सनातन वाणी • भक्ति, ज्ञान और शास्त्रीय पाठ
02 Aug 2026
Sanatan Vani आधुनिक रूप में सनातन ज्ञान
वैदिक एवं पौराणिक साधना

मंत्र साधना

1100 शुद्ध मंत्रों का श्रेणीबद्ध संपादकीय संग्रह। प्रकार, उपप्रकार, देवता और कष्ट/मनोकामना के अनुसार मंत्र खोजें।

🔍
452 मंत्र मिले • ग्रह-शांति सभी फ़िल्टर साफ़ करें
#633 अनंत

अनंत कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री अनंत कृपां कुरु नमः
क्षेत्र अनंत नारायण
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri ananta kripaan kuru namah

उद्देश्य

दीर्घ दृष्टि, धैर्य, सहनशक्ति, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

दीर्घ दृष्टि, धैर्य, सहनशक्ति में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#635 अनंत

अनंत गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ अनंत विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र अनंत नारायण
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om ananta vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

दीर्घ दृष्टि, धैर्य, सहनशक्ति

लाभ / अर्थ

दीर्घ दृष्टि, धैर्य, सहनशक्ति से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#638 अनंत

अनंत शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय अनंत, मेरे अनंत नारायण का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र अनंत नारायण
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya ananta, mere ananta naaraayana ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

दीर्घ दृष्टि, धैर्य, सहनशक्ति

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#640 पद्मनाभ

पद्मनाभ कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री पद्मनाभ कृपां कुरु नमः
क्षेत्र विष्णु-समृद्धि
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri padmanaabha kripaan kuru namah

उद्देश्य

शांति, समृद्धि, धारण-शक्ति, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

शांति, समृद्धि, धारण-शक्ति में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#642 पद्मनाभ

पद्मनाभ गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ पद्मनाभ विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र विष्णु-समृद्धि
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om padmanaabha vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

शांति, समृद्धि, धारण-शक्ति

लाभ / अर्थ

शांति, समृद्धि, धारण-शक्ति से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#645 पद्मनाभ

पद्मनाभ शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय पद्मनाभ, मेरे विष्णु-समृद्धि का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र विष्णु-समृद्धि
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya padmanaabha, mere vishnu-samriddhi ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

शांति, समृद्धि, धारण-शक्ति

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#646 श्रीधर

श्रीधर नाम मंत्र

सगुण मंत्र नाम मंत्र
ॐ श्री श्रीधर नमः
क्षेत्र लक्ष्मी-विष्णु अनुग्रह
स्रोत लोकप्रचलित

उच्चारण (Transliteration)

om shri shreedhara namah

उद्देश्य

गृह-सौभाग्य, संतुलन

लाभ / अर्थ

गृह-सौभाग्य, संतुलन की साधना-भावना, मनोबल और सकारात्मक एकाग्रता में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

दैनिक जप के लिए सरल रूप।

#647 श्रीधर

श्रीधर कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री श्रीधर कृपां कुरु नमः
क्षेत्र लक्ष्मी-विष्णु अनुग्रह
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri shreedhara kripaan kuru namah

उद्देश्य

गृह-सौभाग्य, संतुलन, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

गृह-सौभाग्य, संतुलन में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#648 श्रीधर

श्रीधर कार्यसिद्धि मंत्र

सगुण मंत्र कार्यसिद्धि
ॐ श्री श्रीधर कार्यसिद्धिं देहि नमः
क्षेत्र लक्ष्मी-विष्णु अनुग्रह
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri shreedhara kaaryasiddhin dehi namah

उद्देश्य

कार्यसिद्धि, गृह-सौभाग्य, संतुलन

लाभ / अर्थ

लक्ष्य पर मन को केंद्रित करने और सकारात्मक संकल्प में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

जप से पहले स्पष्ट संकल्प करें।

#649 श्रीधर

श्रीधर गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ श्रीधर विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र लक्ष्मी-विष्णु अनुग्रह
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shreedhara vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

गृह-सौभाग्य, संतुलन

लाभ / अर्थ

गृह-सौभाग्य, संतुलन से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#650 श्रीधर

श्रीधर बीज-युक्त तांत्रिक मंत्र

तांत्रिक मंत्र सौम्य बीज-युक्त
ॐ ह्रीं श्रीं श्रीधर नमः
क्षेत्र लक्ष्मी-विष्णु अनुग्रह
स्रोत लोकप्रचलित

उच्चारण (Transliteration)

om hreen shreen shreedhara namah

उद्देश्य

गृह-सौभाग्य, संतुलन

लाभ / अर्थ

गृह-सौभाग्य, संतुलन के प्रति श्रद्धा, मनोबल और साधना-ऊर्जा बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

सौम्य तांत्रिक-रूप; गहन साधना हेतु परंपरा/गुरु-मार्गदर्शन वांछनीय है।

#651 श्रीधर

श्रीधर रक्षा मंत्र

तांत्रिक मंत्र रक्षा मंत्र
ॐ श्री श्रीधर रक्ष रक्ष स्वाहा
क्षेत्र लक्ष्मी-विष्णु अनुग्रह
स्रोत लोकप्रचलित

उच्चारण (Transliteration)

om shri shreedhara raksha raksha svaaha

उद्देश्य

रक्षा, गृह-सौभाग्य, संतुलन

लाभ / अर्थ

भय में कमी, सुरक्षा-भाव और आंतरिक स्थिरता में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

रक्षा-साधना के रूप में लोकप्रचलित।

#652 श्रीधर

श्रीधर शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय श्रीधर, मेरे लक्ष्मी-विष्णु अनुग्रह का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र लक्ष्मी-विष्णु अनुग्रह
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya shreedhara, mere lakshmee-vishnu anugraha ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

गृह-सौभाग्य, संतुलन

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#654 जनार्दन

जनार्दन कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री जनार्दन कृपां कुरु नमः
क्षेत्र लोक-रक्षक विष्णु
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri janaardana kripaan kuru namah

उद्देश्य

रक्षा, सद्बुद्धि, कर्तव्य, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

रक्षा, सद्बुद्धि, कर्तव्य में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#656 जनार्दन

जनार्दन गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ जनार्दन विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र लोक-रक्षक विष्णु
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om janaardana vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

रक्षा, सद्बुद्धि, कर्तव्य

लाभ / अर्थ

रक्षा, सद्बुद्धि, कर्तव्य से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#659 जनार्दन

जनार्दन शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय जनार्दन, मेरे लोक-रक्षक विष्णु का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र लोक-रक्षक विष्णु
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya janaardana, mere loka-rakshaka vishnu ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

रक्षा, सद्बुद्धि, कर्तव्य

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#661 हृषीकेश

हृषीकेश कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री हृषीकेश कृपां कुरु नमः
क्षेत्र इंद्रिय-नियमन
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri hrisheekesha kripaan kuru namah

उद्देश्य

संयम, योग, साधना, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

संयम, योग, साधना में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#663 हृषीकेश

हृषीकेश गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ हृषीकेश विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र इंद्रिय-नियमन
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om hrisheekesha vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

संयम, योग, साधना

लाभ / अर्थ

संयम, योग, साधना से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#666 हृषीकेश

हृषीकेश शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय हृषीकेश, मेरे इंद्रिय-नियमन का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र इंद्रिय-नियमन
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya hrisheekesha, mere indriya-niyamana ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

संयम, योग, साधना

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#668 पुरुषोत्तम

पुरुषोत्तम कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री पुरुषोत्तम कृपां कुरु नमः
क्षेत्र श्रेष्ठ पुरुषार्थ
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri purushottama kripaan kuru namah

उद्देश्य

उत्कर्ष, नीति, पुरुषार्थ, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

उत्कर्ष, नीति, पुरुषार्थ में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#670 पुरुषोत्तम

पुरुषोत्तम गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ पुरुषोत्तम विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र श्रेष्ठ पुरुषार्थ
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om purushottama vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

उत्कर्ष, नीति, पुरुषार्थ

लाभ / अर्थ

उत्कर्ष, नीति, पुरुषार्थ से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।

#673 पुरुषोत्तम

पुरुषोत्तम शाबर-शैली लोकमंत्र

शाबर मंत्र सौम्य लोकमंत्र
जय पुरुषोत्तम, मेरे श्रेष्ठ पुरुषार्थ का मंगल करो, स्वाहा
क्षेत्र श्रेष्ठ पुरुषार्थ
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

jaya purushottama, mere shreshtha purushaartha ka mangal karo, svaaha

उद्देश्य

उत्कर्ष, नीति, पुरुषार्थ

लाभ / अर्थ

सरल लोक-भक्ति, मनोबल और भावनात्मक सहारे में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह सौम्य शाबर-शैली लोकजप रूप है; किसी भी हानिकारक/वशीकरण प्रयोग को शामिल नहीं किया गया है।

#675 वेंकटेश

वेंकटेश कृपा मंत्र

सगुण मंत्र कृपा मंत्र
ॐ श्री वेंकटेश कृपां कुरु नमः
क्षेत्र कल्याणकारी विष्णु
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om shri venkatesha kripaan kuru namah

उद्देश्य

समृद्धि, शरण, सौभाग्य, अनुग्रह

लाभ / अर्थ

समृद्धि, शरण, सौभाग्य में अनुकूलता और श्रद्धा-भाव बढ़ाने में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

#677 वेंकटेश

वेंकटेश गायत्री-रूप मंत्र

गायत्री-रूप मंत्र संपादकीय गायत्री
ॐ वेंकटेश विद्महे मंगलरूपा धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात्॥
क्षेत्र कल्याणकारी विष्णु
स्रोत संपादकीय विस्तार

उच्चारण (Transliteration)

om venkatesha vidmahe mangalaroopa dheemahi tanno devah prachodayaat.

उद्देश्य

समृद्धि, शरण, सौभाग्य

लाभ / अर्थ

समृद्धि, शरण, सौभाग्य से जुड़ी साधना, चिंतन और स्मरण-शक्ति में सहायक।

जप संख्या एवं नियम

यह गायत्री-रूप संपादकीय विस्तार है; विभिन्न परंपराओं में पाठ-भेद संभव हैं।