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Vrat Katha

सोम प्रदोष व्रत कथा

सोम प्रदोष व्रत कथा

प्राचीन समय में एक निर्धन दंपति भगवान शिव के परम भक्त थे। वे हर सोमवार को शिवजी का स्मरण करते, परंतु उनकी गरीबी दूर नहीं हो रही थी। एक दिन उन्हें एक विद्वान ब्राह्मण ने सोम प्रदोष व्रत का महत्व बताया। ब्राह्मण ने कहा कि सोमवार के प्रदोष काल में भगवान शिव का व्रत और पूजन करने से मनोकामना पूर्ण होती है और घर-परिवार में सुख आता है।

दंपति ने निश्चय किया कि वे नियमपूर्वक उपवास रखेंगे, शिवलिंग पर गंगाजल, अक्षत, चंदन और बेलपत्र चढ़ाएंगे तथा प्रदोष कथा सुनेंगे। उन्होंने वैसा ही किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया। धीरे-धीरे उनके घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी, रोग-दोष दूर हुए और संतान सुख की भी प्राप्ति हुई।

सोम प्रदोष का व्रत विशेष रूप से मानसिक शांति, वैवाहिक सुख, संतान की उन्नति और मनोकामना पूर्ति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। जो भक्त सच्चे मन से इस व्रत को करते हैं, उन पर शिवजी और माता पार्वती की कृपा बनी रहती है।