Sanatan Vani • Devotion, wisdom and sacred reading
08 May 2026
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
Vrat Katha

परमा एकादशी व्रत कथा

निर्धन ब्राह्मण कैसे बना कुबेर जैसा अमीर? 😱 जानिए परमा एकादशी का वो दुर्लभ व्रत जो ३ साल में एक बार आता है। अभी पढ़ें! 👇

परमा एकादशी व्रत कथा
Google AdSense Space

॥ श्री परमा एकादशी व्रत कथा (सम्पूर्ण वृत्तांत) ॥ 🐚✨🍯

धर्मराज युधिष्ठिर ने पूछा— "हे जनार्दन! अब आप कृपा करके अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का महात्म्य बताएं। इसका नाम क्या है और इसकी विधि क्या है?"

भगवान श्री कृष्ण बोले— "हे युधिष्ठिर! इस एकादशी का नाम 'परमा एकादशी' है। यह दुर्लभ व्रत दरिद्रता का नाश करने वाला और उत्तम गति देने वाला है। इसकी विधि वही है जो अन्य एकादशियों की है, परंतु इसमें 'पंचरात्र' (पांच दिन) व्रत का विशेष महत्व है। अब आप इसकी पौराणिक कथा सुनें।"

१. सुमेधा ब्राह्मण और पवित्र की दरिद्रता

प्राचीन काल में 'काम्पिल्य' नगरी में सुमेधा नामक एक अत्यंत धर्मात्मा ब्राह्मण रहता था। उनकी पत्नी का नाम 'पवित्रा' था, जो नाम के अनुरूप ही अत्यंत पतिव्रता और शीलवान थी। सुमेधा और पवित्रा अत्यंत गरीब थे। उनके पास न ठीक से रहने को घर था, न ही पर्याप्त भोजन।

ब्राह्मण सुमेधा भिक्षा मांगकर अपना गुजारा करते थे, परंतु कई बार उन्हें दिन भर भिक्षा नहीं मिलती थी। उनकी पत्नी पवित्रा इतनी महान थी कि वह खुद भूखी रह जाती, लेकिन आए हुए अतिथि को भोजन अवश्य कराती थी।

२. पवित्रा की सलाह और सुमेधा का धैर्य

एक दिन अपनी दरिद्रता से दुखी होकर सुमेधा ने अपनी पत्नी से कहा— "हे प्रिये! यहाँ रहकर भिक्षा मांगना अब कठिन हो गया है। मुझे धन कमाने के लिए परदेश जाना चाहिए।"

पवित्रा ने हाथ जोड़कर कहा— "हे स्वामी! धन और वैभव मनुष्य को पूर्व जन्म के कर्मों और भाग्य से ही प्राप्त होता है। आप कहीं भी जाएं, जो भाग्य में है वही मिलेगा। इसलिए धैर्य रखें और प्रभु पर विश्वास करें।" सुमेधा अपनी पत्नी की बात मानकर रुक गए।

३. कौण्डिन्य ऋषि का आगमन और समाधान

कुछ समय बाद उनके घर कौण्डिन्य ऋषि पधारे। सुमेधा और पवित्रा ने उनका बड़े प्रेम से स्वागत किया और अपना आधा भोजन उन्हें दे दिया। ऋषि उनकी सेवा से अत्यंत प्रसन्न हुए। सुमेधा ने ऋषि से पूछा— "हे ऋषिवर! हमारी दरिद्रता दूर करने का कोई सरल उपाय बताएं।"

ऋषि बोले— "हे ब्राह्मण! अधिक मास के कृष्ण पक्ष की 'परमा एकादशी' का व्रत करो। यह व्रत दरिद्रता रूपी हाथी के लिए सिंह के समान है। भगवान विष्णु ने स्वयं इस व्रत की महिमा बताई है। यदि संभव हो, तो इसी एकादशी से शुरू करके पांच दिनों तक (पंचरात्र व्रत) निराहार रहकर पूजा करो, इससे कुबेर भी प्रसन्न हो जाते हैं।"

४. पंचरात्र व्रत और कुबेर की कृपा

सुमेधा और पवित्रा ने ऋषि के बताए अनुसार 'परमा एकादशी' का पांच दिनों का कठिन व्रत किया। उन्होंने पूर्ण श्रद्धा से भगवान विष्णु का पूजन किया और रात्रि जागरण किया।

व्रत पूर्ण होने के बाद, एक दिन उनके घर के बाहर एक राजकुमार आया। उसने सुमेधा की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें एक भव्य महल, बहुत सारी जमीन और स्वर्ण मुद्राएं दान में दीं। भगवान विष्णु और कुबेर देव की कृपा से उनकी सारी दरिद्रता पल भर में समाप्त हो गई। वे दोनों सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर अंत में विष्णुलोक को सिधारे।


॥ व्रत का महत्व और लाभ ॥ 📋💎

मुख्य विशेषताआध्यात्मिक लाभ
दुर्लभतायह व्रत ३ साल में एक बार आता है, इसलिए इसका फल अन्य व्रतों से अधिक है।
दरिद्रता का नाशयह व्रत निर्धन को धनवान और पापी को पुण्यवान बनाने की शक्ति रखता है।
पंचरात्र महत्वएकादशी से अमावस्या तक पांच दिन का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।
Google AdSense Space