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10 Sep 2026
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दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला में माता दुर्गा के 32 दिव्य नामों का वर्णन है। यहां इसका शुद्ध संस्कृत पाठ, सभी नामों का सरल हिंदी अर्थ, फलश्रुति, महत्व और पाठ-विधि पढ़ें।

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दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला का संपूर्ण संस्कृत पाठ

देवताओं की प्रार्थना

देवा ऊचुः—

अथाऽपि त्वां सुपृच्छामो जगद्रक्षणहेतवे ।
विपन्नं त्वं कथं शीघ्रं प्रसन्ना रक्षसीश्वरि ॥

एतन्नो ब्रूहि देवेशि रहस्यमपि सर्वथा ।
प्रार्थितैवं सुरगणैः प्राह दुर्गा दयाऽन्विता ॥

माता दुर्गा का कथन

देवाः शृणुध्वमेतत्तु गोप्यमत्यन्तदुर्लभम् ।
द्वात्रिंशन्नाममाला मे सर्वापत्प्रविनाशनी ॥

नास्ति तत्सदृशी काचित्स्तुतिस्त्रैलोक्यमण्डले ।
रहस्यरूपा सर्वत्र शृणुध्वं तां ब्रवीमि वः ॥

दुर्गा के 32 नाम

दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गाऽऽपद्विनिवारिणी ।
दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी ॥ १ ॥

दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा ।
दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला ॥ २ ॥

दुर्गमादुर्गमालोका दुर्गमाऽऽत्मस्वरूपिणी ।
दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता ॥ ३ ॥

दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी ।
दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी ॥ ४ ॥

दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी ।
दुर्गमाङ्गी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी ॥ ५ ॥

दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी ।
नामावलिमिमां यस्तु दुर्गायाः सुधी मानवः ॥ ६ ॥

फलश्रुतिः

पठेत्सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः ।
शत्रुभिः पीड्यमानो वा दुर्गबन्धगतोऽपि वा ॥ ७ ॥

द्वात्रिंशन्नामपाठेन मुच्यते नात्र संशयः ।
राज्ञा वधाय चाऽऽज्ञप्तः क्रुद्धेन दण्डनाय च ॥ ८ ॥

युद्धे शत्रुभिराक्रान्तो व्याघ्राद्यैर्वा तथा वने ।
मुच्यते सर्वभीतिभ्यः पठन्नष्टोत्तरं शतम् ॥ ९ ॥

आपत्सु नैतत्सदृशमन्यदस्ति भयापहम् ।
एतत्तु पठतां देवाः न किञ्चिद्धीयते क्वचित् ॥ १० ॥

नैतद्देयमभक्ताय नास्तिकाय शठाय च ।
देयं भक्ताय शान्ताय गुरुदेवरताय च ॥ ११ ॥

प्राप्तो महापदं यस्तु पठेन्नामावलीमिमाम् ।
सहस्रवारमयुतवारं वा लक्षमेव वा ॥ १२ ॥

ब्राह्मणैर्वा स्वयं वाऽपि मुच्यते सकलापदः ।
संसिद्धेऽग्नौ हुनेदेभिर्नामभिर्लक्षसङ्ख्यया ॥ १३ ॥

तिलैः शुक्लैस्त्रिमध्वक्तैर्मुच्यते चापदां गणैः ।
अयुतत्रयमेतस्य पुरश्चरणमुच्यते ॥ १४ ॥

॥ इति श्रीत्रिपुरारहस्ये माहात्म्यखण्डे षट्चत्वारिंशोऽध्यायान्तर्गता दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावलिः समाप्ता ॥



दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला का सरल हिंदी अर्थ

देवताओं की प्रार्थना का अर्थ

देवताओं ने माता दुर्गा से कहा—हे जगत की रक्षा करने वाली ईश्वरी! हम आपसे यह जानना चाहते हैं कि आप किस उपाय से शीघ्र प्रसन्न होकर संकट में पड़े हुए व्यक्ति की रक्षा करती हैं। यदि यह रहस्य अत्यंत गोपनीय हो, तब भी कृपा करके हमें बताइए।

देवताओं की प्रार्थना सुनकर दयामयी माता दुर्गा ने कहा—हे देवताओं! मेरे इन 32 नामों की माला अत्यंत गोपनीय और दुर्लभ है। यह सभी प्रकार की आपत्तियों का नाश करने वाली है। तीनों लोकों में इसके समान दूसरी कोई स्तुति नहीं है।

माता दुर्गा के 32 नाम और उनके अर्थ

1. दुर्गा

जो अपने भक्तों को दुर्गति, संकट और दुःख से बचाती हैं।

2. दुर्गार्तिशमनी

जो कठिन परिस्थितियों से उत्पन्न पीड़ा और दुःख को शांत करती हैं।

3. दुर्गापद्विनिवारिणी

जो बड़ी से बड़ी आपदा और विपत्ति को दूर करती हैं।

4. दुर्गमच्छेदिनी

जो कठिनाइयों और संकटों के बंधन को काट देती हैं।

5. दुर्गसाधिनी

जो कठिन और असंभव दिखाई देने वाले कार्यों को सिद्ध करने की शक्ति देती हैं।

6. दुर्गनाशिनी

जो दुर्गति, दुःख और बाधाओं का नाश करती हैं।

7. दुर्गतोद्धारिणी

जो संकट और दुर्गति में फंसे हुए भक्तों का उद्धार करती हैं।

8. दुर्गनिहन्त्री

जो कठिन संकटों और दुष्ट शक्तियों का संहार करती हैं।

9. दुर्गमापहा

जो अत्यंत कठिन विपत्तियों को दूर करने वाली हैं।

10. दुर्गमज्ञानदा

जो दुर्लभ और गहन आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करती हैं।

11. दुर्गदैत्यलोकदवानला

जो दुर्ग नामक दैत्य और उसके साम्राज्य के लिए वन की अग्नि के समान विनाशकारी हैं।

12. दुर्गमा

जिनके वास्तविक स्वरूप को समझना और प्राप्त करना अत्यंत कठिन है।

13. दुर्गमालोका

जिनका दिव्य दर्शन साधारण साधनों से प्राप्त करना कठिन है।

14. दुर्गमात्मस्वरूपिणी

जो गहन, दुर्लभ और परम आत्मतत्त्व का स्वरूप हैं।

15. दुर्गमार्गप्रदा

जो जीवन के कठिन मार्गों में भक्त को सही दिशा दिखाती हैं।

16. दुर्गमविद्या

जो रहस्यमयी, गहन और दुर्लभ आध्यात्मिक विद्या का स्वरूप हैं।

17. दुर्गमाश्रिता

जो कठिन परिस्थितियों में पड़े हुए भक्तों का परम आश्रय हैं।

18. दुर्गमज्ञानसंस्थाना

जो अत्यंत गहन और दुर्लभ ज्ञान में प्रतिष्ठित हैं।

19. दुर्गमध्यानभासिनी

जो गहन ध्यान के माध्यम से साधक के अंतःकरण में प्रकाशित होती हैं।

20. दुर्गमोहा

जो अत्यंत गहरे मोह और अज्ञान से भक्त को मुक्त करती हैं।

21. दुर्गमगा

जो दुर्गम स्थानों और कठिन मार्गों में भी भक्त के साथ रहती हैं।

22. दुर्गमार्थस्वरूपिणी

जो जीवन और अध्यात्म के कठिन एवं गूढ़ अर्थों का वास्तविक स्वरूप हैं।

23. दुर्गमासुरसंहन्त्री

जो दुर्गमासुर तथा दुष्ट और अधार्मिक शक्तियों का संहार करती हैं।

24. दुर्गमायुधधारिणी

जो असुरों के नाश और धर्म की रक्षा के लिए दिव्य आयुध धारण करती हैं।

25. दुर्गमाङ्गी

जिनका प्रत्येक अंग दिव्य, रहस्यमय और अलौकिक है।

26. दुर्गमता

जो स्वयं दुर्गम और गहन परम तत्त्व का स्वरूप हैं।

27. दुर्गम्या

जिन्हें सच्ची भक्ति, श्रद्धा और साधना द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।

28. दुर्गमेश्वरी

जो सभी कठिन परिस्थितियों, दुर्गों और शक्तियों की अधिष्ठात्री ईश्वरी हैं।

29. दुर्गभीमा

जो दुष्टों के लिए अत्यंत भयंकर और धर्म की रक्षा करने वाली हैं।

30. दुर्गभामा

जो दिव्य सौंदर्य, तेज और प्रकाश से सुशोभित हैं।

31. दुर्गभा

जो अपने दिव्य प्रकाश से संकट और अज्ञान का अंधकार दूर करती हैं।

32. दुर्गदारिणी

जो दुर्गति, संकट और अधर्म को विदीर्ण करके नष्ट कर देती हैं।

छह मूल श्लोकों का भावार्थ

श्लोक 1 का अर्थ

माता दुर्गा संकटों और उनसे उत्पन्न पीड़ा को शांत करने वाली हैं। वे सभी आपदाओं को दूर करती हैं, कठिनाइयों के बंधन काटती हैं, दुर्गम कार्यों को सिद्ध करती हैं और दुर्गति का नाश करती हैं।

श्लोक 2 का अर्थ

माता दुर्गा संकट में पड़े हुए भक्त का उद्धार करती हैं, दुष्ट शक्तियों का संहार करती हैं और कठिन विपत्तियां दूर करती हैं। वे दुर्लभ ज्ञान प्रदान करने वाली तथा दुर्गम दैत्य के लोक के लिए दावानल के समान हैं।

श्लोक 3 का अर्थ

माता दुर्गा का वास्तविक स्वरूप जानना और उनका दर्शन प्राप्त करना कठिन है। वे परम आत्मतत्त्व का स्वरूप हैं, कठिन मार्ग में दिशा दिखाती हैं, दुर्लभ विद्या हैं और संकट में भक्तों का आश्रय बनती हैं।

श्लोक 4 का अर्थ

माता गहन ज्ञान में स्थित हैं और ध्यान करने वाले साधक के अंतःकरण में प्रकाशित होती हैं। वे मोह से मुक्त करती हैं, दुर्गम मार्गों में साथ रहती हैं और गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ का वास्तविक स्वरूप हैं।

श्लोक 5 का अर्थ

माता दुर्गा दुर्गमासुर का संहार करने वाली और दिव्य आयुध धारण करने वाली हैं। उनका स्वरूप दिव्य और दुर्लभ है। वे परम तत्त्व तथा संपूर्ण दुर्गम शक्तियों की अधिष्ठात्री ईश्वरी हैं।

श्लोक 6 का अर्थ

माता दुष्टों के लिए भयंकर, भक्तों के लिए सुंदर और दिव्य प्रकाश से युक्त हैं। वे संकटों को विदीर्ण करने वाली हैं। जो बुद्धिमान मनुष्य माता दुर्गा के इन 32 नामों का पाठ करता है, वह उनकी शरण प्राप्त करता है।

फलश्रुति का सरल हिंदी अर्थ

श्लोक 7 का अर्थ

जो मनुष्य इन नामों का पाठ करता है, वह सभी प्रकार के भय से मुक्त होता है। शत्रुओं से पीड़ित अथवा कठिन बंधन में फंसे हुए व्यक्ति के लिए भी यह नाममाला रक्षा की प्रार्थना है।

श्लोक 8 का अर्थ

माता के इन 32 नामों का पाठ संकट से मुक्ति प्रदान करने वाला बताया गया है। कठोर दंड अथवा किसी गंभीर विपत्ति का सामना करने वाला व्यक्ति भी माता की शरण प्राप्त करता है।

श्लोक 9 का अर्थ

युद्ध में शत्रुओं से घिर जाने या वन में हिंसक पशुओं का भय होने पर इन नामों का 108 बार पाठ करने से सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलने की बात कही गई है।

श्लोक 10 का अर्थ

फलश्रुति के अनुसार विपत्ति के समय भय दूर करने के लिए इसके समान दूसरा पाठ नहीं है। श्रद्धापूर्वक पाठ करने वाले की आध्यात्मिक रक्षा होती है और उसका कल्याण होता है।

श्लोक 11 का अर्थ

यह नाममाला अश्रद्धालु, कपटी और उपहास करने वाले व्यक्ति को नहीं बतानी चाहिए। इसे शांत स्वभाव, श्रद्धालु तथा गुरु और भगवान में विश्वास रखने वाले भक्त को देना चाहिए।

श्लोक 12 का अर्थ

बड़ी विपत्ति में पड़े हुए व्यक्ति के लिए इस नाममाला के एक हजार, दस हजार अथवा एक लाख पाठ का उल्लेख मिलता है।

श्लोक 13 का अर्थ

व्यक्ति स्वयं अथवा योग्य ब्राह्मणों के माध्यम से इसका पाठ कर सकता है। फलश्रुति में विधिपूर्वक अग्नि में इन नामों से हवन करने का भी वर्णन है।

श्लोक 14 का अर्थ

सफेद तिलों को तीन मधुर पदार्थों से मिलाकर हवन करने का उल्लेख मिलता है। इस नाममाला का पुरश्चरण तीस हजार पाठ बताया गया है। ऐसा विशेष अनुष्ठान किसी योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला का परिचय

“द्वात्रिंशत्” का अर्थ बत्तीस और “नाममाला” का अर्थ नामों की माला है। इसलिए दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला का अर्थ माता दुर्गा के 32 दिव्य नामों की माला है।

इन नामों में माता को संकटों का नाश करने वाली, कठिन मार्ग में दिशा देने वाली, दुर्लभ ज्ञान प्रदान करने वाली और भक्तों का उद्धार करने वाली शक्ति के रूप में स्मरण किया गया है।

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला का महत्व

दुर्गा के इन 32 नामों का मुख्य भाव भय, विपत्ति और कठिन परिस्थितियों में माता की शरण ग्रहण करना है। नाममाला का प्रत्येक नाम माता की किसी विशेष शक्ति अथवा गुण को प्रकट करता है।

यह पाठ छोटा होने के कारण दैनिक पूजा, यात्रा से पहले, नवरात्रि और संकट के समय आसानी से किया जा सकता है।

दुर्गा के 32 नामों के पाठ के लाभ

धार्मिक मान्यता और फलश्रुति के अनुसार:

  • माता दुर्गा की कृपा और संरक्षण प्राप्त होता है।
  • भय तथा नकारात्मक विचारों को दूर करने में आध्यात्मिक सहायता मिलती है।
  • कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस बढ़ता है।
  • मन में आत्मविश्वास, शांति और सकारात्मकता आती है।
  • संकट के समय माता की शरण और मानसिक सहारा मिलता है।
  • ज्ञान, भक्ति और सही मार्ग की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • दुष्ट विचारों और गलत आचरण से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है।
  • माता दुर्गा के विभिन्न दिव्य गुणों का स्मरण होता है।

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला की पाठ-विधि

पाठ से पहले

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर माता दुर्गा का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान गणेश तथा माता का स्मरण करें।

माता को क्या अर्पित करें?

माता को लाल पुष्प, अक्षत, कुमकुम, फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्त्विक भोग अर्पित किया जा सकता है।

पाठ कैसे करें?

पहले माता दुर्गा का ध्यान करें और उसके बाद सभी 32 नामों का स्पष्ट उच्चारण करें। सामान्य दैनिक उपासना में इसका एक, तीन, नौ, ग्यारह अथवा 32 बार पाठ किया जा सकता है। फलश्रुति में विशेष संकट के समय 108 बार पाठ का उल्लेख मिलता है।

हवन, पुरश्चरण अथवा हजारों पाठ वाला विशेष अनुष्ठान किसी योग्य विद्वान अथवा आचार्य के निर्देशन में ही करें।

पाठ करने का शुभ समय

इस नाममाला का पाठ प्रतिदिन प्रातः अथवा संध्याकाल किया जा सकता है। मंगलवार, शुक्रवार, नवरात्रि, दुर्गाष्टमी, नवमी, पूर्णिमा और माता से संबंधित पर्वों पर इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है।

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