छिन्नमस्ता कवच (Chhinnamasta Kavach)
छिन्नमस्ता कवच दशमहाविद्या की देवी छिन्नमस्ता का शक्तिशाली तांत्रिक कवच है। इसका पाठ करने से शत्रु स्तम्भन, भय नाश, तांत्रिक बाधाओं से रक्षा तथा साधना में सिद्धि प्राप्त होती है।
छिन्नमस्ता कवच
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री भैरव उवाच ॥
श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं सर्वसिद्धिदम् ।
यस्य स्मरणमात्रेण सिद्धिर्भवति निश्चिता ॥१॥
छिन्नमस्ता शिरः पातु ललाटं पातु भैरवी ।
नेत्रे पातु सदा देवी कर्णौ पातु दिगम्बरी ॥२॥
नासिकां पातु मे नित्यं वदनं पातु सर्वदा ।
जिह्वां पातु महाशक्ति कण्ठं पातु महेश्वरी ॥३॥
स्कन्धौ पातु सदा देवी भुजौ पातु महाबला ।
करौ पातु जगन्माता हृदयं पातु सर्वदा ॥४॥
स्तनौ पातु महादेवी नाभिं पातु सुरेश्वरी ।
कटिं पातु महाशक्ति ऊरू पातु परात्परा ॥५॥
जानुनी पातु मे नित्यं जंघे पातु महेश्वरी ।
पादौ पातु सदा देवी सर्वाङ्गं पातु सर्वदा ॥६॥
प्राचीं पातु महादेवी आग्नेय्यां पातु सर्वदा ।
दक्षिणे पातु वाराही नैऋत्यां पातु कालिका ॥७॥
पश्चिमे पातु मे तारा वायव्यां पातु सर्वदा ।
उत्तरे पातु मे देवी ऐशान्यां पातु भैरवी ॥८॥
ऊर्ध्वं पातु महादेवी अधस्तात् पातु सर्वदा ।
सर्वतः पातु मां नित्यं छिन्नमस्ता महेश्वरी ॥९॥
इदं कवचमज्ञात्वा यो जपेत् छिन्नमस्तकाम् ।
न तस्य जायते सिद्धिः कल्पकोटिशतैरपि ॥१०॥
यः पठेत् प्रयतो नित्यं कवचं सर्वसिद्धिदम् ।
तस्य शत्रवो नश्यन्ति सिद्धिर्भवति निश्चिता ॥११॥
॥ इति छिन्नमस्ता कवचम् ॥
हिंदी अर्थ (पूर्ण)
भैरव कहते हैं —
हे देवी! मैं तुम्हें ऐसा कवच बताता हूँ जो सभी सिद्धियों को देने वाला है।
जिसका स्मरण मात्र करने से ही साधक को सिद्धि प्राप्त होती है।
माता छिन्नमस्ता मेरे सिर की रक्षा करें।
भैरवी मेरे ललाट की रक्षा करें।
देवी मेरी आंखों की रक्षा करें।
दिगम्बरी मेरे कानों की रक्षा करें।
देवी मेरी नाक की रक्षा करें।
देवी मेरे मुख की रक्षा करें।
महाशक्ति मेरी जिह्वा की रक्षा करें।
महेश्वरी मेरे कंठ की रक्षा करें।
देवी मेरे कंधों की रक्षा करें।
महाबला मेरी भुजाओं की रक्षा करें।
जगन्माता मेरे हाथों की रक्षा करें।
देवी मेरे हृदय की रक्षा करें।
महादेवी मेरे वक्ष की रक्षा करें।
सुरेश्वरी मेरी नाभि की रक्षा करें।
महाशक्ति मेरी कमर की रक्षा करें।
परात्परा मेरी जांघों की रक्षा करें।
देवी मेरे घुटनों की रक्षा करें।
महेश्वरी मेरी टांगों की रक्षा करें।
देवी मेरे पैरों की रक्षा करें।
छिन्नमस्ता मेरे पूरे शरीर की रक्षा करें।
पूर्व दिशा में देवी रक्षा करें।
अग्नि कोण में देवी रक्षा करें।
दक्षिण दिशा में वाराही रक्षा करें।
नैऋत्य दिशा में कालिका रक्षा करें।
पश्चिम दिशा में तारा रक्षा करें।
वायव्य दिशा में देवी रक्षा करें।
उत्तर दिशा में देवी रक्षा करें।
ईशान दिशा में भैरवी रक्षा करें।
ऊपर देवी रक्षा करें।
नीचे देवी रक्षा करें।
चारों ओर छिन्नमस्ता देवी रक्षा करें।
जो व्यक्ति इस कवच को जाने बिना जप करता है
उसे सिद्धि प्राप्त नहीं होती।
जो श्रद्धा से इसका पाठ करता है
उसके शत्रु नष्ट हो जाते हैं और सिद्धि प्राप्त होती है।
पढ़ने की विधि
- स्नान करें
- लाल वस्त्र पहनें
- छिन्नमस्ता देवी का चित्र रखें
- दीपक जलाएं
- कवच पढ़ें
फायदे
✔ शत्रु स्तम्भन
✔ तांत्रिक बाधा नाश
✔ भय समाप्त
✔ साधना सिद्धि
✔ सुरक्षा कवच
किसे पढ़ना चाहिए
- तंत्र साधक
- शत्रु से परेशान व्यक्ति
- भयग्रस्त व्यक्ति
- साधना करने वाले
कब पढ़ें
✔ अमावस्या
✔ अष्टमी
✔ मध्यरात्रि
✔ साधना समय