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23 Mar 2026
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व्रत कथा

आमलकी एकादशी व्रत कथा

आमलकी एकादशी: अनजाने में किए व्रत ने शिकारी को कैसे बनाया राजा? 😱 जानिए आंवले के पेड़ का दिव्य रहस्य। अभी पढ़ें! 👇

आमलकी एकादशी व्रत कथा
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॥ आमलकी एकादशी व्रत कथा ॥ 🌿✨🌕

कथा प्रारम्भ:

प्राचीन काल में 'वैदिश' नामक एक नगर था, जहाँ चंद्रवंशी राजा 'चैत्ररथ' शासन करते थे। उस नगर के सभी निवासी विष्णु भक्त थे और कोई भी दरिद्र या पापी नहीं था। राजा स्वयं अत्यंत धर्मात्मा थे। एक बार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की 'आमलकी एकादशी' आई। राजा और प्रजा सभी ने नदी के तट पर स्थित एक विशाल आंवले के वृक्ष के नीचे जाकर भगवान विष्णु की पूजा की।

सभी ने रात भर जागरण किया और भगवान के भजन गाए। उसी समय एक अत्यंत भूखा और प्यासा शिकारी (बहेलिया) वहाँ पहुँचा। वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए पाप कर्म (शिकार) करता था। वह मंदिर के पीछे छिपकर चुपचाप एकादशी का पूजन और जागरण देखने लगा। भूख से व्याकुल होने के बावजूद वह पूरी रात जागता रहा और अनजाने में ही उसने एकादशी का व्रत और जागरण पूर्ण कर लिया।

१. शिकारी का पुनर्जन्म

कुछ समय बाद उस शिकारी की मृत्यु हो गई। अनजाने में किए गए आमलकी एकादशी व्रत के प्रभाव से उसने अगले जन्म में 'जयंती' नगरी के राजा 'विदुरथ' के घर जन्म लिया। उसका नाम 'वसूरथ' रखा गया। वह अत्यंत वीर, धार्मिक और प्रजापालक राजा बना।

२. दिव्य शक्ति द्वारा रक्षा

एक बार राजा वसूरथ जंगल में शिकार खेलते-खेलते रास्ता भटक गए और एक वृक्ष के नीचे सो गए। उसी समय कुछ डाकुओं और शत्रुओं ने उन्हें घेर लिया। शत्रुओं ने सोचा कि यही वह राजा है जिसने हमारे सगे-संबंधियों को मारा है, इसलिए इसे मार देना चाहिए। उन्होंने राजा पर अस्त्र-शस्त्रों से प्रहार करना शुरू कर दिया।

परंतु, जैसे ही वे शस्त्र राजा के शरीर के पास पहुँचते, वे फूलों की वर्षा में बदल जाते। तभी राजा के शरीर से एक अत्यंत दिव्य और तेजस्वी स्त्री प्रकट हुई। उस देवी ने क्रोध में आकर पल भर में उन सभी शत्रुओं का संहार कर दिया।

३. व्रत की महिमा का बोध

जब राजा की नींद खुली, तो उन्होंने देखा कि उनके सभी शत्रु मृत पड़े हैं। वे चकित रह गए कि उनकी रक्षा किसने की। तभी एक आकाशवाणी हुई— "हे राजन्! तुम्हारी रक्षा स्वयं भगवान विष्णु की शक्ति ने की है। पिछले जन्म में तुमने अनजाने में जो 'आमलकी एकादशी' का व्रत और जागरण किया था, यह उसी पुण्य का फल है।" राजा वसूरथ यह जानकर अत्यंत प्रसन्न हुए और अपने राज्य लौटकर जीवनभर एकादशी का व्रत करने लगे।


॥ आमलकी एकादशी का महत्व ॥ 📋🌿

मुख्य बिंदुधार्मिक संदेश
आंवले का महत्वआंवले के वृक्ष की उत्पत्ति विष्णु जी के आंसुओं से हुई है, इसमें साक्षात् लक्ष्मी का वास है।
पापों का नाशयह व्रत जाने-अनजाने में किए गए भयंकर पापों को भी नष्ट कर देता है।
मोक्ष की प्राप्तिइस व्रत को करने से व्यक्ति को अंत में वैकुण्ठ धाम प्राप्त होता है।
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