Sanatan Vani • Devotion, wisdom and sacred reading
02 May 2026
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
Vrat Katha

श्री सत्यनारायण व्रत कथा

श्री सत्यनारायण व्रत कथा की संपूर्ण कथा, पूजन-विधि, व्रत का महत्व, पारण और फल जानें। यह व्रत पूर्णिमा प्रधान श्रीनारायण व्रत को रखा जाता है और सत्य, श्रद्धा, प्रसाद और श्रीनारायण की कृपा की कथा के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध माना जाता है।

Google AdSense Space

श्री सत्यनारायण व्रत कथा

श्री सत्यनारायण भगवान, श्रीहरि विष्णु का सत्यस्वरूप माने जाते हैं। इस व्रत को पूर्णिमा सहित किसी भी शुभ दिन श्रद्धा से किया जा सकता है, किन्तु पूर्णिमा, विवाह, गृहप्रवेश, संकल्प-पूर्ति और मनोकामना पूर्ण होने पर इसे विशेष रूप से किया जाता है। इस व्रत का मूल संदेश है कि मनुष्य सत्य, श्रद्धा, वचनपालन और प्रसाद-मान का पालन करे।

कथा के प्रारम्भ में देवर्षि नारद लोकों में जीवों का दुःख देखकर भगवान विष्णु से उपाय पूछते हैं। तब भगवान सत्यनारायण व्रत का विधान बताते हैं। आगे कथा में निर्धन ब्राह्मण, लकड़हारा, वैश्य-सद्गृहस्थ, उसकी पत्नी लीलावती और पुत्री कलावती आदि प्रसंग आते हैं। जो श्रद्धा से व्रत करता है, उसकी दरिद्रता, बाधा और दुःख दूर होते हैं; जो संकल्प करके भूल जाता है या प्रसाद का अपमान करता है, उसे कष्ट उठाना पड़ता है, पर अंततः भगवान क्षमा कर कृपा करते हैं।

पूजन में कलश, पंचामृत, तुलसी, पंचफल, नैवेद्य, गेहूँ या सूजी का शिरा/हलवा, केला और प्रसाद का विशेष महत्व है। भगवान सत्यनारायण की पूजा के बाद कथा श्रवण, आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है। परिवार सहित यह व्रत करने से घर में शांति, समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है।

इस कथा का सार यह है कि सत्य से कभी विचलित न हों, ईश्वर से किया संकल्प न भूलें, प्रसाद और पूजा का अनादर न करें और हर कार्य में श्रीहरि की कृपा मानें। श्रद्धापूर्वक किया गया श्री सत्यनारायण व्रत जीवन में सुख, यश और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

व्रत का फल

  • घर-परिवार में शांति और समृद्धि
  • मनोकामना सिद्धि और कष्टों से राहत
  • सत्य, श्रद्धा और सदाचार की स्थापना
  • भगवान नारायण की विशेष कृपा
Google AdSense Space