षटतिला एकादशी व्रत कथा
दान में दी मिट्टी और मिला खाली महल! 😱 जानिए षटतिला एकादशी की वो कथा जिससे मिटती है दरिद्रता। अभी पढ़ें! 👇

॥ श्री षटतिला एकादशी व्रत कथा (सम्पूर्ण वृत्तांत) ॥ 🍯🐚✨
धर्मराज युधिष्ठिर ने पूछा— "हे जनार्दन! माघ कृष्ण एकादशी का क्या नाम है और इसका क्या महत्व है? कृपा कर विस्तार से बताएं।"
भगवान श्री कृष्ण बोले— "हे युधिष्ठिर! प्राचीन काल में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह अत्यंत धर्मपरायण और व्रत-उपवास करने वाली थी। उसने कई वर्षों तक कठोर तपस्या की और कई व्रत किए, जिससे उसका शरीर अत्यंत शुद्ध और पवित्र हो गया था।"
१. दान में कमी और भगवान की परीक्षा
वह ब्राह्मणी दान तो बहुत करती थी, परंतु उसने कभी भी किसी को 'अन्न' का दान नहीं किया था। वह देवताओं की पूजा तो करती थी, लेकिन किसी भूखे को भोजन कराने में उसका मन नहीं लगता था।
भगवान विष्णु ने सोचा— "इस ब्राह्मणी ने व्रत और तपस्या से स्वर्ग का ऊंचा पद तो प्राप्त कर लिया है, लेकिन अन्न दान के बिना इसका पेट स्वर्ग में कैसे भरेगा? अन्न के बिना तृप्ति संभव नहीं है।" अतः भगवान विष्णु स्वयं एक भिक्षुक (भिखारी) का रूप धारण कर मृत्युलोक में उस ब्राह्मणी के पास पहुँचे।
२. अन्न के बदले मिट्टी का दान
भिक्षुक रूपी भगवान ने ब्राह्मणी से भिक्षा मांगी। ब्राह्मणी ने क्रोध में आकर एक मिट्टी का ढेला (Pind of earth) उठाया और भगवान के भिक्षा पात्र में डाल दिया। भगवान वह मिट्टी लेकर ही स्वर्ग लौट आए।
३. स्वर्ग में खाली महल और दरिद्रता
कुछ समय बाद ब्राह्मणी की मृत्यु हो गई और वह अपने पुण्यों के प्रभाव से विष्णु लोक (स्वर्ग) पहुँची। वहां उसे रहने के लिए सोने का एक अत्यंत भव्य महल मिला। लेकिन जैसे ही वह महल के अंदर गई, उसने देखा कि वहां खाने-पीने की कोई भी वस्तु नहीं है। महल पूरी तरह खाली था।
वह व्याकुल होकर भगवान विष्णु के पास पहुँचे और बोली— "हे प्रभु! मैंने जीवन भर आपके व्रत किए, इतनी तपस्या की, फिर भी मुझे यह खाली महल क्यों मिला? मुझे यहाँ भूख क्यों सता रही है?"
४. समाधान: षटतिला एकादशी का व्रत
भगवान विष्णु ने कहा— "हे ब्राह्मणी! तुमने व्रत तो बहुत किए, लेकिन कभी अन्न दान नहीं किया। तुमने मुझे भिक्षा में अन्न के बदले मिट्टी दी थी, इसलिए तुम्हें यह खाली महल मिला है। अब तुम अपने महल का द्वार बंद कर लो। जब देव-स्त्रियाँ तुमसे मिलने आएं, तब तुम उनसे 'षटतिला एकादशी' का विधान और महात्म्य पूछना। तभी द्वार खोलना।"
ब्राह्मणी ने वैसा ही किया। जब देव-स्त्रियाँ आईं, तो ब्राह्मणी ने उनसे षटतिला एकादशी के व्रत की विधि पूछी। उन स्त्रियों ने उसे विस्तार से व्रत का विधान बताया। ब्राह्मणी ने श्रद्धापूर्वक षटतिला एकादशी का व्रत किया।
५. अक्षय तृप्ति और रूप की प्राप्ति
व्रत के प्रभाव से उसका वह खाली महल अन्न, धन और रत्नों से भर गया। वह स्वयं भी अत्यंत सुंदर और दिव्य स्वरूप वाली हो गई। उसे वह सब कुछ मिल गया जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
॥ तिल के छह प्रकार के उपयोग (षटतिला) ॥ 📋🌿
इस व्रत में तिल का इन 6 तरीकों से प्रयोग करना अनिवार्य है:
तिल स्नान: पानी में तिल डालकर नहाना।
तिल उबटन: शरीर पर तिल का लेप लगाना।
तिल तर्पण: पितरों को तिल मिश्रित जल अर्पित करना।
तिल जल: तिल मिला हुआ जल पीना।
तिल भोजन: तिल से बने पकवानों का भोग लगाना और खाना।
तिल दान: ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को तिल दान करना।