गौरी व्रत कथा
जब जंगल में ब्राह्मण को डसा सांप! 😱 जानिए गौरी व्रत की वो चमत्कारी कथा जिसने मौत को भी हरा दिया। अभी पढ़ें! 👇

॥ श्री गौरी व्रत कथा (सम्पूर्ण वृत्तांत) ॥ 🌺✨🔱
प्राचीन काल की बात है, एक नगर में एक अत्यंत धर्मात्मा और दयालु ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। ब्राह्मण दंपति हर तरह से सुखी थे, उनके पास धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, परंतु एक ही दुख उन्हें दिन-रात सताता था— उनकी कोई संतान नहीं थी।
१. ब्राह्मण दंपति की अनन्य भक्ति
संतान प्राप्ति की इच्छा से वे दोनों भगवान शिव और माता पार्वती की कठोर तपस्या करने लगे। उनकी निस्वार्थ भक्ति देखकर माता पार्वती प्रसन्न हुईं और उन्होंने भगवान शिव से उन्हें पुत्र-रत्न देने का आग्रह किया। भगवान शिव ने कहा— "हे देवी! इनके भाग्य में संतान का सुख नहीं है, परंतु आपकी इच्छा सर्वोपरि है। मैं इन्हें दर्शन दूँगा।"
शिव जी ने ब्राह्मण को स्वप्न में दर्शन दिए और कहा— "हे ब्राह्मण! तुम्हारे नगर के बाहर जो जंगल है, वहां एक पुराने बिल्व वृक्ष के नीचे मेरी एक प्रतिमा दबी हुई है। तुम वहां जाकर उसकी पूजा करो, तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी।"
२. जंगल में तपस्या और सर्प दंश
ब्राह्मण अगले ही दिन जंगल गया और उस प्रतिमा को खोजकर उसकी सेवा करने लगा। कई दिनों तक वह घर नहीं लौटा। एक दिन जब वह पूजा के लिए फूल चुन रहा था, तब उसे एक विषैले सांप ने डस लिया। ब्राह्मण वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा।
उधर, घर पर ब्राह्मणी अत्यंत व्याकुल हो गई। उसे लगा कि उसके पति पर कोई भारी संकट आया है। उसने माता गौरी (पार्वती) का स्मरण किया और वन की ओर चल पड़ी।
३. माता गौरी का साक्षात् प्रकट होना
वन में अपने पति की ऐसी दशा देखकर ब्राह्मणी विलाप करने लगी। उसने सच्चे मन से माता गौरी की पुकार की। उसकी करुण पुकार सुनकर माता पार्वती स्वयं वहां प्रकट हुईं।
माता पार्वती ने ब्राह्मणी से कहा— "हे पुत्री! दुखी मत हो। तेरे पति ने मेरी और महादेव की अनन्य सेवा की है। तूने भी सदैव धर्म का पालन किया है। मैं तेरे पति को जीवनदान देती हूँ।" माता ने ब्राह्मण के शरीर से विष निकाल दिया और वह जीवित होकर उठ बैठा।
४. गौरी व्रत का उपदेश
माता पार्वती ने प्रसन्न होकर उन्हें एक विशेष व्रत का उपदेश दिया। उन्होंने कहा— "जो भी कन्या या स्त्री आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर पाँच दिनों तक नमक का त्याग कर मेरा (गौरी का) पूजन करेगी, उसे अखंड सौभाग्य और सुयोग्य संतान की प्राप्ति होगी।"
उस ब्राह्मण दंपति ने वह व्रत पूरी श्रद्धा से किया, जिसके फलस्वरुप उन्हें एक अत्यंत तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से यह 'गौरी व्रत' लोक में प्रसिद्ध हो गया।
॥ व्रत की विधि और नियम ॥ 📋💎
यह व्रत ५ दिनों तक चलता है, जिसे 'जया पार्वती व्रत' के रूप में भी समापन किया जाता है:
ज्वारे बोना: व्रत के पहले दिन एक पात्र में मिट्टी भरकर ज्वारे (गेहूं/जौ) बोए जाते हैं।
अलोना व्रत: इन ५ दिनों तक नमक का सेवन वर्जित होता है (इसे 'अलोना' व्रत भी कहते हैं)।
पूजन: प्रतिदिन माता गौरी की प्रतिमा या चित्र का षोडशोपचार पूजन किया जाता है।
जागरण: अंतिम दिन की रात्रि में माता के भजनों का कीर्तन और जागरण किया जाता है।
ज्वारे विसर्जन: छठे दिन सुबह पूजा के बाद उन ज्वारों को किसी नदी या जलाशय में विसर्जित कर दिया जाता है।



