Sanatan Vani • Devotion, wisdom and reading
21 Mar 2026
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
Vrat Katha

श्री वैकुंठ एकादशी व्रत कथा

वैकुंठ एकादशी व्रत कथा का महत्व, कथा और पूजा विधि पढ़ें।

श्री वैकुंठ एकादशी व्रत कथा
Google AdSense Space

॥ श्री वैकुंठ एकादशी व्रत कथा ॥ 🏰✨

कथा प्रारम्भ:

पौराणिक काल में 'मुर' नामक एक अत्यंत बलशाली और भयानक असुर था। उसने अपनी शक्ति से स्वर्ग के देवताओं को पराजित कर दिया और इंद्र देव को उनके सिंहासन से हटा दिया। दुखी होकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास क्षीर सागर पहुँचे और अपनी रक्षा की गुहार लगाई।

देवताओं की पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने उस असुर का विनाश करने का निश्चय किया। भगवान और मुर असुर के बीच कई वर्षों तक भयंकर युद्ध चला। युद्ध करते-करते जब भगवान विष्णु थक गए, तो वे विश्राम करने के लिए बद्रिकाश्रम की एक गुफा (जिसे 'हिमावती' कहा जाता है) में चले गए और वहाँ योगनिद्रा में लीन हो गए।

असुर मुर भगवान का पीछा करते हुए उस गुफा तक पहुँच गया। उसने देखा कि भगवान सो रहे हैं। उसने सोचा कि यही सही मौका है भगवान का वध करने का। जैसे ही उसने प्रहार करने के लिए शस्त्र उठाया, भगवान विष्णु के शरीर से एक अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली देवी (कन्या) प्रकट हुई।

उस देवी ने मुर असुर के साथ युद्ध किया और अंत में उसका वध कर दिया। जब भगवान विष्णु की निद्रा खुली, तो उन्होंने देखा कि वह असुर मरा पड़ा है। उन्होंने उस देवी से पूछा कि "तुम कौन हो?" देवी ने उत्तर दिया— "भगवन! मैं आपकी ही शक्ति (योगमाया) हूँ और आपके शरीर से ही उत्पन्न हुई हूँ।"

भगवान विष्णु उस देवी की वीरता से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा— "तुम मार्गशीर्ष मास की एकादशी तिथि को प्रकट हुई हो, इसलिए तुम्हारा नाम 'एकादशी' होगा। जो मनुष्य आज के दिन व्रत करेगा, उसके सभी पाप नष्ट हो जाएँगे और उसे मेरे परम धाम 'वैकुंठ' की प्राप्ति होगी।"

तभी से इस दिन को वैकुंठ एकादशी के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन वैकुंठ के द्वार भक्तों के लिए खुले रहते हैं।


॥ व्रत के नियम और पूजन विधि ॥ 📋🌿

  1. उपवास का प्रकार: यह व्रत पूर्णतः निराहार या फलाहारी रखा जाता है। दक्षिण भारत के मंदिरों में इस दिन 'वैकुंठ द्वार' (विशेष दरवाजा) से निकलने की परंपरा है।

  2. विष्णु पूजन: भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, तुलसी दल, चन्दन और पुष्प अर्पित करें।

  3. मौन और ध्यान: इस दिन मौन रहकर भगवान के स्वरूप का ध्यान करना अत्यंत लाभकारी होता है।

  4. रात्रि जागरण: रात्रि के समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना और दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

  5. द्वादशी पारण: अगले दिन सूर्योदय के बाद ब्राह्मण को भोजन या दान देकर व्रत का पारण करें।


॥ वैकुंठ एकादशी का धार्मिक महत्व ॥ 🔱🌟

  • स्वर्ग का द्वार: ऐसी मान्यता है कि इस दिन वैकुंठ के द्वार खुले रहते हैं, अतः इस दिन प्राण त्यागने वाले या व्रत करने वाले व्यक्ति को सीधे मोक्ष मिलता है।

  • असुरों पर विजय: यह व्रत हमारे भीतर की आसुरी प्रवृत्तियों (बुराइयों) पर विजय का प्रतीक है।

  • दशमी से नियम: इस व्रत के नियम दशमी की रात से ही शुरू हो जाते हैं, जहाँ तामसिक भोजन का त्याग करना होता है।


॥ व्रत के लाभ ॥ 💎🌈

  • मोक्ष की प्राप्ति: यह एकादशी मनुष्य को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर वैकुंठ लोक भेजती है।

  • संकटों का नाश: जिस प्रकार मुर असुर का नाश हुआ, उसी प्रकार भक्तों के जीवन के बड़े से बड़े शत्रुओं और कष्टों का अंत होता है।

  • मानसिक शांति: श्रद्धापूर्वक व्रत करने से मन शुद्ध होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

Google AdSense Space