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Vrat Katha

बुध प्रदोष व्रत कथा

बुध प्रदोष व्रत कथा

एक व्यापारी का पुत्र बहुत बुद्धिमान था, परंतु उसके निर्णय अक्सर गलत सिद्ध हो जाते थे। व्यापार में हानि, वाणी में कटुता और संबंधों में दूरी बढ़ने लगी। दुखी होकर व्यापारी परिवार ने एक पंडित से परामर्श लिया। पंडित ने बताया कि बुध प्रदोष का व्रत बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता देने वाला माना गया है।

परिवार ने बुधवार के दिन प्रदोष व्रत किया। सबने उपवास रखा, भगवान शिव को हरे फल, बेलपत्र और जल अर्पित किया। कथा श्रवण के बाद आरती की गई और प्रसाद बांटा गया। कुछ ही समय में परिवार के व्यापार में सुधार हुआ, पुत्र की वाणी मधुर हुई और उसके निर्णय सफल होने लगे। मित्र और संबंधी भी फिर से निकट आने लगे।

बुध प्रदोष व्रत से बुद्धि की शुद्धि, व्यापार में लाभ, वाणी में मधुरता और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। यह व्रत विशेष रूप से विद्यार्थियों, व्यापारियों और विवेक की चाह रखने वालों के लिए शुभ माना जाता है।