सनातन वाणी • भक्ति, ज्ञान और कथा
23 Mar 2026
Sanatan Vani आधुनिक रूप में सनातन ज्ञान
व्रत कथा

वैभव लक्ष्मी व्रत कथा

कैसे बची दामिनी की गृहस्थी? 😱 कुशीनगर के हरिवंश और साधु महाराज की वो गुप्त कथा, जिसने गरीबी को वैभव में बदल दिया। 👇

वैभव लक्ष्मी व्रत कथा
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॥ अथ श्री वैभवलक्ष्मी व्रतकथा (सम्पूर्ण) ॥ 📖🐚

१. हरिवंश और दामिनी का सुखी जीवन

लाखों की जनसंख्या वाला कुशीनगर एक महानगर था अन्य महानगरों की भाँति वहां भी बुराई अधिक और अच्छाई कम थी इसी नगर में हरिवंश नामक एक सद्गृहस्थ अपनी पत्नी दामिनी के साथ सुखी जीवन बिता रहा था दोनों बड़े नेक, संतोषी और धार्मिक स्वभाव के थे उनकी गृहस्थी की गाड़ी बड़े प्रेम से चल रही थी

२. कुसंगति और सर्वनाश

अचानक हरिवंश बुरे लोगों की संगत में फंस गया और उसका मन गृहस्थी से उचट गया वह देर रात शराब पीकर घर आना और मारपीट करना शुरू कर दिया जुआ, रेस और वेश्यागमन जैसे दुर्व्यसनों ने उसे घेर लिया धन कमाने की लालसा में उसकी बुद्धि हर ली गई और घर का सारा धन इन व्यसनों की भेंट चढ़ गया जो लोग पहले सम्मान करते थे, वे अब उन्हें देखते ही रास्ता बदलने लगे उनकी स्थिति भिखारियों के समान हो गई

३. दामिनी की सहनशीलता और महात्मा का आगमन

दामिनी अत्यंत संयमी और आस्थावान स्त्री थी वह ईशभक्ति में लीन रहती और प्रार्थना करती कि उसके दुख दूर हों एक दिन दोपहर के समय उसके द्वार पर दस्तक हुई दामिनी डर गई क्योंकि घर में अतिथि सेवा के लिए अन्न का दाना भी नहीं था द्वार खोलने पर उसने एक दिव्य-पुरुष को देखा, जिनके चेहरे पर तेज और आँखों में अमृत-वर्षा सी शांति थी वह समझ गई कि यह कोई सिद्ध महात्मा हैं

४. साधु का परामर्श और व्रत की महिमा

महात्मा ने दामिनी को पहचानते हुए उसके दुखों का कारण पूछा दामिनी ने रोते हुए अपनी पूरी व्यथा कह सुनाई साधु महाराज ने कहा— "बेटी! सुख-दुख तो गाड़ी के दो पहियों के समान हैं कर्म का लिखा भोगना ही पड़ता है, पर तुम माँ लक्ष्मी पर श्रद्धा रखो तुम सम्पूर्ण आस्था के साथ माँ वैभवलक्ष्मी का व्रत करो, तुम्हारी साधना अवश्य रंग लाएगी ।" साधु ने दामिनी को शुक्रवार के व्रत की पूरी विधि और नियम विस्तार से समझाए

५. दामिनी का संकल्प और चमत्कार

दामिनी ने २१ शुक्रवारों का संकल्प लिया पहले शुक्रवार को पूजा के समय जब स्वर्णाभूषण रखने की बात आई, तो वह धर्मसंकट में पड़ गई क्योंकि सारे गहने बिक चुके थे तभी उसे अपनी आने वाली संतान के लिए छिपाकर रखी गई नन्ही पायलें याद आईं उसने उन्हें ही शुद्ध करके पूजा में रखा और गुड़-शक्कर का प्रसाद चढ़ाया

व्रत के प्रभाव से सप्ताह भर में ही उसका पति अपेक्षाकृत शांत रहने लगा दामिनी की आस्था बलवती हुई और उसने २० शुक्रवार पूरे कर लिए इस बीच उसका पति कुसंगति छोड़कर सीधी राह पर आ गया और उसका कामकाज भी जमने लगा घर में सुख-समृद्धि वापस आ गई

॥ उद्यापन की विधि ॥ 🔔🥥

इक्कीसवें शुक्रवार को दामिनी ने शास्त्रोक्त विधि से उद्यापन किया:कन्या पूजन: सात कुंवारी कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा दी 

  1. पुस्तक दान: सौभाग्यवती स्त्रियों में माँ वैभवलक्ष्मी व्रतकथा की पुस्तकें भेंट कीं 

  2. क्षमा प्रार्थना: माँ के सम्मुख हाथ जोड़कर विनती की— "हे माँ! यदि मैंने शुद्ध हृदय से आपकी स्तुति की हो, तो मेरी मनोकामना पूर्ण करना। दुखियों का दुख हरना और सबको सुख-समृद्धि प्रदान करना

दामिनी का उजड़ा हुआ घर पुनः बस गया और उसे नया जीवन मिला

॥ माँ लक्ष्मी स्तवन एवं स्तुति ॥ 🐚🔱

पूजन के समय इस श्लोक का पाठ करना अत्यंत फलदायी है:

या रक्ताम्बुजवासिनी विलसिनी चण्डांशु तेजस्विनी।


या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी भारती मनोह्लादिनी ॥ या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोश्च या गेहिनी। सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च प‌द्मावती ॥



(भावार्थ: जो लाल कमल पर विराजमान हैं, जिनका तेज महान है, जो भगवान हरि की पत्नी हैं और जो समुद्र मंथन से प्रकट हुई हैं, वे माँ लक्ष्मी मेरी रक्षा करें ।)

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