Sanatan Vani • Devotion, wisdom and reading
07 Apr 2026
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
Stotra

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र (ऋषि वशिष्ठ कृत) — सम्पूर्ण पाठ, हिन्दी अर्थ, लाभ और विधि

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित भगवान शिव की प्रभावशाली स्तुति है। इसका नियमित पाठ करने से दरिद्रता, कर्ज, आर्थिक बाधाएँ और जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं। यह स्तोत्र धन, समृद्धि और शिव कृपा प्रदान करने वाला माना गया है।

Google AdSense Space

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र (सम्पूर्ण)

विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय
कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय।
कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय
दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥1॥

गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय
कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय।
गंगाधराय गजराजविमर्दनाय
दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥2॥

भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय
उग्राय दुर्गभवसागरतातरणाय।
ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय
दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥3॥

चर्माम्बराय शवभस्मविलेपनाय
भालक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय।
मञ्जीरपादयुगलाय जटाधराय
दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥4॥

पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय।
आनन्दभूमिवरदाय तमोहराय
दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥5॥

भानुप्रियाय भवसागरतातरणाय
कालान्तकाय कमलासनपूजिताय।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय
दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥6॥

रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय
नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय।
पुण्याय पुण्यचरिताय सुरार्चिताय
दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥7॥

मुक्तीश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय।
मातंगचर्मवसनाय महेश्वराय
दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥8॥


दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र — हिन्दी अर्थ

श्लोक 1 अर्थ

विश्व के स्वामी, नरक से तारने वाले, चन्द्रमा को धारण करने वाले, कपूर के समान उज्ज्वल, जटाधारी भगवान शिव को नमस्कार है, जो दरिद्रता के दुःख को जलाकर नष्ट करते हैं।

श्लोक 2 अर्थ

गौरी के प्रिय, चन्द्रमा धारण करने वाले, काल का भी अंत करने वाले, सर्प कंगन धारण करने वाले, गंगा को धारण करने वाले और गजासुर का वध करने वाले शिव को नमस्कार है, जो दरिद्रता का नाश करते हैं।

श्लोक 3 अर्थ

भक्तों को प्रिय, संसार रूपी रोग का भय दूर करने वाले, कठिन संसार से पार लगाने वाले, प्रकाशस्वरूप भगवान शिव को नमस्कार है जो दरिद्रता का नाश करते हैं।

श्लोक 4 अर्थ

चर्म वस्त्र धारण करने वाले, भस्म से विभूषित, मणि-कुण्डल से अलंकृत, जटाधारी भगवान शिव को नमस्कार है, जो दरिद्रता का नाश करते हैं।

श्लोक 5 अर्थ

पंचमुख वाले, सर्पों से अलंकृत, तीनों लोकों को शोभित करने वाले, आनंद प्रदान करने वाले भगवान शिव को नमस्कार है, जो दरिद्रता का नाश करते हैं।

श्लोक 6 अर्थ

सूर्य प्रिय, संसार सागर से पार लगाने वाले, ब्रह्मा द्वारा पूजित, तीन नेत्र वाले भगवान शिव को नमस्कार है, जो दरिद्रता का नाश करते हैं।

श्लोक 7 अर्थ

राम के प्रिय, वर देने वाले, पुण्य स्वरूप, देवताओं द्वारा पूजित भगवान शिव को नमस्कार है, जो दरिद्रता का नाश करते हैं।

श्लोक 8 अर्थ

मोक्ष देने वाले, फल प्रदान करने वाले, नंदी पर सवार, महेश्वर भगवान शिव को नमस्कार है, जो दरिद्रता का नाश करते हैं।


दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र के लाभ

  • दरिद्रता दूर होती है
  • धन की वृद्धि होती है
  • कर्ज से मुक्ति मिलती है
  • आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं
  • घर में लक्ष्मी आती है
  • शिव कृपा प्राप्त होती है
  • व्यापार में लाभ होता है
  • नौकरी में सफलता मिलती है

कब पढ़ना चाहिए

  • सोमवार
  • प्रदोष काल
  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त
  • सावन महीना
  • आर्थिक संकट के समय
  • शिवरात्रि

पाठ विधि

  1. सुबह स्नान करें
  2. शिवलिंग के सामने बैठें
  3. दीपक जलाएं
  4. जल अर्पित करें
  5. बिल्वपत्र चढ़ाएं
  6. स्तोत्र पढ़ें
  7. ॐ नमः शिवाय जप करें

कितनी बार पढ़ें

  • सामान्य: 1 बार
  • धन वृद्धि: 3 बार
  • कर्ज मुक्ति: 11 बार
  • विशेष साधना: 21 दिन
Google AdSense Space