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23 Mar 2026
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श्री शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम्

नम: शिवाय" का दिव्य रहस्य! 🔱 शिव पंचाक्षर स्तोत्र से पाएं महादेव की कृपा और मोक्ष का सरल मार्ग। अभी पढ़ें! 👇

श्री शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम्
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श्री शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम्


नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय॥१॥

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नम: शिवाय॥२॥

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम: शिवाय॥३॥

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नम: शिवाय॥४॥


यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय। दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नम: शिवाय॥५॥


पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं य: पठेच्छिवसंनिधौ। शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥





॥ सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद ॥ 📖🙏

१. जिनके कण्ठ में साँपों का हार है, जिनके तीन नेत्र हैं, जो भस्म को अंगराग (उबटन) के रूप में लगाते हैं, जो महान ऐश्वर्यशाली (महेश्वर) हैं, जो नित्य, शुद्ध और दिगम्बर (आकाश रूपी वस्त्र वाले) हैं, उन 'न' अक्षर स्वरूप शिव को नमस्कार है।

२. जो गंगा जी के जल और चंदन से चर्चित हैं, जो नन्दीश्वर तथा प्रमथगणों के स्वामी हैं, जो मंदार और अन्य दिव्य पुष्पों द्वारा भली-भाँति पूजे जाते हैं, उन 'म' अक्षर स्वरूप शिव को नमस्कार है।

३. जो स्वयं कल्याण स्वरूप (शिव) हैं, जो माता पार्वती के कमल रूपी मुख को विकसित करने के लिए सूर्य के समान हैं, जिन्होंने दक्ष के यज्ञ का विनाश किया था, जिनका कण्ठ नीला है और जिनके ध्वज पर बैल (वृष) का चिह्न है, उन 'शि' अक्षर स्वरूप शिव को नमस्कार है।

४. वसिष्ठ, अगस्त्य और गौतम जैसे श्रेष्ठ मुनियों तथा देवताओं ने जिनके मस्तक की अर्चना की है, सूर्य, चंद्रमा और अग्नि जिनके तीन नेत्र हैं, उन 'व' अक्षर स्वरूप शिव को नमस्कार है।

५. जो साक्षात् यज्ञ स्वरूप हैं, जो जटा धारण करने वाले हैं, जिनके हाथ में पिनाक धनुष है, जो सनातन (अनादि) हैं, जो दिव्य और दिगम्बर देव हैं, उन 'य' अक्षर स्वरूप शिव को नमस्कार है।

६. (फलश्रुति): जो मनुष्य भगवान शिव के सान्निध्य में इस पवित्र 'पंचाक्षर स्तोत्र' का पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और वहां भगवान शिव के साथ आनंदित होता है।


स्तोत्र के लाभ (Benefits):

  • पाप मुक्ति: इसके पाठ से जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है।

  • शिवलोक प्राप्ति: फलश्रुति के अनुसार, जो इसका पाठ शिव के सान्निध्य में करता है, वह शिवलोक को प्राप्त होता है।

  • मानसिक शांति: 'नम: शिवाय' के पांच अक्षरों का ध्यान एकाग्रता और मानसिक बल बढ़ाता है।

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