सनातन वाणी • भक्ति, ज्ञान और कथा
29 Mar 2026
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स्तोत्र

श्रीमधुराष्टकम्

श्रीमद् वल्लभाचार्य रचित 'मधुराष्टकम्' भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य सौंदर्य और माधुर्य का वर्णन करने वाला सबसे लोकप्रिय स्तोत्र है। यहाँ पढ़ें मूल पाठ और हिंदी अर्थ।

श्रीमधुराष्टकम्
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॥ श्रीमधुराष्टकम् ॥

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ १ ॥

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् । चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ २ ॥

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ । नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ३ ॥

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् । रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ४ ॥

करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् । वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ५ ॥

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा । सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ६ ॥

गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् । दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ७ ॥

गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा । दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ८ ॥


॥ सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद ॥

१. उनके अधर (होठ) मधुर हैं, मुख मधुर है, नेत्र मधुर हैं और मुस्कान मधुर है। उनका हृदय मधुर है और उनकी चाल (गति) भी मधुर है। उन मधुरता के स्वामी (श्रीकृष्ण) का सब कुछ ही मधुर है।

२. उनके शब्द मधुर हैं, चरित्र (लीलाएं) मधुर हैं, उनके वस्त्र मधुर हैं और उनके शरीर की त्रिभंगी मुद्रा (बल) मधुर है। उनका चलना मधुर है और उनका घूमना (भ्रमण) मधुर है। उन मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

३. उनकी वंशी मधुर है, (चरणों की) धूलि मधुर है, उनके हाथ मधुर हैं और उनके चरण मधुर हैं। उनका नृत्य मधुर है और उनकी मित्रता (सख्य) मधुर है। उन मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

४. उनका गान मधुर है, उनका पीना मधुर है, उनका भोजन मधुर है और उनका शयन (सोना) मधुर है। उनका रूप मधुर है और उनका तिलक मधुर है। उन मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

५. उनके कार्य मधुर हैं, (भक्तों को) तारना मधुर है, (दुखों का) हरण मधुर है और उनका रमण मधुर है। उनके द्वारा उबका हुआ (निकाला गया) मधुर है और उनका शांत रहना मधुर है। उन मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

६. उनकी गुंजा (माला के दाने) मधुर हैं, उनकी माला मधुर है, उनकी यमुना मधुर है और उसकी लहरें (वीची) मधुर हैं। उनका जल मधुर है और उनका कमल मधुर है। उन मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

७. उनकी गोपियाँ मधुर हैं, उनकी लीला मधुर है, उनका संयोग (मिलना) मधुर है और उनका वियोग (मुक्त होना) मधुर है। उनका देखना मधुर है और उनका शिष्टाचार मधुर है। उन मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

८. उनके ग्वालबाल मधुर हैं, उनकी गायें मधुर हैं, उनकी लाठी मधुर है और उनकी सृष्टि मधुर है। उनका (शत्रुओं का) दलन मधुर है और उनका फल प्रदान करना मधुर है। उन मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।


महत्व, विधि और लाभ

  • महत्व: यह स्तोत्र भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति को जगाने वाला है। जहाँ अन्य स्तोत्रों में भगवान के ऐश्वर्य और डर का भाव होता है, वहीं मधुराष्टकम् केवल उनके 'सौन्दर्य' और 'माधुर्य' का गान है।

  • पाठ की विधि: इसे किसी भी समय पढ़ा जा सकता है, लेकिन शुद्ध मन से संगीत या लय (धुनी) के साथ गाने से इसका फल शीघ्र मिलता है। श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाते समय इसका पाठ करना सर्वोत्तम है।

  • लाभ:

    • इसके नियमित पाठ से मन की कड़वाहट दूर होती है और स्वभाव में मधुरता आती है।

    • मानसिक अवसाद (Depression) और चिंताओं को दूर करने के लिए यह रामबाण है।

    • भक्त को भगवान के प्रति 'गोपी भाव' (प्रेम भाव) प्राप्त होता है।

॥ इति श्रीमद्वल्लभाचार्यविरचितं मधुराष्टकं सम्पूर्णम् ॥

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