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23 Mar 2026
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व्रत कथा

श्रीहरि विष्णु कृपा व्रत कथा

श्रीहरि विष्णु कृपा व्रत कथा का महत्व, कथा और पूजा विधि पढ़ें।

श्रीहरि विष्णु कृपा व्रत कथा
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॥ श्रीहरि विष्णु कृपा (बृहस्पतिवार) व्रत कथा ॥ 👑🙏

कथा प्रारम्भ:

प्राचीन काल में एक बड़ा प्रतापी और दानवीर राजा राज्य करता था। वह प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखता और दीन-दुखियों की सहायता करता था, परंतु यह बात उसकी रानी को अच्छी नहीं लगती थी। वह न तो व्रत रखती थी और न ही किसी को दान देती थी। वह राजा को भी दान देने से मना करती थी।

एक समय की बात है, राजा शिकार खेलने वन को गया हुआ था। घर पर रानी और दासी थीं। उसी समय भगवान विष्णु एक साधु का रूप धारण करके राजा के द्वार पर भिक्षा माँगने आए। साधु ने रानी से भिक्षा माँगी, तो रानी कहने लगी— "हे साधु महाराज! मैं इस दान और पुण्य से तंग आ गई हूँ। मेरा सारा धन इन कार्यों में व्यय हो जाता है। आप कृपा करके कोई ऐसा उपाय बताएँ, जिससे यह सारा धन नष्ट हो जाए और मैं आराम से रह सकूँ।"

साधु रूपी भगवान विष्णु ने कहा— "हे देवी! तुम बड़ी विचित्र हो, लोग तो धन और संतान माँगते हैं, पर तुम धन नष्ट करना चाहती हो। यदि तुम्हारे पास धन अधिक है, तो इसे शुभ कार्यों में लगाओ, भूखों को भोजन कराओ, प्याऊ लगवाओ।" परंतु रानी पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उसने फिर वही आग्रह किया।

तब साधु ने कहा— "यदि तुम्हारी यही इच्छा है, तो मैं जैसा कहता हूँ वैसा ही करो। गुरुवार के दिन तुम घर को गोबर से लीपना, अपने केशों को पीली मिट्टी से धोना, राजा से कहना कि वह हजामत बनवाए, भोजन में मांस-मदिरा का प्रयोग करना और अपने वस्त्र धोबी को धोने देना। ऐसा सात गुरुवार करने से तुम्हारा सारा धन नष्ट हो जाएगा।" इतना कहकर साधु अंतर्ध्यान हो गए।

रानी ने साधु के कहे अनुसार ही किया। केवल तीन गुरुवार बीतने पर ही राजा की सारी संपत्ति नष्ट हो गई। राजकोष खाली हो गया और राजा दरिद्र हो गया। राजा की स्थिति ऐसी हो गई कि उसे और उसके परिवार को दो समय का भोजन भी मिलना कठिन हो गया। तब राजा काम की तलाश में दूसरे देश चला गया।

इधर रानी और दासी अत्यंत दुखी रहने लगीं। एक बार जब सात दिन तक उन्हें भोजन नहीं मिला, तो रानी ने दासी से कहा— "पास के नगर में मेरी बहन रहती है, वह बहुत धनी है। तुम उसके पास जाओ और कुछ अनाज माँग लाओ।" दासी वहाँ गई, लेकिन उस दिन गुरुवार था और रानी की बहन कथा सुन रही थी, इसलिए उसने दासी को कोई उत्तर नहीं दिया। दासी ने समझा कि रानी की बहन ने उसे पहचाना नहीं और वह दुखी होकर वापस लौट आई।

जब रानी को यह पता चला, तो वह बहुत रोई। तब भगवान विष्णु ने फिर साधु का रूप धारण किया और दासी को मार्ग में मिले। उन्होंने सारी व्यथा सुनकर दासी को गुरुवार का व्रत करने और कथा सुनने की सलाह दी। साधु ने कहा— "तुम दो पैसे के चने की दाल और गुड़ लेकर जल के पात्र में डालना और केले के वृक्ष का पूजन करना, फिर कथा सुनना। इससे तुम्हारी दरिद्रता दूर होगी।"

दासी ने रानी को यह बात बताई। अगले गुरुवार उन्होंने उपवास रखा और भगवान विष्णु का पूजन किया। पूजन के बाद उन्हें मार्ग में दो पैसे मिले, जिससे उन्होंने चने की दाल और गुड़ खरीदा। कथा सुनी और प्रसाद ग्रहण किया। भगवान की कृपा से उनके घर में अन्न और धन के भंडार फिर से भरने लगे।

उधर दूर देश में राजा को भी भगवान की कृपा से बहुत सम्मान और धन प्राप्त हुआ। राजा वापस अपने नगर लौटा और रानी के साथ मिलकर विधि-विधान से प्रत्येक गुरुवार को भगवान विष्णु का पूजन करने लगा। अंत में वे सभी सुख भोगकर वैकुण्ठ धाम को गए।


॥ व्रत के नियम और पूजन विधि ॥ 📋✨

  1. केले के वृक्ष का पूजन: गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करना चाहिए।

  2. पीले रंग का महत्व: इस दिन पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। भगवान को पीले फूल, पीले फल (केला) और पीला चंदन अर्पित करना चाहिए।

  3. नैवेद्य: चने की दाल, गुड़ और मुनक्का का भोग लगाना चाहिए। इस दिन केले का फल स्वयं नहीं खाना चाहिए, बल्कि दान करना चाहिए।

  4. हजामत और साबुन निषेध: इस दिन बाल काटना, हजामत बनवाना, नाखून काटना और कपड़ों पर साबुन लगाना वर्जित माना गया है।

  5. एक समय भोजन: व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिन में एक बार बिना नमक का पीला भोजन (जैसे बेसन का हलवा या चने की दाल) करना चाहिए।

  6. कथा श्रवण: हाथ में चने की दाल और कुछ पुष्प लेकर श्रद्धापूर्वक कथा सुननी चाहिए और अंत में आरती करनी चाहिए।


॥ व्रत का धार्मिक महत्व ॥ 🔱🌟

  • सृष्टि के पालनहार: भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं। उनकी पूजा से व्यक्ति के जीवन के सभी भौतिक और आध्यात्मिक अभाव दूर होते हैं।

  • बृहस्पति देव का प्रभाव: ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति (गुरु) ग्रह को सुख, संपदा और ज्ञान का कारक माना जाता है। इस व्रत से गुरु ग्रह के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।

  • शुद्धता का प्रतीक: यह व्रत मन और शरीर की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है और साधक में सात्विक गुणों का संचार करता है।


॥ विष्णु कृपा व्रत के लाभ ॥ 💎🌈

  • दरिद्रता का नाश: जो व्यक्ति इस कथा का नियमित पाठ करता है, उसके घर से दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी जी का स्थायी वास होता है।

  • संतान सुख: निःसंतान दंपत्तियों को भगवान विष्णु की कृपा से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है।

  • विवाह में बाधा: अविवाहित कन्याओं के विवाह में आ रही अड़चनें इस व्रत के प्रभाव से दूर हो जाती हैं।

  • यश और कीर्ति: समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और व्यापार में उन्नति होती है।

  • अंतिम गति: इस व्रत को करने वाला अंत में विष्णु लोक (वैकुण्ठ) को प्राप्त करता है और जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।

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