Sanatan Vani • Devotion, wisdom and sacred reading
02 May 2026
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
Vrat Katha

पुरुषोत्तम मास व्रत कथा

पुरुषोत्तम मास व्रत कथा की संपूर्ण कथा, पूजन-विधि, व्रत का महत्व, पारण और फल जानें। यह व्रत अधिक मास को रखा जाता है और अधिक मास में श्रीपुरुषोत्तम की उपासना और पुण्यफल के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध माना जाता है।

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पुरुषोत्तम मास व्रत कथा

जब चन्द्रमास और सौरमास के संतुलन हेतु अतिरिक्त मास आता है, तब उसे अधिक मास कहा जाता है। भगवान विष्णु ने इस उपेक्षित मास को अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास बनाया। इसी कारण यह मास श्रीहरि-उपासना, जप, दान, कथा, गीता-पाठ, दीपदान और व्रत के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

कथा के अनुसार अधिक मास को अन्य महीनों ने हीन समझकर तिरस्कृत किया। दुखी होकर वह भगवान विष्णु की शरण में पहुँचा। तब श्रीहरि ने करुणा कर उसे अपना सर्वोत्तम नाम “पुरुषोत्तम” दिया और कहा कि जो भी इस मास में व्रत, भक्ति, दान, कथा और सत्कर्म करेगा उसे अनेक गुना पुण्य प्राप्त होगा। तब से यह मास साधना, प्रायश्चित और संकल्प सिद्धि का विशेष समय माना जाता है।

पुरुषोत्तम मास में प्रातःस्नान, विष्णुसहस्रनाम, गीता-पाठ, तुलसी-सेवा, दान, ब्रह्मचर्य, सात्त्विक आहार और हरिनाम-स्मरण का बहुत महत्व है। यह व्रत जीवन को अनुशासित करता है और पिछले पापों का शमन करने वाला माना जाता है।

पुरुषोत्तम मास व्रत का फल

  • अधिक पुण्य और संकल्प-सिद्धि
  • प्रायश्चित, तप और भक्ति की वृद्धि
  • श्रीविष्णु की विशेष कृपा
  • जीवन में शांति, संयम और आध्यात्मिक प्रगति
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