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व्रत कथा

मंगल प्रदोष व्रत कथा

मंगल प्रदोष व्रत कथा

एक नगर में एक वीर युवक अपने परिवार के साथ रहता था। वह साहसी तो था, परंतु उसके जीवन में बार-बार दुर्घटनाएँ, ऋण और शत्रु बाधाएँ आती रहती थीं। उसकी माता ने एक साधु से उपाय पूछा। साधु ने कहा कि मंगलवार के दिन आने वाले प्रदोष में भगवान शिव का व्रत करने से संकट, ऋण और शत्रु बाधा दूर होती है।

युवक और उसकी माता ने मंगल प्रदोष का व्रत आरंभ किया। दिन भर उपवास रखकर संध्या के समय शिवालय में दीप, धूप और लाल पुष्प अर्पित किए। शिवजी का ध्यान कर उन्होंने परिवार की रक्षा की प्रार्थना की। कुछ समय बाद युवक के जीवन से भय और विघ्न दूर होने लगे। शत्रुओं का प्रभाव समाप्त हुआ, साहस बढ़ा और घर में स्थिरता आने लगी।

मंगल प्रदोष व्रत की महिमा यह है कि यह साहस, सुरक्षा, ऋण-मुक्ति और मंगलकारी फल देता है। जो भक्त इस व्रत को श्रद्धा से करते हैं, उनके जीवन के कठिन मार्ग भी सरल बनने लगते हैं।