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02 May 2026
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Vrat Katha

श्रावण मास शिव व्रत कथा

श्रावण मास शिव व्रत कथा का महत्व, पौराणिक कथा, पूजा विधि और व्रत का फल विस्तार से पढ़ें।

श्रावण मास शिव व्रत कथा
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॥ सम्पूर्ण पौराणिक एवं वैदिक कथा ॥ 🔱📖

प्रथम भाग: शिव-शक्ति पुनर्मिलन (शिव पुराण आधारित)

सती का देह त्याग और महादेव का वैराग्य: प्राचीन काल में दक्ष प्रजापति की पुत्री सती ने अपने पिता द्वारा महादेव के अपमान से दुखी होकर योगशक्ति से अग्नि प्रकट की और अपने प्राण त्याग दिए। महादेव सती के विछोह में व्याकुल होकर घोर वैराग्य में चले गए। उन्होंने सृष्टि के समस्त कार्यों से मुख मोड़ लिया और हिमालय के एकांत कंदराओं में समाधिस्थ हो गए। पूरी सृष्टि शिव के अभाव में शक्तिहीन होने लगी।

माता पार्वती का जन्म और नारद का उपदेश: वही सती कालांतर में पर्वतराज हिमालय और मैना की पुत्री 'पार्वती' के रूप में प्रकट हुईं। जब वे विवाह योग्य हुईं, तो देवर्षि नारद ने पर्वतराज को बताया कि उनकी पुत्री का विवाह केवल महादेव से ही हो सकता है, परंतु इसके लिए उन्हें घोर तपस्या करनी होगी।

पार्वती की घोर तपस्या और सावन का महत्व: माता पार्वती ने महादेव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया। उन्होंने अन्न त्याग दिया और वर्षों तक केवल वायु और जल पर जीवित रहीं। अंत में, श्रावण मास में उन्होंने अपनी तपस्या की पराकाष्ठा को छुआ। सावन की शीतल वर्षा में भी वे पंचतत्वों के बीच बैठकर शिव नाम जपती रहीं। उनकी इस कठोर भक्ति को देख महादेव का आसन डोल गया।

महादेव द्वारा परीक्षा और मिलन: शिव जी ने एक वृद्ध ब्राह्मण (बटुक) का रूप धरकर पार्वती की परीक्षा ली और महादेव की निंदा की। पार्वती ने क्रोधित होकर ब्राह्मण को वहां से चले जाने को कहा और शिव के प्रति अपना अडिग प्रेम प्रकट किया। पार्वती का दृढ़ संकल्प देख महादेव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और बोले— "हे देवी! आज से मैं तुम्हारी तपस्या द्वारा खरीदा हुआ तुम्हारा दास हूँ।" सावन के इसी पावन काल में शिव-शक्ति का मिलन निश्चित हुआ, इसीलिए यह मास महादेव को प्राणों से भी प्रिय है।


द्वितीय भाग: अमरावती के व्यापारी की कथा (सोमवार व्रत कथा)

व्यापारी का दुख और शिव की करुणा: एक समय की बात है, अमरावती नगरी में एक अत्यंत वैभवशाली व्यापारी रहता था। उसके पास धन-धान्य की कमी न थी, परंतु संतान न होने के कारण वह निरंतर दुखी रहता था। वह सावन के प्रत्येक सोमवार को श्रद्धापूर्वक व्रत रखता और शिव मंदिर में दीप प्रज्वलित करता था। उसकी भक्ति देख माता पार्वती ने शिव जी से उसे संतान सुख देने की प्रार्थना की। महादेव ने कहा— "देवी! इसके प्रारब्ध में संतान नहीं है, और यदि इसे पुत्र प्राप्त हुआ भी, तो वह केवल १२ वर्ष की अल्पायु पाएगा।" माता के बार-बार आग्रह पर महादेव ने व्यापारी को पुत्र प्राप्ति का वरदान दे दिया।

पुत्र का जन्म और काशी यात्रा: एक वर्ष के भीतर व्यापारी के घर एक अत्यंत सुंदर पुत्र ने जन्म लिया। व्यापारी प्रसन्न था, परंतु अल्पायु के ज्ञान के कारण वह शिव भक्ति में और लीन हो गया। जब बालक ११ वर्ष का हुआ, तो व्यापारी ने उसे शिक्षा प्राप्त करने के लिए काशी भेजने का निर्णय लिया। उसने बालक के मामा को साथ भेजा और आदेश दिया— "मार्ग में जहां भी विश्राम करो, वहां यज्ञ करना और ब्राह्मणों को भोजन कराना।"

अधूरा विवाह और यमराज का आगमन: रास्ते में एक नगर के राजा की पुत्री का विवाह था। राजकुमार काना (एक आँख से अंधा) था, इसलिए राजा ने छल से व्यापारी के पुत्र को दूल्हा बना दिया। बालक ने विवाह के उपरांत राजकुमारी के पल्ले पर लिख दिया— "तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है, पर तुम्हें जिस राजकुमार के साथ भेजा जाएगा, वह काना है।" राजकुमारी ने जाने से मना कर दिया और बालक अपने मामा के साथ काशी चला गया।

मृत्यु पर विजय और शिव कृपा: काशी में बालक की आयु के १२ वर्ष पूर्ण हुए। जिस दिन उसकी मृत्यु निश्चित थी, उस दिन घर में यज्ञ हो रहा था। बालक की तबीयत खराब हुई और वह शयनकक्ष में लेट गया। यमदूत उसके प्राण लेने आए, परंतु बालक का हाथ शिव की मूर्ति पर था और वह 'ॐ नमः शिवाय' जप रहा था। माता पार्वती ने कैलाश से यह देखा और व्याकुल होकर शिव जी से कहा— "हे प्राणनाथ! यदि इस बालक की मृत्यु हुई, तो इसके माता-पिता प्राण त्याग देंगे।" महादेव ने उस बालक को सावन सोमवार व्रत के पुण्य प्रताप से दीर्घायु प्रदान की। बालक जीवित हो उठा और अपनी पत्नी (राजकुमारी) को लेकर ससम्मान अपने नगर लौटा। व्यापारी का घर खुशियों से भर गया।


॥ व्रत की फलश्रुति एवं लाभ ॥ ✨💰

  1. सर्वकार्य सिद्धि: जो मनुष्य इस कथा को भक्तिपूर्वक पढ़ता है, उसके अटके हुए कार्य महादेव की कृपा से सिद्ध हो जाते हैं।

  2. संतान सुख: निःसंतान दंपत्तियों को गुणवान संतान की प्राप्ति होती है।

  3. रोग मुक्ति: 'महामृत्युंजय' और सावन सोमवार व्रत से असाध्य रोगों का नाश होता है।

  4. सौभाग्य: स्त्रियों को अखंड सौभाग्य और कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है।

॥ श्रावण मास व्रत: महत्व, नियम एवं विधि ॥ 🕉️🙏

श्रावण मास में महादेव का पूजन समस्त कामनाओं को सिद्ध करने वाला है। स्कन्द पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति सावन में एक समय भोजन करके या निराहार रहकर शिव की आराधना करता है, उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है।

व्रत के नियम और विधि (Vedic Rituals):

  • ब्रह्म मुहूर्त: सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदियों या शुद्ध जल से स्नान करें।

  • पवित्रता: सफेद या केसरिया वस्त्र धारण करें। मन में 'नमः शिवाय' का जाप निरंतर चलता रहे।

  • पूजन सामग्री: गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), भस्म, चंदन, बेलपत्र (बिना छेद वाले), धतूरा, शमी के पत्ते, भांग, और इत्र।

  • अभिषेक: शिवलिंग पर 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' पढ़ते हुए जल और पंचामृत की धारा अर्पित करें।

  • दान: ब्राह्मणों को भोजन, गुड़, घी और काले तिल का दान अत्यंत फलदायी है।

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