Sacred readings, devotion and scriptures in a simpler format.
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
Vrat Katha

शुक्रवार लक्ष्मी व्रत कथा

शुक्रवार लक्ष्मी व्रत कथा

शुक्रवार लक्ष्मी व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक स्त्री अपने परिवार के साथ रहती थी। वह बहुत ही धार्मिक, सरल और सदाचारी थी। वह प्रतिदिन भगवान का स्मरण करती और घर के सभी कार्य श्रद्धापूर्वक करती थी। परंतु समय के फेर से उसके घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। घर में धन की कमी रहने लगी, कलह बढ़ने लगा और परिवार में चिंता का वातावरण रहने लगा।

वह स्त्री इस स्थिति से बहुत दुःखी रहने लगी। उसने अनेक उपाय किए, परंतु कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। फिर भी उसने धैर्य नहीं छोड़ा और माता लक्ष्मी से प्रार्थना करती रही कि हे माँ, हमारे घर की दरिद्रता दूर करो, सुख-समृद्धि प्रदान करो।

एक दिन शुक्रवार के दिन वह स्त्री स्नान आदि करके बैठी थी। तभी उसके घर एक वृद्धा आई। वह वृद्धा तेजस्विनी, शांत और दिव्य प्रतीत होती थी। स्त्री ने उनका आदर किया, उन्हें आसन दिया और विनम्रतापूर्वक उनके आने का कारण पूछा।

वृद्धा ने प्रेमपूर्वक कहा, “बेटी, मैं तुम्हारे दुःख का कारण जानती हूँ। यदि तुम श्रद्धा और नियमपूर्वक शुक्रवार का लक्ष्मी व्रत करोगी, तो तुम्हारे घर की दरिद्रता दूर होगी और सुख-समृद्धि का वास होगा।”

स्त्री ने हाथ जोड़कर कहा, “माते, कृपा करके इस व्रत की विधि और महिमा बताइए।”

वृद्धा ने कहा, “शुक्रवार के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करो, स्वच्छ वस्त्र धारण करो और घर को शुद्ध एवं साफ रखो। पूजा स्थान में माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करो। धूप, दीप, पुष्प, अक्षत, रोली, फल और मिठाई अर्पित करो। माता लक्ष्मी की कथा सुनो या पढ़ो, व्रत का संकल्प लो और पूरे दिन श्रद्धा से व्रत रखो। सायंकाल पुनः माता की आरती करो और प्रसाद बाँटो।”

वृद्धा ने आगे कहा, “जो स्त्री श्रद्धा, पवित्रता और संतोष के साथ यह व्रत करती है, उसके घर में धन, धान्य, सौभाग्य और शांति की वृद्धि होती है। माँ लक्ष्मी स्वच्छता, सदाचार, सत्य, दया और संतोष से प्रसन्न होती हैं।”

यह कहकर वह वृद्धा चली गई। स्त्री समझ गई कि यह कोई साधारण स्त्री नहीं, अवश्य ही माँ लक्ष्मी की प्रेरणा से आई हैं।

अगले शुक्रवार से उसने पूरी श्रद्धा के साथ लक्ष्मी व्रत आरंभ किया। वह नियमपूर्वक घर को स्वच्छ रखती, माता लक्ष्मी का पूजन करती, कथा सुनती और आरती करती। धीरे-धीरे उसके घर की स्थिति बदलने लगी। परिवार में शांति आने लगी, आर्थिक तंगी दूर होने लगी और घर में सुख-समृद्धि का आगमन हुआ।

कुछ ही समय में उसके पति के कार्यों में उन्नति होने लगी, घर में अन्न और धन की वृद्धि हुई, और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ गया। स्त्री का विश्वास और भी दृढ़ हो गया। वह प्रत्येक शुक्रवार को विधिपूर्वक माता लक्ष्मी का व्रत करती रही।

एक दिन पड़ोस की स्त्रियों ने उससे उसके घर की समृद्धि का कारण पूछा। उसने विनम्रता से कहा, “यह सब शुक्रवार लक्ष्मी व्रत का प्रभाव है। माँ लक्ष्मी की कृपा से ही मेरे घर में सुख-शांति आई है।”

तब अन्य स्त्रियों ने भी श्रद्धा से यह व्रत करना आरंभ किया। जिन्होंने भी सच्चे मन, स्वच्छता, भक्ति और संतोष के साथ यह व्रत किया, उनके घरों में भी सुख-समृद्धि का वास होने लगा।

इस प्रकार शुक्रवार लक्ष्मी व्रत करने से घर की दरिद्रता दूर होती है, धन-धान्य की वृद्धि होती है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

जो स्त्री या पुरुष श्रद्धा, विश्वास और पवित्र मन से शुक्रवार को माता लक्ष्मी का व्रत करता है, उसकी उचित मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में शुभता आती है।

बोलो माता लक्ष्मी जी की जय।