Sanatan Vani • Devotion, wisdom and reading
06 Apr 2026
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
Stotra

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माँ दुर्गा की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसका पाठ करने से शत्रु नाश, भय से मुक्ति, साहस, शक्ति और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

Google AdSense Space

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र (मूल पाठ)

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते ।
गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ॥१॥

भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२॥

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते ।
त्रिभुवनपोषिणि शंकरतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते ॥३॥

धनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥४॥

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्बवनप्रियवासिनि हासरते ।
शिखरिशिरोमणि तुङ्गहिमालयशृङ्गनिजालयमध्यगते ॥५॥

मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥६॥

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते ।
रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ॥७॥

निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥८॥

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते ।
चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते ॥९॥

दुरितदुरीह दुराशय दुर्मति दानवदूत कृतान्तमते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१०॥

अयि शरणागत वैरिवधूवर वीरवराभय दायकरे ।
त्रिभुवनमस्तक शूलविरोधि शिरोधिकृतामल शूलकरे ॥११॥

दुमिदुमितामर दुन्दुभिनाद महोमुखरीकृत दिङ्मकरे ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१२॥

अयि निजहुङ्कृति मात्र निराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते ।
समरविशोषित शोणितबीज समुद्भव शोणितबीज लते ॥१३॥

शिवशिव शुम्भ निशुम्भ महाहव तर्पित भूतपिशाचरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१४॥

धनुरनुषङ्ग रणक्षणसंग परिष्फुरदङ्ग नटत्कटके ।
कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हतावटक ॥१५॥

कृतचतुरंग बलक्षितिरंग घटद्बहुरंग रटद्बटुके ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१६॥


हिंदी अर्थ (पूर्ण)

हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री!
आप सम्पूर्ण पृथ्वी को आनंद देने वाली हैं और समस्त संसार आपका गुणगान करता है।

हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा!
आप शिव परिवार की अधिष्ठात्री और जगत की रक्षक हैं।

आप देवताओं पर कृपा बरसाती हैं और दुष्टों का नाश करती हैं।
तीनों लोकों का पालन करती हैं और पापों को नष्ट करती हैं।

आपने दानवों का नाश किया, दुष्टों का अभिमान तोड़ा और संसार की रक्षा की।
हे जगदम्बे! आप हिमालय पर्वत पर निवास करती हैं।

आपने मधु-कैटभ का वध किया और दुष्ट शक्तियों का नाश किया।
आप शत्रुओं का नाश करने वाली हैं।

आपने युद्ध में हाथियों और दानवों का संहार किया।
आपकी भुजाओं की शक्ति से दुष्टों का विनाश हुआ।

आपने धूम्रलोचन, शुम्भ और निशुम्भ जैसे दैत्यों का संहार किया।
आप युद्ध में देवताओं को विजय दिलाने वाली हैं।

आप शरण में आने वालों को अभय देती हैं और शत्रुओं का नाश करती हैं।
आपकी जय-जयकार से दिशाएँ गूँज उठती हैं।

आपकी हुंकार से दानव नष्ट हो जाते हैं।
आप रक्तबीज का संहार करने वाली हैं।

आप देवताओं की रक्षा करती हैं और संसार का पालन करती हैं।
हे महिषासुर मर्दिनी! आपकी जय हो।


महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र पढ़ने की विधि

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें
  2. माँ दुर्गा का चित्र रखें
  3. दीपक जलाएं
  4. लाल पुष्प अर्पित करें
  5. स्तोत्र का पाठ करें
  6. अंत में प्रार्थना करें

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र पढ़ने के फायदे

✔ शत्रु नाश
✔ भय समाप्त
✔ साहस बढ़ता है
✔ शक्ति प्राप्त होती है
✔ नकारात्मक ऊर्जा दूर
✔ कार्य सिद्धि
✔ देवी कृपा
✔ सफलता प्राप्ति
✔ मानसिक शक्ति


किसे पढ़ना चाहिए

  • डर या भय वाले लोग
  • शत्रु से परेशान व्यक्ति
  • साहस बढ़ाना चाहते हों
  • देवी साधना करने वाले
  • नवरात्रि साधक
  • सफलता चाहने वाले
  • मानसिक तनाव वाले

कब पढ़ें

✔ नवरात्रि
✔ रोज सुबह
✔ अष्टमी
✔ नवमी
✔ शुक्रवार
✔ दुर्गा पूजा में

Google AdSense Space