Sanatan Vani • Devotion, wisdom and reading
23 Mar 2026
Sanatan Vani Sacred wisdom in a modern form
Vrat Katha

अजा एकादशी व्रत कथा

श्मशान का पहरेदार कैसे बना फिर से चक्रवर्ती राजा? 😱 जानिए अजा एकादशी का वो दिव्य रहस्य जिसने बदली हरिश्चंद्र की किस्मत। 👇

अजा एकादशी व्रत कथा
Google AdSense Space

॥ श्री अजा एकादशी व्रत कथा (सम्पूर्ण वृत्तांत) ॥ 🐚✨🔱

धर्मराज युधिष्ठिर बोले— "हे जनार्दन! अब आप कृपा करके भाद्रपद कृष्ण एकादशी के बारे में बताएं। इसका नाम क्या है और इसकी कथा क्या है?"

भगवान श्री कृष्ण ने उत्तर दिया— "हे कुन्तीपुत्र! इस एकादशी का नाम 'अजा' है। जो मनुष्य इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करता है, उसके सभी संचित पाप नष्ट हो जाते हैं। इसकी कथा सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के जीवन से जुड़ी है। ध्यानपूर्वक सुनो।"

१. चक्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र की कठिन परीक्षा

प्राचीन काल में 'अयोध्या' नगरी में राजा हरिश्चंद्र नाम के एक चक्रवर्ती राजा राज्य करते थे। वे अपनी सत्यवादिता और धर्मपरायणता के लिए तीनों लोकों में प्रसिद्ध थे। एक बार अपनी सत्य की परीक्षा देने के लिए उन्होंने अपना सारा राज्य त्याग दिया और स्वयं को, अपनी पत्नी तारामती और पुत्र रोहित को भी बेच दिया।

२. काशी में चाण्डाल की दासता

राजा हरिश्चंद्र को काशी के एक चाण्डाल ने खरीदा। राजा वहां श्मशान घाट पर पहरा देने और मृतकों के कफ़न का कर वसूलने का काम करने लगे। वे दिन-भर मुर्दे जलाते और अत्यंत कष्टमय जीवन व्यतीत करते थे। कई वर्ष बीत गए, लेकिन राजा ने अपना धर्म और सत्य नहीं छोड़ा।

अत्यंत दुख की स्थिति में भी वे यही सोचते रहते थे कि— "मुझसे ऐसा कौन सा पाप हुआ, जिसके कारण मुझे यह नीच कर्म करना पड़ रहा है और अपने परिवार से बिछड़ना पड़ा?"

३. महर्षि गौतम का आगमन और परामर्श

एक दिन राजा अत्यंत चिंतामग्न बैठे थे, तभी वहां महर्षि गौतम पधारे। राजा ने मुनि को प्रणाम किया और अपनी व्यथा सुनाई। राजा बोले— "हे ऋषिवर! मैं इस नरक जैसी स्थिति से कब मुक्त होऊँगा? क्या मेरे दुखों का कोई अंत है?"

महर्षि गौतम ने कहा— "हे राजन्! आज से सात दिन बाद भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की 'अजा एकादशी' आने वाली है। तुम उस दिन विधिपूर्वक व्रत करो और रात्रि में जागरण करो। इस व्रत के पुण्य से तुम्हारे पूर्व जन्मों के सभी पाप भस्म हो जाएंगे और तुम्हें पुनः सुख-समृद्धि प्राप्त होगी।"

४. अजा एकादशी का व्रत और सिद्धि

राजा हरिश्चंद्र ने महर्षि गौतम के कहे अनुसार 'अजा एकादशी' का निराहार व्रत रखा। उन्होंने पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु का पूजन किया और रात भर जागकर कीर्तन किया।

अगले दिन सुबह होते ही एक चमत्कार हुआ। स्वर्ग से देवताओं ने राजा पर पुष्प वर्षा की। राजा ने देखा कि उनका पुत्र रोहित, जो सर्प के डसने से मर चुका था, पुनः जीवित हो गया है। उनकी पत्नी तारामती राजसी वस्त्रों में खड़ी है और उनका खोया हुआ राज्य 'अयोध्या' उन्हें वापस मिल गया है।

५. पापों से मुक्ति और वैकुण्ठ गमन

अजा एकादशी के प्रभाव से राजा के सभी कष्ट समाप्त हो गए। उन्होंने कई वर्षों तक पुनः धर्मपूर्वक राज्य किया और अंत में अपने परिजनों और प्रजा सहित वैकुण्ठ लोक को प्रस्थान किया।


॥ व्रत का महत्व और फल ॥ 📋💎

भगवान श्री कृष्ण कहते हैं— "हे युधिष्ठिर! जो मनुष्य अजा एकादशी का व्रत करता है, उसे वही फल मिलता है जो हज़ारों वर्षों की तपस्या से भी दुर्लभ है। इस कथा को पढ़ने या सुनने मात्र से ही अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

Google AdSense Space