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Vrat Katha

गुरु प्रदोष व्रत कथा

गुरु प्रदोष व्रत कथा

एक राज्य में एक धर्मनिष्ठ दंपति को संतान की इच्छा थी, परंतु अनेक प्रयत्नों के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली। वे निराश होकर एक महात्मा के पास गए। महात्मा ने उन्हें गुरुवार के प्रदोष काल में भगवान शिव-पार्वती की पूजा और व्रत करने का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरु प्रदोष व्रत ज्ञान, कुल-वृद्धि, सद्गति और गुरु-कृपा देने वाला होता है।

दंपति ने श्रद्धा और संयम से गुरु प्रदोष व्रत प्रारंभ किया। वे पीले पुष्प, फल, दीप और नैवेद्य लेकर शिव मंदिर गए। कथा सुनी, ब्राह्मणों को दान दिया और अंत में शिवजी से प्रार्थना की। कुछ समय पश्चात उनकी मनोकामना पूर्ण हुई। घर में सुख-समृद्धि आई और परिवार में धर्म, ज्ञान तथा संतोष का वातावरण बन गया।

गुरु प्रदोष व्रत से ज्ञान, संतान-सुख, कुल की उन्नति और शुभ फल प्राप्त होते हैं। जो लोग सच्चे मन से यह व्रत करते हैं, उन्हें गुरुजन का आशीर्वाद और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।