सनातन वाणी • भक्ति, ज्ञान और कथा
06 Apr 2026
Sanatan Vani आधुनिक रूप में सनातन ज्ञान
कवच

रुद्रयामल तंत्रोक्त कालिका कवचम् (Rudrayamala Tantrokta Kalika Kavacham)

रुद्रयामल तंत्र में वर्णित कालिका कवच माँ काली का शक्तिशाली तांत्रिक रक्षा स्तोत्र है। इसके पाठ से शत्रु नाश, तांत्रिक बाधा से रक्षा, भय मुक्ति और साधना सिद्धि प्राप्त होती है।

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विनियोग

अस्य श्रीकालिकाकवचस्य भैरव ऋषिः ।
अनुष्टुप् छन्दः ।
श्री कालिका देवता ।
क्रीं बीजम् ।
ह्रीं शक्तिः ।
हूं कीलकम् ।
मम सर्वरक्षा सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥


ध्यानम्

करालवदनां घोरां मुक्तकेशीं चतुर्भुजाम् ।
कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्डमालाविभूषिताम् ॥

सद्यश्छिन्नशिरःखड्गवामोर्ध्वकराम्बुजाम् ।
अभयं वरदं चैव दक्षिणोर्ध्वकराम्बुजाम् ॥

महामेघप्रभां श्यामां तथा चैव दिगम्बराम् ।
कण्ठावसक्तमुण्डाली गलद्रुधिरचर्चिताम् ॥

कर्णावतंसितानीतशवयुग्मभयानकाम् ।
घोरदंष्ट्रां करालास्यां पीनोन्नतपयोधराम् ॥


कालिका कवचम्

भैरव उवाच —

कालिका घोररूपा च सर्वकामफलप्रदा ।
कवचं कथयिष्यामि सर्वरक्षाकरं नृणाम् ॥१॥

क्रीं बीजं मे शिरः पातु काली पातु ललाटकम् ।
ह्रीं पातु नेत्रयुगलं कर्णौ पातु सुरेश्वरी ॥२॥

दक्षिणा कालिका पातु नासिकां मे सदाऽवतु ।
वदनं पातु मे काली जिह्वां पातु कपालिनी ॥३॥

कण्ठं पातु महाकाली स्कन्धौ पातु महेश्वरी ।
भुजौ पातु चामुण्डा करौ पातु करालिनी ॥४॥

हृदयं पातु मे काली स्तनौ पातु सुरेश्वरी ।
नाभिं पातु महाकाली कटिं पातु कपालिनी ॥५॥

ऊरू पातु सदा काली जानुनी पातु सर्वदा ।
जंघे पातु महादेवी पादौ पातु करालिनी ॥६॥

पूर्वे पातु महाकाली आग्नेय्यां पातु कालिका ।
दक्षिणे पातु चामुण्डा नैऋत्यां पातु भैरवी ॥७॥

पश्चिमे पातु मे काली वायव्यां पातु सर्वदा ।
उत्तरे पातु महादेवी ऐशान्यां पातु कालिका ॥८॥

ऊर्ध्वं पातु सदा काली अधस्तात् पातु सर्वदा ।
सर्वतः पातु मां नित्यं कालिका घोररूपिणी ॥९॥

इदं कवचमज्ञात्वा यो जपेत् कालिकां नरः ।
न तस्य सिद्धिर्भवति कल्पकोटिशतैरपि ॥१०॥

यः पठेत् प्रयतो नित्यं कवचं सर्वसिद्धिदम् ।
तस्य शत्रवो नश्यन्ति सिद्धिर्भवति निश्चिता ॥११॥

॥ इति कालिका कवचम् ॥


हिंदी अर्थ (पूर्ण)

भैरव कहते हैं —
माँ कालिका घोर रूप वाली हैं और सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं।
मैं ऐसा कवच बताता हूँ जो मनुष्यों की रक्षा करने वाला है।

क्रीं बीज मंत्र मेरे सिर की रक्षा करे।
काली मेरे ललाट की रक्षा करें।
ह्रीं मंत्र मेरी आंखों की रक्षा करे।
सुरेश्वरी मेरे कानों की रक्षा करें।

दक्षिणा कालिका मेरी नाक की रक्षा करें।
काली मेरे मुख की रक्षा करें।
कपालिनी मेरी जिह्वा की रक्षा करें।

महाकाली मेरे कंठ की रक्षा करें।
महेश्वरी मेरे कंधों की रक्षा करें।
चामुंडा मेरी भुजाओं की रक्षा करें।
करालिनी मेरे हाथों की रक्षा करें।

काली मेरे हृदय की रक्षा करें।
देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें।
महाकाली मेरी नाभि की रक्षा करें।
कपालिनी मेरी कमर की रक्षा करें।

काली मेरी जांघों की रक्षा करें।
देवी मेरे घुटनों की रक्षा करें।
महादेवी मेरी टांगों की रक्षा करें।
करालिनी मेरे पैरों की रक्षा करें।

पूर्व दिशा में महाकाली रक्षा करें।
अग्नि कोण में कालिका रक्षा करें।
दक्षिण दिशा में चामुंडा रक्षा करें।
नैऋत्य दिशा में भैरवी रक्षा करें।

पश्चिम दिशा में काली रक्षा करें।
वायव्य दिशा में देवी रक्षा करें।
उत्तर दिशा में महादेवी रक्षा करें।
ईशान दिशा में कालिका रक्षा करें।

ऊपर काली रक्षा करें।
नीचे देवी रक्षा करें।
चारों ओर घोर रूप वाली कालिका रक्षा करें।

जो इस कवच को जाने बिना जप करता है
उसे सिद्धि प्राप्त नहीं होती।

जो श्रद्धा से इसका पाठ करता है
उसके शत्रु नष्ट हो जाते हैं और सिद्धि प्राप्त होती है।


पढ़ने की विधि

  1. रात्रि में स्नान करें
  2. काली माता का चित्र रखें
  3. सरसों तेल दीपक जलाएं
  4. काली कवच पढ़ें

फायदे

✔ शत्रु नाश
✔ तांत्रिक बाधा नाश
✔ भय समाप्त
✔ साधना सिद्धि
✔ सुरक्षा कवच

किसे पढ़ना चाहिए

  • काली साधक
  • तंत्र साधक
  • शत्रु से परेशान व्यक्ति
  • भयग्रस्त व्यक्ति

कब पढ़ें

✔ अमावस्या
✔ शनिवार
✔ मध्यरात्रि

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