार से सीधे सम्बद्ध नहीं
  • केतु: किसी एक वार से सीधे सम्बद्ध नहीं

नवग्रह स्तोत्रम् के पाठ के लाभ

  • नवग्रहों की कृपा प्राप्त करने के लिए इसका पाठ किया जाता है।
  • ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों की शान्ति की प्रार्थना की जाती है।
  • जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों को कम करने की धार्मिक मान्यता है।
  • मानसिक भय, तनाव और बुरे स्वप्नों से शान्ति पाने में सहायता मिलती है।
  • स्वास्थ्य, समृद्धि और जीवन में स्थिरता की कामना पूरी करने के लिए इसका पाठ किया जाता है।
  • शिक्षा, व्यापार, नौकरी और पारिवारिक जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
  • शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या अथवा अन्य ग्रहदोषों के समय भी श्रद्धालु इसका पाठ करते हैं।
  • सभी नौ ग्रहों की एक साथ स्तुति करने के लिए यह सरल और प्रचलित पाठ है।

नवग्रह स्तोत्रम् की पाठ विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान में दीपक और धूप जलाएँ।
  3. सबसे पहले भगवान गणेश और अपने इष्टदेव का स्मरण करें।
  4. इसके बाद सूर्यदेव से आरम्भ करके क्रम से नौ ग्रहों के श्लोक पढ़ें।
  5. नौ ग्रहों की स्तुति के बाद फलश्रुति का पाठ अवश्य करें।
  6. पाठ करते समय शब्दों का स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण करें।
  7. अन्त में सभी ग्रहों से अपनी भूलों की क्षमा और शुभ फल की प्रार्थना करें।
  8. किसी विशेष ग्रहदोष के धार्मिक अनुष्ठान के लिए योग्य विद्वान से मार्गदर्शन लेना उचित है।

नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ कब करें?

नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ प्रतिदिन सुबह किया जा सकता है। यदि सुबह सम्भव न हो तो शाम के समय भी इसका पाठ किया जा सकता है। फलश्रुति में भी दिन अथवा रात—दोनों समय इसका पाठ करने की बात कही गई है।

शनिवार, रविवार, अमावस्या, पूर्णिमा, ग्रहण और ग्रहों से संबंधित विशेष पूजा के अवसर पर भी श्रद्धालु इसका पाठ करते हैं। नियमित रूप से एक निश्चित समय पर शान्त मन से पाठ करना उत्तम माना जाता है।

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