सनातन वाणी • भक्ति, ज्ञान और शास्त्रीय पाठ
04 Aug 2026
Sanatan Vani आधुनिक रूप में सनातन ज्ञान
वैदिक एवं पौराणिक साधना

मंत्र साधना

1100 शुद्ध मंत्रों का श्रेणीबद्ध संपादकीय संग्रह। प्रकार, उपप्रकार, देवता और कष्ट/मनोकामना के अनुसार मंत्र खोजें।

🔍
452 मंत्र मिले • ग्रह-शांति सभी फ़िल्टर साफ़ करें
#740 चामुण्डा

चामुण्डा गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ चामुण्डा विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र दुष्प्रभाव शमन
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om chaamunda vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

निर्भयता, सुरक्षा, शक्ति

लाभ / अर्थ

निर्भयता, सुरक्षा, शक्ति से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#743 चामुण्डा

चामुण्डा शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय चामुण्डा, मेरे दुष्प्रभाव शमन का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र दुष्प्रभाव शमन
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya chaamunda, mere dushprabhaava shamana ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

निर्भयता, सुरक्षा, शक्ति

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#745 कौशिकी

कौशिकी कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री कौशिकी कृपां कुरु नमः
क्षेत्र तेजस्विनी शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri kaushiki kripaan kuru namah

उद्देश्य

आत्मबल, विजय, ऊर्जा, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

आत्मबल, विजय, ऊर्जा में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#747 कौशिकी

कौशिकी गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ कौशिकी विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र तेजस्विनी शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om kaushiki vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

आत्मबल, विजय, ऊर्जा

लाभ / अर्थ

आत्मबल, विजय, ऊर्जा से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#750 कौशिकी

कौशिकी शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय कौशिकी, मेरे तेजस्विनी शक्ति का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र तेजस्विनी शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya kaushiki, mere tejasvini shakti ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

आत्मबल, विजय, ऊर्जा

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#752 महेश्वरी

महेश्वरी कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री महेश्वरी कृपां कुरु नमः
क्षेत्र शैव शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri maheshvari kripaan kuru namah

उद्देश्य

गौरव, स्थिरता, रक्षा, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

गौरव, स्थिरता, रक्षा में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#754 महेश्वरी

महेश्वरी गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ महेश्वरी विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र शैव शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om maheshvari vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

गौरव, स्थिरता, रक्षा

लाभ / अर्थ

गौरव, स्थिरता, रक्षा से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#757 महेश्वरी

महेश्वरी शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय महेश्वरी, मेरे शैव शक्ति का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र शैव शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya maheshvari, mere shaiva shakti ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

गौरव, स्थिरता, रक्षा

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#759 वैष्णवी

वैष्णवी कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री वैष्णवी कृपां कुरु नमः
क्षेत्र वैष्णव शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri vaishnavi kripaan kuru namah

उद्देश्य

पालन, संतुलन, करुणा, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

पालन, संतुलन, करुणा में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#761 वैष्णवी

वैष्णवी गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ वैष्णवी विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र वैष्णव शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om vaishnavi vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

पालन, संतुलन, करुणा

लाभ / अर्थ

पालन, संतुलन, करुणा से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#764 वैष्णवी

वैष्णवी शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय वैष्णवी, मेरे वैष्णव शक्ति का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र वैष्णव शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya vaishnavi, mere vaishnava shakti ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

पालन, संतुलन, करुणा

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#766 ब्राह्मणी

ब्राह्मणी कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री ब्राह्मणी कृपां कुरु नमः
क्षेत्र ज्ञान-शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri braahmani kripaan kuru namah

उद्देश्य

ज्ञान, विवेक, शांत बुद्धि, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

ज्ञान, विवेक, शांत बुद्धि में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#768 ब्राह्मणी

ब्राह्मणी गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ ब्राह्मणी विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र ज्ञान-शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om braahmani vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

ज्ञान, विवेक, शांत बुद्धि

लाभ / अर्थ

ज्ञान, विवेक, शांत बुद्धि से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#771 ब्राह्मणी

ब्राह्मणी शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय ब्राह्मणी, मेरे ज्ञान-शक्ति का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र ज्ञान-शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya braahmani, mere jnyaana-shakti ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

ज्ञान, विवेक, शांत बुद्धि

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#773 इन्द्राणी

इन्द्राणी कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री इन्द्राणी कृपां कुरु नमः
क्षेत्र तेज और नेतृत्व
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri indraani kripaan kuru namah

उद्देश्य

प्रतिष्ठा, तेज, आत्मविश्वास, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

प्रतिष्ठा, तेज, आत्मविश्वास में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#775 इन्द्राणी

इन्द्राणी गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ इन्द्राणी विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र तेज और नेतृत्व
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om indraani vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

प्रतिष्ठा, तेज, आत्मविश्वास

लाभ / अर्थ

प्रतिष्ठा, तेज, आत्मविश्वास से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#778 इन्द्राणी

इन्द्राणी शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय इन्द्राणी, मेरे तेज और नेतृत्व का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र तेज और नेतृत्व
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya indraani, mere teja aur netritva ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

प्रतिष्ठा, तेज, आत्मविश्वास

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#780 वाराही

वाराही कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री वाराही कृपां कुरु नमः
क्षेत्र भूमि-शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri vaaraahi kripaan kuru namah

उद्देश्य

स्थिरता, सुरक्षा, आधार, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

स्थिरता, सुरक्षा, आधार में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#782 वाराही

वाराही गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ वाराही विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र भूमि-शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om vaaraahi vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

स्थिरता, सुरक्षा, आधार

लाभ / अर्थ

स्थिरता, सुरक्षा, आधार से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#785 वाराही

वाराही शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय वाराही, मेरे भूमि-शक्ति का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र भूमि-शक्ति
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya vaaraahi, mere bhoomi-shakti ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

स्थिरता, सुरक्षा, आधार

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#787 नंदीश्वर

नंदीश्वर कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री नंदीश्वर कृपां कुरु नमः
क्षेत्र सेवा और निष्ठा
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri nandeeshvara kripaan kuru namah

उद्देश्य

निष्ठा, सेवा, श्रद्धा, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

निष्ठा, सेवा, श्रद्धा में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#789 नंदीश्वर

नंदीश्वर गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ नंदीश्वर विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र सेवा और निष्ठा
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om nandeeshvara vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

निष्ठा, सेवा, श्रद्धा

लाभ / अर्थ

निष्ठा, सेवा, श्रद्धा से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#792 नंदीश्वर

नंदीश्वर शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय नंदीश्वर, मेरे सेवा और निष्ठा का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र सेवा और निष्ठा
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya nandeeshvara, mere seva aur nishtha ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

निष्ठा, सेवा, श्रद्धा

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#794 दक्षिणामूर्ति

दक्षिणामूर्ति कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री दक्षिणामूर्ति कृपां कुरु नमः
क्षेत्र मौन-ज्ञान
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri dakshinaamoorti kripaan kuru namah

उद्देश्य

अध्ययन, गुरु-कृपा, विवेक, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

अध्ययन, गुरु-कृपा, विवेक में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।