Sanatan Vani • Devotion, wisdom and reading
07 Apr 2026
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
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लिङ्गाष्टकम् -हिन्दी अर्थ, लाभ और पाठ विधि

लिङ्गाष्टकम् भगवान शिव के शिवलिंग स्वरूप की स्तुति है। इसका पाठ करने से पापों का नाश, कष्टों से मुक्ति और शिव कृपा प्राप्त होती है। यह आठ श्लोकों का प्रसिद्ध स्तोत्र है जिसका नियमित पाठ अत्यंत शुभ माना गया है।

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लिङ्गाष्टकम् (सम्पूर्ण पाठ)

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं
निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्।
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥1॥

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं
कामदहनकरुणाकरलिङ्गम्।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥2॥

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं
बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्।
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥3॥

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं
फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम्।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥4॥

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं
पङ्कजहारसुसोभितलिङ्गम्।
संचितपापविनाशनलिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥5॥

देवगणार्चितसेवितलिङ्गं
भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम्।
दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥6॥

अष्टदलोपरीवेष्टितलिङ्गं
सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम्।
अष्टदरिद्रविनाशनलिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥7॥

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं
सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम्।
परात्परं परमात्मकलिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥8॥


लिङ्गाष्टकम् फलश्रुति

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥


लिङ्गाष्टकम् हिन्दी अर्थ

श्लोक 1 अर्थ

जिस शिवलिंग की ब्रह्मा, विष्णु और देवता पूजा करते हैं, जो निर्मल और तेजस्वी है, जो जन्म-मृत्यु के दुःखों को दूर करता है — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 2 अर्थ

जिस शिवलिंग की देवता और ऋषि पूजा करते हैं, जो कामदेव को भस्म करने वाले और करुणामय हैं, जिसने रावण का अहंकार नष्ट किया — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 3 अर्थ

जो सुगंधित द्रव्यों से अभिषिक्त है, बुद्धि को बढ़ाने वाला है, सिद्ध, देव और असुर भी जिसकी पूजा करते हैं — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 4 अर्थ

जो स्वर्ण और रत्नों से अलंकृत है, सर्प से सुशोभित है, जिसने दक्ष यज्ञ का विनाश किया — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 5 अर्थ

जो कुमकुम और चंदन से पूजित है, कमलमाला से शोभित है, संचित पापों का नाश करता है — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 6 अर्थ

जिस शिवलिंग की देवगण पूजा करते हैं, जो भक्तिभाव से पूजित है, करोड़ सूर्यों के समान तेजस्वी है — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 7 अर्थ

जो अष्टदल कमल पर स्थित है, सृष्टि का कारण है, आठ प्रकार की दरिद्रता का नाश करता है — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 8 अर्थ

जिस शिवलिंग की देवगुरु और देवता पूजा करते हैं, जो परमात्मा स्वरूप है — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।


लिङ्गाष्टकम् के लाभ

  • पापों का नाश होता है
  • दरिद्रता दूर होती है
  • शिव कृपा प्राप्त होती है
  • मन शांत होता है
  • बाधाएँ दूर होती हैं
  • धन की वृद्धि होती है
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है

कब पढ़ना चाहिए

  • सोमवार
  • शिवरात्रि
  • प्रदोष काल
  • सावन महीना
  • सुबह स्नान के बाद
  • शिवलिंग के सामने

पाठ विधि

  1. स्नान करें
  2. शिवलिंग पर जल चढ़ाएं
  3. बिल्वपत्र चढ़ाएं
  4. लिङ्गाष्टकम् पढ़ें
  5. ॐ नमः शिवाय जप करें

कितनी बार पढ़ें

  • सामान्य: 1 बार
  • इच्छा पूर्ति: 3 बार
  • विशेष साधना: 11 बार




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