बटुक भैरव कवच सम्पूर्ण पाठ, हिन्दी अर्थ, लाभ और विधि
बटुक भैरव कवच भगवान बटुक भैरव की शक्तिशाली रक्षा स्तुति है जिसका वर्णन रुद्रयामल तंत्र में मिलता है। इसका पाठ करने से भय, शत्रु, नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं और अचानक आने वाली विपत्तियों से रक्षा होती है।
बटुक भैरव कवच (सम्पूर्ण)
श्री गणेशाय नमः
श्री भैरवाय नमः
देव्युवाच
देवदेव महादेव संसारप्रियकारक।
बटुकस्य कवचं ब्रूहि मम भक्तस्य रक्षणम्॥
भैरव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं सर्वकामदम्।
बटुकस्य महादेवि सर्वरक्षाकरं नृणाम्॥
बटुको मे शिरः पातु ललाटं भैरवोऽवतु।
नेत्रे मे कालभैरवः पातु कर्णौ मे भयङ्करः॥
नासिकां पातु मे देवो वदनं बटुकोऽवतु।
जिह्वां मे कालभैरवः कण्ठं मे भैरवोऽवतु॥
स्कन्धौ मे बटुको पातु बाहू मे भैरवोऽवतु।
हस्तौ मे कालभैरवः पातु हृदयं भैरवः॥
नाभिं मे बटुको पातु कटिं मे भैरवोऽवतु।
ऊरू मे कालभैरवः पातु जानुनी भैरवः॥
जंघे मे बटुको पातु पादौ मे भैरवोऽवतु।
सर्वाङ्गं मे सदा पातु बटुको भैरवः प्रभुः॥
इदं कवचमज्ञात्वा यो जपेन्नर मूढधीः।
न सिद्धिं लभते तस्य मन्त्रस्य जपतोऽपि॥
कवचं पठित्वा तु यः जपेद्भैरवं नरः।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति भैरवस्य प्रसादतः॥
बटुक भैरव कवच हिन्दी अर्थ
प्रारम्भ अर्थ
देवी पूछती हैं — हे महादेव! बटुक भैरव का कवच बताइए जो भक्तों की रक्षा करे।
भगवान भैरव कहते हैं — हे देवी! मैं बटुक भैरव का कवच बताता हूँ जो सभी की रक्षा करने वाला है।
श्लोक अर्थ
बटुक भैरव मेरे सिर की रक्षा करें, भैरव मेरे ललाट की रक्षा करें।
कालभैरव मेरी आँखों की रक्षा करें, भयङ्कर भैरव मेरे कानों की रक्षा करें।
भगवान मेरी नाक की रक्षा करें, बटुक भैरव मेरे मुख की रक्षा करें।
कालभैरव मेरी जीभ की रक्षा करें, भैरव मेरे कंठ की रक्षा करें।
बटुक भैरव मेरे कंधों की रक्षा करें, भैरव मेरी भुजाओं की रक्षा करें।
कालभैरव मेरे हाथों की रक्षा करें, भैरव मेरे हृदय की रक्षा करें।
बटुक भैरव मेरी नाभि की रक्षा करें, भैरव मेरी कमर की रक्षा करें।
कालभैरव मेरी जंघाओं की रक्षा करें, भैरव मेरे घुटनों की रक्षा करें।
बटुक भैरव मेरी टांगों की रक्षा करें, भैरव मेरे पैरों की रक्षा करें।
भगवान बटुक भैरव मेरे पूरे शरीर की रक्षा करें।
कवच का फल
जो व्यक्ति इस कवच को जाने बिना जप करता है उसे सिद्धि नहीं मिलती।
जो इस कवच को पढ़कर भैरव मंत्र जप करता है उसे सिद्धि प्राप्त होती है।
बटुक भैरव कवच के लाभ
- शत्रु से रक्षा
- भूत प्रेत बाधा दूर
- अचानक दुर्घटना से रक्षा
- भय दूर होता है
- कोर्ट केस में सफलता
- व्यापार सुरक्षा
- नकारात्मक ऊर्जा दूर
- तंत्र बाधा समाप्त
कब पढ़ना चाहिए
- रविवार
- मंगलवार
- शनिवार
- भैरव अष्टमी
- रात में
- संकट के समय
पाठ विधि
- स्नान करें
- भैरव जी के सामने बैठें
- सरसों तेल का दीपक जलाएं
- काला तिल अर्पित करें
- कवच पढ़ें
- भैरव मंत्र जप करें
मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं॥