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09 Sep 2026
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स्तोत्र संग्रह

दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र

दुर्गा सप्तश्लोकी में दुर्गा सप्तशती के सात अत्यंत प्रभावशाली श्लोक संकलित हैं। इसमें माता दुर्गा से भय, रोग, दुःख और बाधाओं को दूर करके भक्तों की रक्षा करने की प्रार्थना की गई है।

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दुर्गा सप्तश्लोकी – मूल संस्कृत पाठ

॥ अथ सप्तश्लोकी दुर्गा ॥

शिव उवाच

देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी।
कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः॥

देव्युवाच

शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम्।
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते॥

विनियोग

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमहामन्त्रस्य नारायण ऋषिः।
अनुष्टुभादीनि छन्दांसि। श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः।
श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः॥

ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥१॥

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥२॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥३॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥४॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥५॥

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥६॥

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥७॥

॥ इति दुर्गासप्तश्लोकी सम्पूर्णा ॥



शिवजी की प्रार्थना का हिंदी अर्थ

भगवान शिव कहते हैं—हे देवी! आप भक्तों को सरलता से प्राप्त होने वाली और उनके सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली हैं। कृपया कलियुग में भक्तों के कार्यों की सिद्धि के लिए कोई सरल और प्रभावशाली उपाय बताइए।

देवी के उत्तर का हिंदी अर्थ

माता दुर्गा कहती हैं—हे देव! सुनिए, मैं कलियुग में सभी मनोकामनाओं और शुभ कार्यों को सिद्ध करने वाला उपाय बताती हूं। आपके प्रति अपने स्नेह के कारण मैं माता की इस स्तुति को प्रकट कर रही हूं।

विनियोग का सरल अर्थ

इस श्री दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र महामंत्र के ऋषि नारायण हैं। इसके अलग-अलग श्लोकों के छंद अनुष्टुप आदि हैं। महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती इसकी देवियां हैं। माता दुर्गा की प्रसन्नता और कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ किया जाता है।

दुर्गा सप्तश्लोकी का सरल हिंदी अर्थ

पहले श्लोक का अर्थ:
वे भगवती महामाया इतनी शक्तिशाली हैं कि बड़े-बड़े ज्ञानियों के मन को भी अपनी ओर खींचकर मोह में डाल सकती हैं। संसार की समस्त माया उन्हीं की शक्ति से संचालित होती है।

दूसरे श्लोक का अर्थ:
हे माता दुर्गा! संकट के समय आपका स्मरण करने पर आप सभी प्राणियों का भय दूर कर देती हैं। शांत और सुखी अवस्था में आपका ध्यान करने पर आप शुभ एवं निर्मल बुद्धि प्रदान करती हैं। गरीबी, दुःख और भय को दूर करने वाली आपके अतिरिक्त दूसरी कौन है? आपका हृदय सभी प्राणियों का उपकार करने के लिए सदा करुणा से भरा रहता है।

तीसरे श्लोक का अर्थ:
हे समस्त मंगलों में सबसे अधिक मंगलमयी माता! आप कल्याण करने वाली और सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं। आप सबको शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी और नारायणी हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।

चौथे श्लोक का अर्थ:
हे नारायणी देवी! आप अपनी शरण में आए हुए दीन, दुःखी और पीड़ित प्राणियों की रक्षा करने में सदा तत्पर रहती हैं। आप सभी के दुःख और संकट दूर करने वाली हैं। आपको प्रणाम है।

पांचवें श्लोक का अर्थ:
हे देवी! आप सभी रूपों में विद्यमान, संपूर्ण संसार की स्वामिनी और समस्त शक्तियों से सम्पन्न हैं। हे माता दुर्गा! सभी प्रकार के भय से हमारी रक्षा कीजिए। हम आपको प्रणाम करते हैं।

छठे श्लोक का अर्थ:
हे माता! प्रसन्न होने पर आप सभी प्रकार के रोगों और कष्टों को दूर कर देती हैं, लेकिन अप्रसन्न होने पर मनुष्य की इच्छाओं और कामनाओं को नष्ट कर देती हैं। आपकी शरण में आने वाले मनुष्य विपत्तियों से सुरक्षित रहते हैं। इतना ही नहीं, आपकी शरण में रहने वाले लोग दूसरों के लिए भी आश्रय और सहारा बन जाते हैं।

सातवें श्लोक का अर्थ:
हे तीनों लोकों की स्वामिनी! आप समस्त संसार की सभी बाधाओं को शांत करें और हमारे बाहरी तथा भीतरी शत्रुओं का विनाश करें। कृपया अपनी कृपा से संसार का कल्याण करती रहें।

दुर्गा सप्तश्लोकी का परिचय

दुर्गा सप्तश्लोकी माता दुर्गा को समर्पित सात श्लोकों की प्रसिद्ध स्तुति है। इसके श्लोक श्रीदुर्गा सप्तशती अर्थात देवी माहात्म्य के अलग-अलग अध्यायों से लिए गए हैं। धार्मिक परंपरा में इसे दुर्गा सप्तशती का संक्षिप्त सार माना जाता है।

इसमें माता के महामाया स्वरूप, करुणा, मंगलकारी शक्ति, शरणागतों की रक्षा, भय से मुक्ति, रोगों के नाश और संसार की बाधाओं को शांत करने की सामर्थ्य का वर्णन है।

दुर्गा सप्तश्लोकी का महत्व

दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ काफी विस्तृत है। जो श्रद्धालु समय या अन्य कारणों से उसका नियमित पाठ नहीं कर पाते, वे दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ कर सकते हैं।

यह स्तोत्र केवल सांसारिक संकटों से रक्षा की प्रार्थना नहीं है। इसमें अज्ञान, मोह, क्रोध, लोभ, भय और नकारात्मक विचारों जैसे भीतरी शत्रुओं को दूर करने की भावना भी निहित है।

दुर्गा सप्तश्लोकी पाठ के लाभ

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करने से:

  • माता दुर्गा की कृपा और संरक्षण प्राप्त होता है।
  • भय और मानसिक अशांति को शांत करने में सहायता मिलती है।
  • कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • मन को शुभ और सकारात्मक विचारों की प्रेरणा मिलती है।
  • दुःख, दरिद्रता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना पूरी होती है।
  • रोग के समय मानसिक शक्ति और धैर्य प्राप्त होता है।
  • नकारात्मक शक्तियों और बुरे विचारों से रक्षा का भाव मजबूत होता है।
  • घर और परिवार में सुख-शांति एवं मंगल की कामना की जाती है।
  • साधक के भीतर भक्ति, करुणा और आध्यात्मिक विश्वास बढ़ता है।

दुर्गा सप्तश्लोकी की पाठ विधि

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. किसी साफ स्थान पर माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. माता को लाल फूल, कुमकुम, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
  4. सबसे पहले भगवान गणेश और अपने गुरु का स्मरण करें।
  5. माता दुर्गा का ध्यान करके पाठ का संकल्प लें।
  6. पहले शिवजी और देवी के बीच का संवाद पढ़ें।
  7. इसके बाद विनियोग और सातों श्लोकों का पाठ करें।
  8. पाठ स्पष्ट उच्चारण और शांत मन से करना चाहिए।
  9. पाठ के बाद माता दुर्गा की आरती करें।
  10. अंत में जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें और सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।

पाठ करने का शुभ समय

दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ प्रतिदिन सुबह या शाम किया जा सकता है। नवरात्रि, शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवमी और पूर्णिमा के दिन इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है।

किसी संकट, भय, मानसिक परेशानी या कठिन परिस्थिति में भी श्रद्धापूर्वक इसका पाठ किया जा सकता है। नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन एक, तीन, नौ अथवा ग्यारह बार पाठ करने की परंपरा भी प्रचलित है।

दुर्गा सप्तश्लोकी और दुर्गा सप्तशती में अंतर

दुर्गा सप्तशती में 700 श्लोक और 13 अध्याय हैं। इसके विपरीत दुर्गा सप्तश्लोकी में केवल सात प्रमुख श्लोक हैं। इसलिए दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ छोटा और सरल है, जबकि संपूर्ण दुर्गा सप्तशती के पाठ में अधिक समय, नियम और विधि की आवश्यकता होती है।

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