सनातन वाणी • भक्ति, ज्ञान और शास्त्रीय पाठ
02 May 2026
Sanatan Vani आधुनिक रूप में सनातन ज्ञान
व्रत कथा

परमा एकादशी व्रत कथा

परमा एकादशी व्रत कथा की संपूर्ण कथा, पूजन-विधि, व्रत का महत्व, पारण और फल जानें। यह व्रत अधिकमास कृष्ण एकादशी को रखा जाता है और संकटमोचन और उत्तम लोक प्राप्ति का महात्म्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध माना जाता है।

Google AdSense Space

परमा एकादशी व्रत कथा

परमा एकादशी अधिकमास कृष्ण एकादशी को रखा जाने वाला भगवान श्रीविष्णु को समर्पित पावन व्रत है। धर्मग्रंथों में इस व्रत का महात्म्य इसलिए बताया गया है क्योंकि यह संकटमोचन और उत्तम लोक प्राप्ति का महात्म्य का संदेश देता है। एकादशी व्रत में भक्त अन्न-त्याग, जप, जागरण, हरिनाम-स्मरण, गीता-पाठ, विष्णु सहस्रनाम और तुलसी-पूजन के माध्यम से श्रीहरि का स्मरण करते हैं।

कथा के अनुसार इस व्रत की महिमा सुनने और श्रद्धा से पालन करने वाले भक्त के जीवन से अनेक प्रकार के पाप, क्लेश, भय और मानसिक अशांति दूर होते हैं। कई कथाओं में राजा, ब्राह्मण, गृहस्थ, दंपति या शापग्रस्त व्यक्ति का प्रसंग आता है, जो ऋषि के उपदेश से इस व्रत को करता है और श्रीविष्णु की कृपा से उसका जीवन बदल जाता है। इससे यह शिक्षा मिलती है कि श्रद्धा, सत्य, संयम और संकल्प के साथ किया गया व्रत अवश्य फल देता है।

इस व्रत के दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। पीले पुष्प, तुलसीदल, धूप-दीप, नैवेद्य, फल और पंचामृत अर्पित किये जाते हैं। भक्त दिनभर सात्त्विक आचरण रखते हैं, विषय-विकारों से दूर रहते हैं और रात्रि में कीर्तन या हरि-स्मरण करते हैं। द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करने का विधान माना जाता है।

परमा एकादशी का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य केवल बाहरी उपवास न करे, बल्कि भीतर से भी क्रोध, लोभ, हिंसा, छल और असत्य का त्याग करे। श्रीहरि के नाम में मन लगाकर किया गया यह व्रत भक्ति, शांति, सद्बुद्धि और कल्याण देता है।

परमा एकादशी का फल

  • संकटमोचन और उत्तम लोक प्राप्ति का महात्म्य
  • श्रीविष्णु की कृपा, पापक्षय और पुण्यवृद्धि
  • मन की शुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति
  • परिवार, संकल्प और जीवनमार्ग में मंगलभाव
Google AdSense Space