Sanatan Vani • Devotion, wisdom and reading
06 Apr 2026
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
Stotra

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र भगवान विष्णु की स्तुति है जिसे संकट, भय, रोग और कठिन परिस्थितियों से मुक्ति के लिए पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र श्रीमद्भागवत महापुराण से लिया गया है और अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

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🕉️ गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र (पूर्ण मूल पाठ)

(श्रीमद्भागवत महापुराण — अष्टम स्कंध, अध्याय 3)

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

श्री शुक उवाच —
एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि ।
जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम् ॥ १ ॥

श्री गजेन्द्र उवाच —

ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम् ।
पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ॥ २ ॥

यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयम् ।
योऽस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम् ॥ ३ ॥

यः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितं
क्वचिद्विभातं क्व च तत् तिरोहितम् ।
अविद्धदृक् साक्ष्युभयं तदीक्षते
स आत्ममूलोऽवतु मां परात्परः ॥ ४ ॥

कालेन पंचत्वमितेषु कृत्स्नशो
लोकेषु पालेषु च सर्वहेतुषु ।
तमस्तदासीद् गहनं गभीरं
यस्तस्य पारेऽभिविराजते विभुः ॥ ५ ॥

न यस्य देवा ऋषयः पदं विदुः
जंतुर्न पुनः कोऽपि च विद्महे ।
यथा नटस्याकृतिभिर्विचेष्टतो
दुरत्ययानुक्रमणः स मा अवतु ॥ ६ ॥

दिदृक्षवो यस्य पदं सुमंगलं
विमुक्तसङ्गा मुनयः सुसाधवः ।
चरन्त्यलोकव्रतमप्रमत्तं
वनं पुनन्ति सदा स मे गतिः ॥ ७ ॥

न विद्यते यस्य च जन्म कर्म वा
न नाम रूपे गुण दोष एव वा ।
तथापि लोकाप्यय सम्भवाय यः
स्वमायया तान्यनुकालमृच्छति ॥ ८ ॥

तस्मै नमः परेशाय ब्रह्मणेऽनन्तशक्तये ।
अरूपायोरुरूपाय नम आश्चर्यकर्मणे ॥ ९ ॥

नम आत्मप्रदीपाय साक्षिणे परमात्मने ।
नमो गिरां विदूराय मनसश्चेतसामपि ॥ १० ॥

सत्त्वेन प्रतिलभ्याय नैष्कर्म्येण विपश्चिता ।
नमः कैवल्यनाथाय निर्वाणसुखसंविदे ॥ ११ ॥

नमः शान्ताय घोराय मूढाय गुणधर्मिणे ।
निर्विशेषाय साम्याय नमो ज्ञानघनाय च ॥ १२ ॥

क्षेत्रज्ञाय नमस्तुभ्यं सर्वाध्यक्षाय साक्षिणे ।
पुरुषायात्ममूलाय मूलप्रकृतये नमः ॥ १३ ॥

सर्वेन्द्रियगुणद्रष्ट्रे सर्वप्रत्ययहेतवे ।
असताच्छाययोक्ताय सदाभासाय ते नमः ॥ १४ ॥

नमो नमस्तेऽखिलकारणाय
निष्कारणायाद्भुतकारणाय ।
सर्वागमाम्नायमहर्णवाय
नमोऽपवर्गाय परायणाय ॥ १५ ॥

गजेन्द्र उवाच —

नमः शान्ताय घोराय मूढाय गुणधर्मिणे ।
निर्विशेषाय साम्याय नमो ज्ञानघनाय च ॥ १६ ॥

नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः
पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते ।
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते
नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व ॥ १७ ॥


📖 हिंदी अर्थ (सरल)

गजेन्द्र भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं —

हे प्रभु! आप ही सृष्टि के कारण हैं।
आप ही जगत के स्वामी हैं।
आप ही सबके भीतर स्थित परमात्मा हैं।

आप निराकार भी हैं और साकार भी हैं।
आप ही सबके रक्षक हैं।
आप ही मुझे इस संकट से बचा सकते हैं।

मैं आपकी शरण में आया हूँ।
मुझे मगरमच्छ से बचाइये।
हे नारायण! मेरी रक्षा कीजिये।


🪔 गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र पढ़ने की विधि

  1. सुबह स्नान करें
  2. भगवान विष्णु का चित्र रखें
  3. घी का दीपक जलाएं
  4. तुलसी पत्र अर्पित करें
  5. "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" बोलें
  6. गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र पढ़ें
  7. अंत में प्रार्थना करें

✨ गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र पढ़ने के फायदे

✔ संकट से मुक्ति
✔ भय समाप्त
✔ रोग दूर
✔ शत्रु बाधा समाप्त
✔ मानसिक शांति
✔ ग्रह दोष शांत
✔ अकाल मृत्यु से रक्षा
✔ भगवान विष्णु की कृपा
✔ जीवन में सफलता


🙏 किसे पढ़ना चाहिए

यह स्तोत्र पढ़ना चाहिए:

  • संकट में फंसे व्यक्ति
  • रोग से परेशान लोग
  • शत्रु से परेशान लोग
  • मानसिक तनाव वाले लोग
  • भय या चिंता वाले लोग
  • व्यापार में नुकसान वाले लोग
  • कोर्ट केस वाले लोग

🕉️ कब पढ़ें

✔ सुबह
✔ एकादशी
✔ गुरुवार
✔ संकट के समय
✔ विष्णु पूजा में


📜 गजेन्द्र मोक्ष कथा संक्षेप

गजेन्द्र हाथी सरोवर में स्नान कर रहा था।
मगरमच्छ ने पैर पकड़ लिया।

गजेन्द्र ने भगवान विष्णु को पुकारा।
यह स्तोत्र पढ़ा।

भगवान विष्णु तुरंत आए।
सुदर्शन चक्र से मगर को काट दिया।

गजेन्द्र को मोक्ष मिला।

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