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09 Sep 2026
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श्री आञ्जनेय दण्डकम्

आञ्जनेय दण्डकम् भगवान हनुमान की शक्ति, रामभक्ति और पराक्रम का गुणगान करने वाली प्रसिद्ध तेलुगु भक्तिरचना है।

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श्री आञ्जनेय दण्डकम् मूल पाठ

श्री आञ्जनेयं प्रसन्नाञ्जनेयं
प्रभादिव्यकायं प्रकीर्तिप्रदायं।
भजे वायुपुत्रं भजे वालगात्रं भजेहं पवित्रं
भजे सूर्यमित्रं भजे रुद्ररूपं
भजे ब्रह्मतेजं बटञ्चुन् प्रभातम्बु सायन्त्रमुन्।

नीनामसङ्कीर्तनल् जेसि
नी रूपु वर्णिञ्चि नीमीद ने दण्डकं बॊक्कटिन् जेय नोहिञ्चि
नी मूर्तिगाविञ्चि नीसुन्दरं बॆञ्चि नी दासदासुण्डनै
रामभक्तुण्डनै निन्नु नेगॊल्चॆदन्।

नी नन् कटाक्षम्बुनन् जूचिते वेडुकल् चेसिते
ना मॊरालिञ्चिते नन्नु रक्षिञ्चिते
अञ्जनादेवि गर्भान्वया देव
निन्नॆञ्च नेनॆन्तवाडन्।

दयाशालिवै जूचियुन् दातवै ब्रोचियुन्
दग्गरन् निल्चियुन् दॊल्लि सुग्रीवुकुन् मन्त्रिवै
स्वामिकार्यार्थमै येगि
श्रीरामसौमित्रुलं जूचि वारिन्विचारिञ्चि
सर्वेशु बूजिञ्चि यब्भानुजुं बण्टु गाविञ्चि
यव्वालिनिन् जम्पिञ्चि काकुत्स्थतिलकुन्
दयादृष्टि वीक्षिञ्चि।

किष्किन्धकेतॆञ्चि श्रीरामकार्यार्थमै लङ्ककेतॆञ्चियुन्
लङ्किणिन् जम्पियुन् लङ्कनुन् गाल्चियुन्
यभ्भूमिजं जूचि यानन्दमुप्पॊङ्गि
यायुङ्गरम्बिच्चि यारत्नमुन् दॆच्चि
श्रीरामुनकुन्निच्चि सन्तोषमुन्जेसि।

सुग्रीवुनिन् यङ्गदुन् जाम्बवन्तु
वीराधुलन् गूडि
यासेतुवुन् दाटि वानरुल्मूकलै पॆन्मूकलै
दैत्युलन् द्रुञ्चगा।

रावणुण्डन्त कालाग्निरुद्रुण्डुगा कोरि वच्चि
ब्रह्माण्डमैनट्टि या शक्तिनिन्वैचि
यालक्षणुन् मूर्छनॊन्दिम्पगा
नप्पुडे पोयि सञ्जीविनिन्दॆच्चि
सौमित्रिकिन्निच्चि प्राणम्बु रक्षिम्पगा।

कुम्भकर्णादुलन् वीरुलं बोर
श्रीरामबाणाग्निवारन्दरिन् रावणुन् जम्पगा
नन्त लोकम्बुलानन्दमैयुण्ड।

नव्वेलनु न्विभीषणुन् वेडुकन् दोडुकन् वच्चि
पट्टाभिषेकम्बु चेयिञ्चि
सीतामहादेविनिन् दॆच्चि श्रीरामुतो चेर्चि
यन्तन्नयोध्यापुरिन्जॊच्चि
पट्टाभिषेकम्बु संरम्भमैयुन्न।

नीकन्न नाकॆव्वरुन् गूर्मि लेरञ्चु मन्निञ्चिनन्
श्रीरामभक्ति प्रशस्तम्बुगा निन्नु सेविञ्चि
नीनामसङ्कीर्तनल् चेसिति।

पापमुल्ल्बायुने भयमुलुन् दीरुने
भाग्यमुल् गल्गुने
सकलसाम्राज्यमुल् गल्गु
सम्पत्तुलुन् कल्गुनो।

वानराकार यो भक्तमन्दार यो पुण्यसञ्चार यो
धीर यो वीर!
नीवे समस्तम्बु नीवे महाफलमुगा वॆलसि।

यातारकब्रह्ममन्त्रम्बु पठियिञ्चुचुन्
सन्धानमुन् चेयुचु स्थिरम्मुगन्
वज्रदेहम्बुनुन् दाल्चि
श्रीराम श्रीरामयञ्चुन्
मनःपूतमैन ऎप्पुडुन् तप्पकन् तलतुना।

जिह्वयन्दुण्डि नी दीर्घदेहम्मु त्रैलोक्यसञ्चारिवै
रामनामाङ्कितध्यानिवै
ब्रह्मवै ब्रह्मतेजम्बुनन्
रौद्रनीज्वालकल्लोल हा वीर हनुमन्त!

ओङ्कारशब्दम्बुलन्
क्रूरकर्मग्रह भूतप्रेतम्बुलन्
पिशाचम्बुलन् शाकिनी ढाकिनी मोहिनीत्यादुलन्
गालिदय्यम्बुलन्
नीदु वालम्बुनन् जुट्टि नेलम्बडं गॊट्टि
नीमुष्टिघातम्बुलन्
बाहुदण्डम्बुलन् रोमखण्डम्बुलन् द्रुञ्चि
कालाग्निरुद्रुण्डवै।

नीवु ब्रह्मप्रभाभासितम्बैन
नीदिव्यतेजम्बुनुन् जूचि
रारा नामुद्दु नरसिंह यञ्चुन्
दयादृष्टि वीक्षिञ्चि नन्नेलु
नास्वामियो याञ्जनेया!

नमस्ते सदा ब्रह्मचारी।
नमस्ते व्रतापूर्णकारी।
नमस्ते नमो वायुपुत्रा।
नमस्ते नमस्ते नमो नमः॥



आञ्जनेय दण्डकम् का सरल हिंदी अर्थ

हे प्रसन्न रहने वाले आञ्जनेय! आपका शरीर दिव्य प्रकाश से प्रकाशित है और आप अपने भक्तों को यश प्रदान करने वाले हैं। मैं वायुपुत्र, पवित्र स्वरूप, सूर्यदेव के मित्र, रुद्रावतार और ब्रह्मतेज से प्रकाशित भगवान हनुमान की आराधना करता हूं।

मैं प्रातःकाल और संध्याकाल आपके पवित्र नामों का संकीर्तन करता हूं। आपके सुंदर स्वरूप का ध्यान करते हुए आपके लिए यह दण्डकम् अर्पित करता हूं। मैं आपका सेवक और भगवान श्रीराम का भक्त बनकर निरंतर आपकी उपासना करना चाहता हूं।

हे माता अंजनी के पुत्र! कृपा करके मेरी प्रार्थना सुनिए, मुझ पर अपना कृपापूर्ण कटाक्ष डालिए और मेरी रक्षा कीजिए। आपकी महिमा का पूर्ण वर्णन करने की सामर्थ्य मुझमें नहीं है।

आपने दयालु बनकर सुग्रीव की सहायता की और उनके मंत्री के रूप में अपने कर्तव्य का पालन किया। आपने श्रीराम और लक्ष्मण को पहचाना तथा सुग्रीव से उनकी मित्रता कराई। आपने बालि-वध और श्रीराम के कार्य की सिद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्रीराम की आज्ञा से आप लंका पहुंचे। आपने लंकिनी को पराजित किया, माता सीता का पता लगाया और उन्हें श्रीराम की अंगूठी प्रदान की। इसके बाद आपने लंका का दहन किया तथा माता सीता द्वारा दिया गया चूड़ामणि लाकर श्रीराम को सौंप दिया।

आप सुग्रीव, अंगद, जाम्बवान और दूसरे वानर वीरों के साथ समुद्र पार करके लंका पहुंचे। वहां आपने राक्षसों का संहार किया और श्रीराम की सेना की विजय में सहायता की।

जब रावण की शक्ति लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो गए, तब आप तुरंत संजीवनी औषधि वाला पर्वत उठा लाए। उस औषधि के प्रभाव से लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा हुई।

आपने कुम्भकर्ण सहित अनेक शक्तिशाली राक्षसों के विरुद्ध युद्ध किया। अंत में भगवान श्रीराम के बाणों से रावण का वध हुआ और समस्त संसार आनंदित हो उठा।

रावण-वध के बाद आपने विभीषण के राज्याभिषेक में सहायता की। माता सीता को भगवान श्रीराम से मिलाया और उनके साथ अयोध्या लौटकर श्रीराम के राज्याभिषेक का आनंद प्राप्त किया।

हे हनुमान! श्रीराम ने स्वयं आपकी अनुपम भक्ति की प्रशंसा की। आपके समान निष्काम, निष्ठावान और समर्पित भक्त दूसरा कोई नहीं है। इसलिए मैं आपकी सेवा करता हूं और आपके पवित्र नामों का स्मरण करता हूं।

धार्मिक मान्यता है कि हनुमानजी का नाम-स्मरण पापों और भय को दूर करके भक्त को शुभता, सौभाग्य तथा समृद्धि प्रदान करता है।

हे वानर रूपधारी प्रभु! आप भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान हैं। आप पुण्यस्वरूप, धैर्यवान और परम पराक्रमी हैं। मेरे लिए आप ही सब कुछ हैं और आपकी भक्ति ही जीवन का सबसे बड़ा फल है।

आपका वज्र के समान शक्तिशाली शरीर निरंतर श्रीराम के नाम में लीन रहता है। आपकी जिह्वा पर सदैव “श्रीराम” का नाम रहता है और आप तीनों लोकों में श्रीराम का संदेश पहुंचाने वाले हैं।

आप ब्रह्मतेज से प्रकाशित, रुद्र के समान प्रचंड और ओंकार के समान दिव्य हैं। आपकी गर्जना से दुष्ट शक्तियां, नकारात्मक ग्रह-बाधाएं, भूत-प्रेत, पिशाच, शाकिनी और डाकिनी आदि भयभीत होकर दूर चले जाते हैं।

आप अपनी पूंछ, वज्र के समान मुष्टियों और बलवान भुजाओं से दुष्ट शक्तियों का विनाश करते हैं। आपका तेज कालाग्नि और रुद्र के समान प्रचंड है।

हे मेरे प्रिय आञ्जनेय स्वामी! भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने वाले भगवान नरसिंह की तरह आप भी मेरी रक्षा के लिए आइए। मुझ पर अपनी दयामयी दृष्टि डालिए और मुझे अपनी शरण प्रदान कीजिए।

हे सदा ब्रह्मचारी, व्रतों और संकल्पों को पूर्ण कराने वाले वायुपुत्र! आपको बार-बार नमस्कार है।

आञ्जनेय दण्डकम् का परिचय

आञ्जनेय भगवान हनुमान का प्रसिद्ध नाम है, जिसका अर्थ है—माता अंजनी के पुत्र। इस दण्डकम् में हनुमानजी के दिव्य स्वरूप, श्रीराम के प्रति उनकी निष्काम भक्ति और रामायण में किए गए उनके महान कार्यों का वर्णन मिलता है।

इसमें सुग्रीव और श्रीराम की मित्रता, माता सीता की खोज, लंका-दहन, संजीवनी पर्वत लाने तथा रावण-वध में हनुमानजी की भूमिका का स्मरण किया गया है। उपलब्ध पाठ मूलतः तेलुगु भक्तिपरंपरा का है और इसे देवनागरी सहित अनेक लिपियों में प्रकाशित किया गया है। वैदिक विज्ञानम्

आञ्जनेय दण्डकम् का धार्मिक महत्त्व

यह रचना केवल हनुमानजी के बल और पराक्रम का वर्णन नहीं करती, बल्कि उनकी विनम्रता, कर्तव्यनिष्ठा और श्रीराम के प्रति पूर्ण समर्पण को भी प्रकट करती है।

दण्डकम् में हनुमानजी को वायुपुत्र, रामभक्त, रुद्रस्वरूप, ब्रह्मतेज से प्रकाशित, भक्तों के रक्षक और दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाला बताया गया है।

आञ्जनेय दण्डकम् के पाठ के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करने से:

  • मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • भय और नकारात्मक विचारों को दूर करने में सहायता मिलती है।
  • कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
  • भगवान श्रीराम और हनुमानजी के प्रति भक्ति बढ़ती है।
  • मन को एकाग्रता और शांति प्राप्त होती है।
  • कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रेरणा मिलती है।
  • अनुशासन, सेवा और कर्तव्यपालन की भावना मजबूत होती है।

ये लाभ धार्मिक आस्था और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं।

आञ्जनेय दण्डकम् पाठ-विधि

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा-स्थान पर श्रीराम, माता सीता और हनुमानजी का चित्र स्थापित करें।
  3. दीपक जलाकर हनुमानजी को सिंदूर, पुष्प और गुड़-चना अर्पित करें।
  4. सबसे पहले भगवान श्रीराम का स्मरण करें।
  5. शांत और एकाग्र मन से आञ्जनेय दण्डकम् का पाठ करें।
  6. पाठ के बाद हनुमान चालीसा अथवा “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जप किया जा सकता है।
  7. अंत में अपनी त्रुटियों के लिए क्षमा मांगकर सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।

पाठ करने का शुभ समय

आञ्जनेय दण्डकम् का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है। मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष रूप से प्रचलित है। प्रातःकाल अथवा सूर्यास्त के बाद शांत वातावरण में पाठ करना सुविधाजनक माना जाता है।

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